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राजेश खन्ना की वो हीरोइन, जो अपने परिवार के साथ एक रात पार्टी के लिए फार्महाउस गई थी. इस पार्टी के बाद अचानक यह हसीना गायब हो गई और उसके साथ उसका पूरा परिवार भी लापता हो गया. सालों तक यह मामला रहस्य बना रहा, लेकिन जब जांच के बाद सच सामने आया तो पूरे देश में सनसनी फैल गई. जिस फार्महाउस में यह एक्ट्रेस पार्टी के लिए गई थी, वहां के स्विमिंग पूल की खुदाई में एक के बाद एक कंकालों की लाइन लग गई.जांच में सामने आया कि यह कोई और नहीं बल्कि राजेश खन्ना की हीरोइन और उसका पूरा परिवार था. नीचे पढ़ें पूरी कहानी.
नई दिल्ली: साल 2011 में बॉलीवुड से जुड़ी एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया था. एक उभरती हुई अभिनेत्री, उसका पूरा परिवार और उनके साथ जुड़े कुछ लोग एक रात अचानक ऐसे गायब हो गए जैसे उनका कोई नामोनिशान ही न हो. कई महीनों तक किसी को समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है, लेकिन जब सच सामने आया तो वह बेहद चौंकाने वाला था.
लैला खान और उनका फिल्मी सफर
यह कहानी है अभिनेत्री लैला खान की, जिनका असली नाम रेशमा पटेल था. उन्होंने 2002 में कन्नड़ फिल्म ‘मेकअप’ से अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद वह 2008 की फिल्म ‘वफा: ए डेडली लव स्टोरी’ में राजेश खन्ना के साथ नजर आईं. यह फिल्म ज्यादा सफल नहीं रही, लेकिन इसके बाद लैला खान को पहचान जरूर मिली और वह चर्चा में आ गईं.
एक रात में पूरा परिवार गायब
फरवरी 2011 में लैला खान अचानक लापता हो गईं. उनके साथ उनकी मां सेलिना, चार भाई-बहन और एक कजिन भी थे. कुल मिलाकर छह लोग एक ही रात में गायब हो गए. यह सभी लोग महाराष्ट्र के इगतपुरी इलाके के एक फार्महाउस में मौजूद थे.सुबह तक वहां कोई भी नहीं मिला. न कोई आवाज, न कोई फोन कॉल और न ही कोई साफ सुराग. पूरा मामला ऐसा लग रहा था जैसे पूरा परिवार अचानक हवा में गायब हो गया हो.
जांच और सामने आए शक
लंबे समय तक पुलिस इस मामले की जांच करती रही, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला. धीरे-धीरे जांच की दिशा परिवार के करीबी लोगों की तरफ जाने लगी.जांच में शक लैला खान के सौतेले पिता परवेज इकबाल टाक पर गया. पुलिस के अनुसार, टाक और परिवार के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था. उसे लगता था कि परिवार उसे नौकर की तरह ट्रीट करता है. संपत्ति को लेकर भी विवाद थे.इसके अलावा एक और बड़ी वजह सामने आई कि परिवार दुबई शिफ्ट होने की तैयारी कर रहा था. टाक के पास पासपोर्ट नहीं था, इसलिए उसे डर था कि उसे छोड़ दिया जाएगा.
खौफनाक साजिश और हत्या का आरोप
जांच अधिकारियों के मुताबिक, इसी गुस्से और तनाव ने एक खतरनाक योजना को जन्म दिया. आरोप है कि टाक ने पूरे परिवार को इगतपुरी के फार्महाउस पर एक पारिवारिक मुलाकात के बहाने बुलाया. उस रात वहां खाना बना, बारबेक्यू हुआ, म्यूजिक चला और सभी ने पार्टी किया. इसके बाद सभी लोग सोने चले गए.आरोपों के अनुसार, इसके बाद टाक और उसके एक साथी ने सोते हुए लोगों पर लोहे की रॉड और चाकू से हमला किया. इस हमले में लैला खान, उनकी मां और बाकी सभी छह लोगों की हत्या कर दी गई.कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि पहले एक सदस्य की हत्या की गई और बाकी लोगों को इसलिए मारा गया क्योंकि वे गवाह बन सकते थे.
17 महीने बाद मिला सच और कोर्ट का फैसला
यह पूरा मामला करीब 17 महीने तक पूरी तरह रहस्य में दबा रहा. बाहर की दुनिया को सिर्फ इतना पता था कि एक पूरा परिवार अचानक गायब हो गया है, लेकिन असलियत किसी को नहीं पता थी. साल 2012 में केस में बड़ा मोड़ आया जब परवेज इकबाल टाक को जम्मू-कश्मीर में एक दूसरे मामले में गिरफ्तार किया गया. पूछताछ के दौरान उसने इस घटना से जुड़ी बातों को कबूल किया, लेकिन वह बार-बार अपना बयान बदलता रहा. इसके बाद पुलिस उसे इगतपुरी के उसी फार्महाउस पर लेकर गई. वहां पुलिस और मजदूरों ने करीब सात घंटे खुदाई की. एक गड्ढे में, जो कभी स्विमिंग पूल के लिए खोदा गया था, वहां से 6 कंकाल मिले जो लैला और उनके परिवार के ही थे. इस घटना ने हर तरफ सनसनी मचा दी थी.
जब हत्या के डेढ़ साल बाद लैला खान और उनका परिवार आखिरकार मिला और गायब होने का रहस्य खत्म हुआ. फिर मर्डर की जांच शुरू हुई. करीब 40 गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद केस कोर्ट तक पहुंचा. साल 2024 में मुंबई सेशंस कोर्ट ने परवेज इकबाल टाक को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई. कोर्ट ने इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मामला बताया.
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