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एक्टर से नेता बने थलापति विजय ने आधिकारिक तौर पर सिनेमा छोड़कर एक नई पारी का आगाज कर दिया है. उनकी पार्टी, तमिलगा वेत्त्री कझगम (TVK), ने उन्हें पेरंबूर और त्रिची ईस्ट सीटों से उम्मीदवार बनाया. आज रुझानों में एक्टर की पार्टी तमिलनाडु की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरते दिख रही है. एक्टर की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ 8 मई को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है.

नई दिल्ली. थलापति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज से पहले आज आपको एक्टर की उन फिल्मों के बारे में बताते हैं जिन्होंने उन्हें सुपरस्टार बनाया. थलापति विजय के फिल्मी करियर का पर्दा गिरे उससे पहले आपको उनकी ये बेहतरीन फिल्में जरूर देखनी चाहिए. तो चलिए जानते हैं-

सुपरस्टार थलापति विजय अब राजनीति में कदम रख चुके हैं तो सबसे पहले उनकी पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म के बारे में बात करते हैं. साल 2018 में एक्टर की फिल्म सरकार आई थी. ये एक तेज-तर्रार पॉलिटिकल ड्रामा है, जो चुनावी गड़बड़ियों और एक वोट की अहमियत को प्रभावशाली तरीके से सामने लाती है.

फिल्म में थलापति विजय एक सफल कॉर्पोरेट प्रोफेशनल के रूप में नजर आते हैं, जो विदेश से भारत लौटकर वोटिंग सिस्टम में मौजूद खामियों को चुनौती देता है. कहानी न सिर्फ राजनीति की सच्चाइयों को उजागर करती है, बल्कि मतदाताओं के अधिकार और जिम्मेदारी को भी मजबूती से सामने रखती है, जिसने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी.
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साल 2017 में सुपरस्टार की फिल्म ‘मर्सल’ आई थी. ये फिल्म कमर्शियल और पैरलल सिनेमा का अनदेखा मेल है. ‘मर्सल’ में थलापति विजय ने डबल रोल अदा किया था और इसकी रिलीज से समाज पर सवाल खड़ा किया और सिस्टम को हिला कर रख दिया. फिल्म स्वास्थ्य सेवा में बढ़ती लागत और इलाज की असमानता जैसे मुद्दों को उठाया था.

अब बात साल 2012 में आई फिल्म ‘थुप्पक्की’ की करते हैं. यह मुख्य रूप से एक एक्शन थ्रिलर है, लेकिन इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सतर्कता का मजबूत संदेश है. विजय ने इसमें एक आर्मी ऑफिसर का किरदार निभाया है, जो देशभक्ति और नागरिक जिम्मेदारी को दर्शाता है.

मास्टर (2021)- ‘मास्टर’ फिल्म एक क्राइम थ्रिलर फिल्म थी. इसमें युवाओं के नेचर और क्राइम पर स्टोरी दिखाई गई है. फिल्म में सिस्टम की खामियों और मेंटरशिप और जवाबदेही की अहमियत को बारिकियों के साथ पेश किया गया है.

‘कठ्ठी’ (2014) को थलापति विजय के करियर की सबसे असरदार और सामाजिक रूप से जागरूक फिल्मों में गिना जाता है. यह कहानी किसानों की आत्महत्याओं, पानी और जमीन जैसे संसाधनों पर कॉर्पोरेट कब्जे और ग्रामीण भारत के संघर्ष को केंद्र में रखती है. फिल्म में विजय का डबल रोल है, जहां एक किरदार सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाता है और शोषण के खिलाफ लड़ाई का चेहरा बनता है.

बिगिल (2019- खेल से आगे बढ़कर, बिगिल महिलाओं के सशक्तिकरण और महिला खिलाड़ियों के सामने आने वाली सामाजिक चुनौतियों को दिखाती है. विजय की दोहरी भूमिका जेंडर इक्वालिटी और खेलों में सपोर्ट सिस्टम की जरूरत को उजागर करती है.

