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Mohammed Rafi Evergreen Sad Song : आमतौर पर गाने 4 से 5 मिनट लंबे होते हैं, मगर हम जिस गाने की बात कर रहे हैं, वह तकरीबन 7 मिनट लंबा है. वह बड़ा मुश्किल गाना था. चूंकि हर अंतरे के बाद उसका संगीत बदलता है, इसलिए मोहम्मद रफी जैसे दिग्गज गायक ने इसे रिकॉर्ड करते वक्त कई रीटेक दिए थे. मदन मोहन के संगीत से सजे गाने को राज कुमार पर फिल्माया गया था.

नई दिल्ली: मोहम्मद रफी और मदन मोहन ने साथ में कई शानदार गाने दिए, हालांकि एक मुश्किल गाने की रिकॉर्डिंग के वक्त दोनों सितारों के पसीने छूट गए थे. मोहम्मद रफी को कई बार रीटेक देना पड़ा था. मदन मोहन जब भी मोहम्मद रफी के साथ कोई गाना रिकॉर्ड करते थे, तो उनसे पूछ लेते थे कि क्या उन्होंने ‘याहू’ टाइप का कोई गाना तो रिकॉर्ड नहीं किया? जाहिर है वह रिकॉर्डिंग से पहले गायक और उनकी आवाज को सही स्थिति में पाना चाहते थे. मगर जब यह गाना रिकॉर्ड किया जा रहा था, तब दोनों ने सोचा नहीं था कि इसमें इतनी मुश्किल आएगी. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

फिल्म ‘हीर रांझा’ 1970 में आई थी, जिसका एक गाना रिकॉर्ड किया जाना था. अमूमन गाने 4 या 4.30 मिनट के होते हैं, मगर यह लगभग 7 मिनट लंबा था. इसमें चार अंतरे थे. जाहिर है इसे रिकॉर्ड करना संगीतकार और गायक दोनों के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं था. (फोटो साभार: IMDb)

आखिरकार, मोहम्मद रफी गाना रिकॉर्ड करने स्टूडियो पहुंचे. गाना कई बार रिकॉर्ड हुआ, मगर मदन मोहन रिकॉर्डिंग से संतुष्ट नहीं थे. चूंकि हर अंतरे से पहले संगीत बदल रहा था, इसलिए मदन मोहन को जो परफैक्शन चाहिए था, वो नहीं मिल रहा था.
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मदन मोहन, रफी साहब से बार-बार रिकॉर्डिंग करवा रहे थे. वे थक गए थे. मगर मोहम्मद रफी की खासियत यह थी कि जब भी मदन मोहन उन्हें रीटेक के लिए कहते, वे मुस्कुरा कर दोबारा रिकॉर्डिंग को राजी हो जाते. (फोटो साभार: IMDb)

बार-बार रीटेक से मोहम्मद रफी के चेहरे पर थकान साफ झलक रही थी. मगर रफी साहब के चेहरे पर मुस्कान मदन मोहन को भरोसा देती थी कि यह गाना परफेक्ट रिकॉर्ड होगा. कुछ ऐसा हुआ भी. कई टेक के बाद रफी साहब ने जब इसे फाइनल रिकॉर्ड किया, तो वह कमाल का है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रफी साहब ने सबसे ज्यादा रीटेक इसी गाने के लिए दिए थे. (फोटो साभार: IMDb)

हम 1970 की फिल्म ‘हीर रांझा’ के गाने ‘यह दुनिया यह महफिल मेरे काम की नहीं’ की बात कर रहे हैं. गाने के बोल महान शायर कैफी आजमी ने लिखे थे. गाने में बयां हुए गहरे दर्द को संगीत के जादूगर मदन मोहन ने अपनी धुन से अमर बना दिया था. गाना समाज की बेरुखी के खिलाफ एक बगावत भी है.(फोटो साभार: IMDb)

गाना सुनकर लगता है कि मोहम्मद रफी ने गाने में अपना दिल उड़ेल दिया है. ऊंचे सुरों में गाते हुए उनकी आवाज में जो तड़प महसूस हुई है, वह किसी को भी इमोशनल कर दे. गाने को सदाबहार अभिनेता राज कुमार पर फिल्माया गया है. रांझा के रूप में उनके चेहरे के भाव और लड़खड़ाते कदम आज भी दर्शकों की आंखों में आंसू ला देते हैं. (फोटो साभार: IMDb)

फिल्म ‘हीर रांझा’ का यह गाना उस मोड़ पर आता है, जब हीर की शादी जबरदस्ती किसी और से कर दी जाती है. रांझा पूरी तरह टूट जाता है. वह वैरागी बनने पर मजबूर हो जाता है. यह गाना हमें सिखाता है कि जब इंसान का सबसे अजीज उससे छिन जाता है, तो उसके लिए दुनिया की सारी सुख-सुविधाएं, चमक-धड़क और महफिलें पूरी तरह बेमानी हो जाती हैं.

