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नवाजुद्दीन सिद्दीकी उन चुनिंदा अभिनेताओं में शामिल हैं जिन्होंने अपने अभिनय के दम पर बॉलीवुड में अलग पहचान बनाई है. जहां ज्यादातर सितारे बड़े बजट और मसाला फिल्मों पर भरोसा करते हैं, वहीं नवाजुद्दीन ने ऐसी कहानियां चुनीं जो समाज की सच्चाई, इंसानी भावनाओं और जटिल किरदारों को पर्दे पर लेकर आईं. यही वजह है कि उनकी कई फिल्में पारंपरिक मनोरंजन से हटकर ‘ऑफबीट सिनेमा’ की कैटेगरी में गिनी जाती हैं.

नई दिल्ली. अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी ‘रामन राघव 2.0’ नवाजुद्दीन सिद्दीकी के करियर की सबसे दमदार फिल्मों में गिनी जाती है. यह फिल्म 1960 के दशक के कुख्यात सीरियल किलर रामन राघव से प्रेरित है. फिल्म में नवाजुद्दीन ने एक खतरनाक साइकोपैथ हत्यारे का किरदार निभाया है, जो लोगों की हत्या को एक खेल की तरह देखता है. दूसरी ओर एक पुलिस अधिकारी उसकी तलाश में जुटा रहता है. फिल्म सोनी लिव पर है.

नंदिता दास के निर्देशन में बनी ‘मंटो’ मशहूर उर्दू लेखक सादत हसन मंटो की जिंदगी पर आधारित बायोग्राफिकल ड्रामा है. फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने मंटो की भूमिका निभाई है और उनके अभिनय को खूब सराहा गया था. कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर में मंटो के संघर्ष, विवादों और लेखन यात्रा को दिखाती है. मंटो अपने बेबाक लेखन के लिए जाने जाते थे और उनकी कहानियां अक्सर समाज की कड़वी सच्चाइयों को उजागर करती थीं. फिल्म उनके निजी जीवन, आर्थिक परेशानियों और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए किए गए संघर्ष को भी सामने लाती है. इसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी के अभिनय को काफी सराहा गया था.

‘फोटोग्राफ’ एक बेहद शांत, संवेदनशील और दिल को छू लेने वाली फिल्म है. फिल्म की कहानी मुंबई में सड़क किनारे फोटो खींचने वाले रफी और एक अंतर्मुखी युवती मिलोनी के इर्द-गिर्द घूमती है. दोनों अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन किस्मत उन्हें करीब ले आती है. नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने रफी के किरदार में एक साधारण इंसान की भावनाओं को बेहद खूबसूरती से पेश किया है. फिल्म की गति धीमी है, लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी खूबी भी है.
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‘सीरियस मेन’ एक व्यंग्यात्मक ड्रामा है, जो समाज में मौजूद वर्गभेद और सफलता की अंधी दौड़ पर सवाल उठाती है. फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अय्यन मणि नाम के एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति का किरदार निभाया है, जो अपने बेटे को जीनियस साबित करने के लिए झूठ का सहारा लेता है. फिल्म नेटफ्लिक्स पर है.

‘ठाकरे’ महाराष्ट्र की राजनीति के प्रभावशाली नेता बाल ठाकरे के जीवन पर आधारित बायोपिक है. फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने बाल ठाकरे का किरदार निभाया है और उनके अभिनय को काफी सराहना मिली थी. फिल्म में बाल ठाकरे के राजनीतिक सफर, उनके विचारों और शिवसेना के गठन से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को दिखाया गया है. नवाजुद्दीन ने किरदार के बोलने के अंदाज, हावभाव और व्यक्तित्व को बखूबी पर्दे पर उतारा है. ये जी5 पर मौजूद है.

‘हरामखोर’ एक छोटे शहर की पृष्ठभूमि पर बनी संवेदनशील और विवादास्पद फिल्म है. कहानी एक स्कूल शिक्षक और उसकी छात्रा के बीच जटिल रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म सामाजिक नैतिकता, भावनात्मक उलझनों और इंसानी कमजोरियों को सामने लाती है. नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने शिक्षक के किरदार को बेहद प्रभावशाली ढंग से निभाया है. फिल्म का विषय असहज जरूर है, लेकिन इसे बेहद यथार्थवादी अंदाज में पेश किया गया है. निर्देशक ने कहानी को बिना किसी बनावटीपन के दिखाने की कोशिश की है.

‘घूमकेतु’ नवाजुद्दीन सिद्दीकी की सबसे अलग और हल्की-फुल्की फिल्मों में से एक है. फिल्म की कहानी एक छोटे शहर के युवक घूमकेतु की है, जो लेखक बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचता है. हालांकि सफलता की राह में उसे कई चुनौतियों और मजेदार परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. फिल्म बॉलीवुड की चमक-दमक और संघर्ष की दुनिया पर व्यंग्य करती है. नवाजुद्दीन ने अपने कॉमिक अंदाज से किरदार को बेहद मनोरंजक बना दिया है. फिल्म में कई दिलचस्प कैमियो भी देखने को मिलते हैं.

‘रौतु का राज़’ एक मर्डर मिस्ट्री ड्रामा है, जिसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आते हैं. कहानी उत्तराखंड के एक शांत गांव में हुई रहस्यमयी हत्या की जांच के इर्द-गिर्द घूमती है. जांच के दौरान कई ऐसे राज सामने आते हैं, जो मामले को और उलझा देते हैं. फिल्म में सस्पेंस, रहस्य और भावनात्मक तत्वों का अच्छा मिश्रण देखने को मिलता है. नवाजुद्दीन ने एक शांत लेकिन तेज दिमाग वाले पुलिस अधिकारी का किरदार बेहद सहजता से निभाया है.

