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Lata Mangeshkar Evergreen Song : जावेद अख्तर ने दर्जनों यादगार गाने लिखे हैं, जिन्हें अलग-अलग पीढ़ी के लोग बड़े चाव से गुनगुनाते हैं. वे इन गानों को अपने करीब पाते हैं. जावेद अख्तर यूं तो मिनटों में फिल्मों के गाने लिख देते हैं, मगर एक आइकॉनिक गाना लिखने में उनके भी पसीने छूट गए थे, जिसे लता मंगेशकर ने गाया था. जावेद अख्तर ने खुद एक इंटरव्यू में बताया कि क्यों उन्हें यह गाना लिखने में परेशानी हुई थी? फिल्म ‘लगान’ का यह कालजयी गाना 25 साल बाद भी लोगों का पसंदीदा है.

नई दिल्ली: आमिर खान की फिल्म ‘लगान’ के साथ इसके गाने भी सुपरहिट थे. लोग 25 साल बाद भी उन्हें गुनगुनाना पसंद करते हैं. गीतकार जावेद अख्तर ने फिल्म के लिए कई आइकॉनिक गाने लिखे थे. मगर एक गाना लिखते वक्त वह भी दुविधा में फंस गए थे. दरअसल, उन्हें मेकर्स ने फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से एक भजन लिखने को कहा, जबकि वह एक नास्तिक हैं. उन्होंने तमाम चुनौतियों के बावजूद ‘ओ पालनहारे’ भजन लिखा. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

स्पॉटिफाई की ‘बिहाइंड द बीट्स’ सीरीज में आमिर खान, ए.आर. रहमान और जावेद अख्तर ने साथ बैठकर पुरानी यादें ताजा कीं. जावेद अख्तर ने बताया कि ‘ओ पालनहारे’ भजन लिखना उनके लिए सबसे मुश्किल काम था. उन्होंने कहा कि वह खुद एक नास्तिक हैं, इसलिए भगवान की भक्ति में डूबा गाना लिखना उनके लिए बड़ी चुनौती थी. लेकिन एआर रहमान की धुन में ऐसा जादू था कि उन्हें अपने भीतर से सच्ची मासूमियत और समर्पण लाना ही पड़ा. गाने को लता मंगेशकर ने गाया है और संगीत एआर रहमान ने तैयार किया है.
(फोटो साभार: IMDb)

फिल्म के पहले गाने ‘घनन घनन’ को याद करते हुए आमिर खान ने बताया कि यह धुन सुनते ही उन्हें तुरंत पसंद आ गई थी. यह गाना फिल्म की कहानी के हिसाब से बहुत जरूरी था क्योंकि इसे पानी की किल्लत और बादलों को देखकर मिलने वाली खुशी को दिखाना था. आशुतोष गोवारिकर ने बताया कि रहमान ने पहले तीन घंटे का म्यूजिक सुनाया था, जिसमें से उन्होंने यह धुन चुनी थी. (फोटो साभार: IMDb)
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एआर रहमान ने बताया कि ‘ओ रे छोरी’ गाने की धुन असल में ‘लगान’ के लिए नहीं, बल्कि उनकी एल्बम ‘मां तुझे सलाम’ के लिए बनी थी. यह पहले काफी स्लो थी, जिसे आमिर खान के कहने पर बाद में फास्ट और एनर्जेटिक बनाया गया. इस गाने के इंग्लिश बोल जावेद अख्तर के बच्चों फरहान और जोया ने लिखे थे. (फोटो साभार: IMDb)

जावेद अख्तर ने सुपरहिट गाने ‘मितवा’ को लेकर बताया कि यह शब्द गाने में पहले था ही नहीं. एआर रहमान को गाने के बीच में एक ऐसा शब्द चाहिए था जो लोगों की जुबां पर चढ़ जाए यानी ‘हुक वर्ड’ बन सके. ‘मितवा’ शब्द का जन्म हुआ. जावेद साहब ने हिंदी पर पकड़ न होने के बावजूद एआर रहमान की म्यूजिकल समझ की जमकर तारीफ की.
(फोटो साभार: IMDb)

डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर के लिए ‘राधा कैसे ना जले’ सिर्फ एक गाना नहीं था, बल्कि कहानी को आगे बढ़ाने का जरिया था. यह गाना भुवन के लिए गौरी और एलिजाबेथ दोनों के दिलों में बढ़ते प्यार और चुलबुली केमिस्ट्री को दिखाने के लिए रखा गया था. जावेद अख्तर ने हंसते हुए बताया कि उनके एक डॉक्टर दोस्त को कृष्ण और राधा की बातचीत काफी मॉडर्न लगी थी. (फोटो साभार: IMDb)

शो के दौरान सबसे ज्यादा हंसी-मजाक ‘चले चलो’ गाने को लेकर हुआ. आशुतोष गोवारिकर ने बताया कि एआर रहमान ने जब पहली बार यह धुन बनाई थी, तो इसमें ‘चले चलो’ की जगह ‘नशा नशा’ शब्द थे. आमिर और आशुतोष को यह शब्द इतने पसंद आ गए थे कि वे इसे ही रखना चाहते थे, लेकिन जावेद अख्तर ने उन्हें डांटकर मना कर दिया. (फोटो साभार: IMDb)

जावेद साहब ने मजाकिया अंदाज में कहा कि किसान भूखे मर रहे हैं, बारिश नहीं हो रही, तीन गुना लगान देना है और ये लोग गाने में ‘नशा नशा’ लिखना चाहते थे. आखिर में एआर रहमान ने बताया कि वे इस फिल्म के म्यूजिक को हमेशा के लिए अमर बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी दिग्गज गायिकाओं को इस एल्बम के लिए चुना था. (फोटो साभार: IMDb)

