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Manoj Kumar Superhit Song: हम मनोज कुमार के जिस कालजयी गाने की बात कर रहे हैं, उसे जब रिकॉर्ड किया जा रहा था, तब उसका एक शब्द कल्याणजी-आनंदजी को बार-बार खटक रहा था. काफी मशक्कत के बाद जब शब्द बदला गया, तो गाने के लिए महेंद्र कपूर को बुलाया गया. मगर उन्हें गाने में दम नहीं लगा. वह खुद को कोस रहे थे कि उन्हें इस तरह का गाना क्यों मिला. मगर जब यह गाना रिलीज हुआ, तो उसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. 59 साल बाद भी यह गाना राष्ट्रीय पर्व और इवेंट्स पर खूब बजता है.

नई दिल्ली: हम जिस गाने की बात कर रहे हैं, उसका जलवा आज भी कायम है. मगर जिस लीजेंड सिंगर महेंद्र कपूर ने इसे गाया है, वह इसे कबाड़ गीत समझ रहे थे. उन्होंने भी नहीं सोचा था कि यह आगे चलकर कालजयी गीत बनेगा. फिल्म ‘उपकार’ का यह गाना जब लिखा गया था, तब इसमें एक बड़ी गलती थी. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

फिल्म ‘उपकार’ को लीजेंड एक्टर मनोज कुमार ने डायरेक्ट किया था. उन्हें यह फिल्म बनाने की प्रेरणा लाल बहादुर शास्त्री से मिली थी. उन्होंने मनोज कुमार को ‘जय जवान जय किसान’ पर एक फिल्म बनाने के लिए कहा था,जिसकी वजह से उन्हें ‘उपकार’ बनाने का आइडिया आया. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

फिल्म ‘उपकार’ के साथ-साथ इसके गाने भी सुपरहिट रहे थे, जिसका संगीत कल्याणजी-आनंदजी ने दिया था. उन्होंने 7-8 गाने फिल्म के लिए बनाए थे. सबके सब नायाब, कामयाब गाने थे. मगर इसका एक गाना कालजयी रहा, जिसके बिना हमारे राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस का जश्न पूरा नहीं होता. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)
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फिल्म ‘उपकार’ के गाने ‘मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती’ को महेंद्र कपूर ने गाया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गीत को गुलशन बावरा ने कल्याणजी-आनंदजी की बनाई धुन पर लिखा था. हमें यह गाना आज जैसा सुनने को मिलता है, यह शुरू में वैसा नहीं था. गाने की शुरुआत ‘मेरे देश की धरती’ पंक्ति से नहीं हुई थी. गुलशन बावरा ने लिखा था- ‘इस देश की धरती सोना उगले.’ (फोटो साभार: IMDb)

कल्याणजी-आनंदजी जब गाने को गाकर रिहर्सल कर रहे थे, तब उन्हें गाने का पहला शब्द ‘इस’ बार-बार खटक रहा था. शब्द को जिस तरह गाने के साथ चिपकना चाहिए, वह नहीं हो पा रहा था. उन्हें संगीत की धुन के साथ ‘इस’ शब्द असहज कर रहा था. गाने को लेकर बार-बार बैठके हो रही थीं, पर संतुष्टि नहीं मिल रही थी. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

गुलशन बावरा के साथ कल्याणजी-आनंदजी बैठे, मगर गीतकार को इसमें कोई खामी नहीं दिख रही थी. कल्याणजी-आनंदजी ने कहा कि ‘इस’ शब्द से वह फील नहीं बन पा रही है, जो इस गाने के लिए जरूरी है. ऐसा लग रहा है कि हम अपने देश की बात नहीं कर रहे हैं. वह ‘मेरे देश’ वाली बात नहीं आ रही है.
(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

कल्याणजी-आनंदजी के दिमाग में तुरंत ‘मेरे देश’ क्लिक कर गया. उन्होंने तुंरत ‘इस’ शब्द की जगह ‘मेरे’ शब्द को लाए जो संगीत के साथ एकदम सटीक बैठ रहा था. महेंद्र कपूर को गाने के लिए फाइनल किया गया. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

महेंद्र कपूर कई इंटरव्यू में बता चुके हैं कि जब उन्हें यह गाना मिला, तो वह खुद को कोस रहे थे. मन्ना डे को परफैक्ट गीत मिला है- ‘कसमे वादे प्यार वफा’. मुकेश कुमार को ‘दीवानों से ये मत पूछो’ परफैक्ट गाना मिला. वह कहते- ‘मुझे यह कैसा गीत मिला है, मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती.’ महेंद्र कपूर को शंका थी कि यह हिट होगा या नहीं. कल्याणजी-आनंदजी ने गाने ‘मेरे देश की धरती’ को सुबह 9 बजे रिकॉर्ड करना शुरू किया था, जो रात के 3 बजे जाकर पूरा हुआ. महेंद्र कपूर भी उनके साथ बराबर डटे रहे.
(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

