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मोहम्मद रफी बहुत ही नेकदिल इंसान थे. वो अपने उसूलों से समझौता नहीं करते थे. एक बार तो उन्होंने गाने की रिकॉर्डिंग बीच में ही छोड़ दी थी. गाने के सिर्फ तीन अंतरे ही गाए थे और चौथा अंतरा छोड़कर स्टूडियो से निकल गए थे. इस फिल्म का सबसे ब्लॉकबस्टर गाना किशोर कुमार ने गाया था. आज भी जब किसी को प्यार होता है तो किशोर कुमार का अमर गाना उसके होठों पर आ ही जाता है. फिल्म में लता मंगेशकर का भी एक सुपरहिट सॉन्ग था. मोहम्मद रफी ने इंसानियत से दिल जीता. वैसे तो हर फिल्म का टाइटल अलग होता है. फिर भी समय-समय पर एक जैसे टाइटल से फिल्में बनती रही हैं. 17 साल के अंतराल में ऐसी ही दो फिल्में बनाई गईं जिनका टाइटल सेम था. एक फिल्म में पिता ने काम किया था तो दूसरी में बेटे ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. पिता ने बाजी मारी. उसी की फिल्म के गाने अमर हुए. बेटे की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई. मजेदार बात यह है कि पिता जहां सुपर स्टार रहे, वहीं बेटा 90 के दशक में फ्लॉप रहा. हम बात कर रहे हैं 1981 में रिलीज हुई कुदरत फिल्म की जिसमें राजेश खन्ना-विनोद खन्ना, हेमा मालिनी, राजकुमार लीड रोल में थे. ‘कुदरत’ नाम से ही 1998 में विनोद खन्ना के बेटे अक्षय खन्ना की फिल्म रिलीज हुई थी लेकिन यह फिल्म फ्लॉप हो गई थी.

1981 में सिनेमाघरों में एक फिल्म ‘कुदरत’ रिलीज हुई थी. यह एक सस्पेंस थ्रिलर फिल्म थी जिसका निर्देशन चेतन आनंद ने किया था. फिल्म में राजेश खन्ना-हेमा मालिनी लीड रोल में थे. राज कुमार, प्रिया राजवंश और विनोद खन्ना सपोर्टिंग रोल में थे. फिल्म की कहानी पुनर्जन्म पर बेस्ड थी. इससे पहले राजेश खन्ना-हेमा मालिनी की पुनर्जन्म पर बनी फिल्म ‘महबूब’ आई थी जो कि फ्लॉप हो गई थी. फिल्म में आरडी बर्मन का म्यूजिक था. फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा था. इसी फिल्म के एक गाने के तीन अंतरे गाने के बाद रफी साहब ने अपना माइक उतार दिया था. फिर उन्होंने चौथा अंतरा नहीं गाया. वो गाना था : दुख-सुख की हर एक माला.

‘कुदरत’ फिल्म के प्रोड्यूसर बीएस खन्ना थे. बीएस खन्न ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘कुदरत’ फिल्म के डायरेक्टर चेतन आनंद बहुत महंगे डायरेक्टर साबित हुए थे. वो अपने ही फैसले बदल देते थे. जो गाना उनकी मर्जी से एक सिंगर की आवाज में रिकॉर्ड हो चुका था, उसी गाने को उन्होंने मोहम्मद रफी से रिकॉर्ड करवाया. यह एथिक्स के खिलाफ था. इसका एक लाख का खर्चा प्रोड्यूसर बीएस खन्ना को देना पड़ा.

दरअसल आरडी बर्मन ‘दुख सुख की हर एक माला’ गाने में स्पेशल फील लाने देना चाहते थे. स्क्रिप्ट की डिमांड के मुताबिक, एक खास इंपैक्ट उन्हें चाहिए था. एक नई आवाज में एक नए सिंगर से ऊंची पिच में गाना रिकॉर्ड करवाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने चंद्रशेखर गाडगिल को चुना. उन्होंने चेतन आनंद से बात की. चेतन आनंद को गाडगिल को आवाज पसंद आई. उन्होंने गाना रिकॉर्ड करने की अनुमति दे दी.
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गाना चंद्रशेखर गाडगिल की आवाज में रिकॉर्ड हो गया. फिर चेतन आनंद का मन बदल गया. उन्होंने आरडी बर्मन से इसी गाने को मोहम्मद रफी से रिकॉर्ड करवाने के लिए कहा. मजबूरी में आरडी बर्मन ने रफी साहब से संपर्क किया. गाना हाई पिच का था. रफी साहब ने तीन अंतरे रिकॉर्ड किए. फिर चाय-पानी का ब्रेक हो गया. इस दौरान स्टूडियो पर मौजूद किसी कर्मी ने कहा कि वो दाढ़ी वाला जो गायक इस गाने को रिकॉर्ड करने आया था, उसका सुर बहुत अच्छा था. रफी साहब ने सिंगिंग केबिन में यह बात सुन ली.

ब्रेक के बाद जब चौथा अंतरा रिकॉर्ड करने का समय आया तो रफी साहब ने आरडी बर्मन को अपने पास बुलाया और पूछा कि इस गाने को कोई और पहले रिकॉर्ड कर चुका है क्या? बर्मन दा ने पूरा किस्सा सुनाया और बताया कि चंद्रशेखर गाडगिल इस गाने को पहले ही रिकॉर्ड कर चुके हैं. डायरेक्टर चेतन आनंद की जिद के चलते फिर से रिकॉर्ड करना पड़ रहा है.

यह सुनकर रफी साहब बहुत दुखी हुए. उन्होंने चौथा अंतरा गाने से इनकार कर दिया. उन्होंने अपना हेडफोन उतारा और कहा कि क्यों किसी नए कलाकार की जिंदगी मेरे हाथों बर्बाद कर रहे हो. इतना कहकर रफी साहब स्टूडियो से बाहर चले गए. चेतन आनंद ने फिल्म में रफी साहब का गाना ही रखा मगर ऑडियो रिकॉर्ड में चंद्रशेखर गाडगिल का गाना था.

फिल्म के बाकी गाने भी लाजवाब थे. ‘तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया’ गाने की धुन आरडी बर्मन ने अपने पिता एसडी बर्मन के एक बंगाली गाने से इंस्पायर होकर बनाई थी. इसके लिए मां से इजाजत भी ली थी. फिल्म का सबसे ब्लॉकबस्टर गाना ‘हमें तुमसे प्यार कितना, ये हम नहीं जानते’ था जिसे किशोर कुमार और परवीन सुल्ताना ने गाया था. गाना मिश्र भैरवी पर आधारित था. गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी थे. परवीन सुल्ताना को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.

चेतन आनंद बेस्ट स्टोरी का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. पूरी फिल्म में सबसे खराब एक्टिंग थी. फिल्म का पेस बहुत स्लो था. सिर्फ गाने ही लोगों को बहुत पसंद आए. ज्यादातर जगह फिल्म को हिट बताया गया है लेकिन सच्चाई यही है कि फिल्म कामयाब नहीं हुई थी.

