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एक वक्त था जब फिल्म इंडस्ट्री में उसे ‘फालतू एक्टर’ कहकर खारिज कर दिया गया था. किसी को अंदाजा नहीं था कि यही लड़का आगे चलकर बॉलीवुड का सुपरस्टार बनेगा. उसकी फिल्मों के लिए सिनेमाघरों के बाहर भीड़ उमड़ती थी और फैंस उसकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते थे. उसने लगातार इतनी हिट फिल्में दीं कि वो रिकॉर्ड आज भी कायम है. लेकिन, करियर के सबसे बड़े दौर में उसने एक ऐसी फिल्म को ना कह दिया, जो बाद में भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल हो गई.

नई दिल्ली. कभी इंडस्ट्री में उसे देखकर कहा गया था ‘ये लड़का हीरो नहीं बन सकता, फालतू एक्टर है.’ लेकिन किस्मत ने उसके लिए कुछ और ही लिख रखा था. वही, अभिनेता आगे चलकर ऐसा सुपरस्टार बना, जिसकी एक मुस्कान पर लाखों लड़कियां दीवानी हो गईं. घर के बाहर फैंस की लाइन लगती थी, तस्वीरों से शादी होती थी और खून से लिखे खत उसके पास पहुंचते थे. उसने लगातार इतनी हिट फिल्में दीं कि आज तक उसका रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ पाया. दिलचस्प बात ये है कि करियर के पीक पर उसने एक ऐसी फिल्म ठुकरा दी, जो बाद में बॉलीवुड की सबसे आइकॉनिक फिल्मों में शामिल हो गई. उस फैसले पर आज भी चर्चा होती है. संघर्ष, स्टारडम और हैरान कर देने वाले फैसलों से भरी इस सुपरस्टार की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है.

बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार… राजेश खन्ना. एक ऐसा नाम जिसने 1969-1972 के बीच पूरे देश को दीवाना बना दिया. लाखों दिलों पर राज करने वाले राजेश खन्ना की जिंदगी ब्लॉकबस्टर फिल्मों और आइकॉनिक गानों से कहीं ज्यादा रोचक थी. नाम बदलने से लेकर ‘फालतू एक्टर’ कहे जाने तक और मिस्टर इंडिया जैसी फिल्म ठुकराने तक – उनकी कहानी संघर्ष, किस्मत और अजेय करिश्नमा की मिसाल है.

राजेश खन्ना का स्टारडम आज भी बॉलीवुड के इतिहास में सबसे अलग माना जाता है. एक समय ऐसा था जब उनकी एक झलक पाने के लिए हजारों फैंस घर के बाहर जमा हो जाते थे. लड़कियां उनकी तस्वीरों से शादी करती थीं और खून से खत लिखकर भेजती थीं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि करोड़ों दिलों पर राज करने वाले इस सुपरस्टार को कभी ‘फालतू एक्टर’ तक कहा गया था.
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राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को हुआ था. उनका असली नाम जतिन खन्ना था. फिल्मों में आने से पहले उनके अंकल ने सुझाया कि ‘राजेश खन्ना’ नाम ज्यादा आकर्षक और यादगार लगेगा. जो सच भी हुआ, यही नाम आगे चलकर पूरे देश का चहेता बन गया. हालांकि करियर की शुरुआत में राजेश खन्ना को काफी आलोचना झेलनी पड़ी. दिग्गज अभिनेता-कॉमेडियन मेहमूद ने उन्हें एक बार ‘फालतू एक्टर’ कह दिया था. शायद उन्हें लगा कि इस लड़के में स्टार बनने की कोई खास बात नहीं है. लेकिन राजेश खन्ना ने समय के साथ सबको गलत साबित कर दिया.

1970 के दशक की शुरुआत में राजेश खन्ना ने जो कर दिखाया, वह आज भी अनोखा है. 1969 से 1971 के बीच उन्होंने 15 लगातार सोलो हिट फिल्में दीं. आराधना, आनंद, कटी पतंग, अमर प्रेम, सच्चा झूठा, दास्तान, मेरे जीवन साथी जैसी फिल्मों ने उन्हें अपराजित बना दिया. ‘राहुल’ और ‘काका’ के नाम से पुकारे जाने वाले राजेश खन्ना उस समय इतने बड़े थे कि दर्शक थिएटर के बाहर भीड़ लगाकर उनका इंतजार करते थे.

बॉलीवुड के दूसरे स्टार्स की तरह उनके हाथ से कुछ हिट फिल्में फिसल भी गईं. उन्हें कहानियों में से एक है ‘मिस्टर इंडिया’. राजेश खन्ना को फिल्म ऑफर हुई थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया. बाद में अनिल कपूर ने यह रोल किया और फिल्म क्लासिक बन गई. अगर राजेश खन्ना ने यह रोल स्वीकार कर लिया होता तो शायद भारतीय सिनेमा का इतिहास कुछ और होता. हालांकि, काका को इसका कोई मलाल नहीं था.

राजेश खन्ना के पास पागलों जैसा फैन फॉलोइंग थी. उनका स्टारडम आज के किसी भी सितारे से कई गुना ज्यादा था. फैंस उनके घर ‘आशीर्वाद’ के बाहर घंटों खड़े रहते. कुछ महिलाएं उनकी तस्वीरों से शादी कर लेतीं, उनकी कार को चूमतीं और खून से लिखे खत भेजतीं. उनका रोमांटिक अवतार पूरे देश की सांस्कृतिक दीवानगी बन गया था.

एक्टिंग के अलावा राजेश खन्ना ने राजनीति में भी कदम रखा. 1990 के दशक में वे नई दिल्ली से लोकसभा सांसद चुने गए. हालांकि, राजनीति में उन्हें उतनी सफलता नहीं मिली जितनी सिनेमा में, लेकिन यह उनके बहुमुखी व्यक्तित्व को दर्शाता है. राजेश खन्ना 18 जुलाई 2012 को इस दुनिया से गए, लेकिन उनकी विरासत आज भी जिंदा है. ‘बाबू मोशाय’, ‘क्या कर बैठे हो’, ‘रोशन तुम्हें’ जैसे डायलॉग और गाने आज भी सुनाई देते हैं.। ‘फालतू एक्टर’ कहे जाने वाले जतिन खन्ना ने न सिर्फ खुद को साबित किया बल्कि पूरे इंडस्ट्री का मुकुट बन गए.

