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बॉलीवुड का इतिहास ग्लैमर और सफलता की कहानियों से भरा पड़ा है, लेकिन इसी गलियारे में कुछ बदकिस्मती और संघर्ष की भी कहानियां हैं. 90 के दशक में एक ऐसा एक्टर सामने आया जिसके पास टैलेंट था, लुक्स थे और एक बड़ी फिल्म से अच्छा डेब्यू भी था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. हम बात कर रहे हैं कमल सदाना की, जिन्होंने ‘बेखुदी’ से डेब्यू किया था लेकिन उन्हें वह स्टारडम नहीं मिला जिसके वे हकदार थे. हालांकि, ऑन-स्क्रीन असफलताओं के बावजूद, एक चीज ऐसी है जहां वे सुपरस्टार बने रहे- उनकी फिल्मों का सदाबहार म्यूजिक. आज भी जब 90 के दशक के रोमांटिक गानों की बात होती है, तो कमल सदाना का चेहरा और उनकी फिल्मों की धुनें लोगों के दिलों में एक खास दर्द पैदा करती हैं.

नई दिल्ली. 90 का दशक बॉलीवुड के लिए एक ऐसा समय था, जब हर साल सपनों के शहर में अपनी किस्मत आजमाने के लिए नए चेहरे आते थे. इसी दौरान एक मासूम चेहरे वाला नौजवान सामने आया, कमल सदाना. उन्होंने 1992 की फिल्म ‘बेखुदी’ में काजोल के साथ डेब्यू किया. फिल्म ने सुर्खियां बटोरीं, लेकिन सारा क्रेडिट काजोल ले गईं और कमल सिर्फ सपोर्टिंग रोल में रह गए. इसके बाद उनकी जिंदगी और करियर में जो दुखद घटना घटी, उसने उन्हें बॉलीवुड के सबसे बदकिस्मत एक्टर्स में शामिल कर दिया. लेकिन आज भी जब आप पुराने गाने सुनते हैं, तो कमल सदाना का नाम खास इज्जत से लिया जाता है. आइए, जानते हैं कि ऐसा क्या राज है जो उन्हें आज भी ‘म्यूजिकल सुपरस्टार’ बनाए हुए है? (तस्वीर बनाने में एआई की मदद ली गई है.)

कमल सदाना की जिंदगी की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम दर्दनाक नहीं है. उनके 20वें जन्मदिन पर एक ऐसी घटना घटी जिसने उनकी पूरी दुनिया ही हिलाकर रख दी. उनके पिता ने उनकी मां और बहन की हत्या कर दी और फिर खुद भी जान ले ली. इस भयानक ट्रॉमा के बावजूद, कमल ने खुद को संभाला और फिल्मों में काम करते रहे. लेकिन शायद ‘सुपरस्टार’ शब्द उनकी किस्मत में नहीं लिखा था. उनकी फिल्में एक के बाद एक फ्लॉप होती गईं और वह धीरे-धीरे मेनस्ट्रीम इंडस्ट्री से गायब हो गए.

भले ही कमल सदाना की फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों की कमाई न की हो, लेकिन उनके गानों ने जो इतिहास रचा है, वह आज के बड़े एक्टर्स के लिए भी एक सपना है. उनकी 1993 की फिल्म ‘रंग’ इसका एक बड़ा उदाहरण है. फिल्म तो सफल रही ही, लेकिन इसके गाने ‘तुझे न देखूं तो चैन मुझे आता नहीं’ और ‘तुम तुम्हें चाहे’ ने उस समय हर प्यार करने वाले के दिल में जगह बना ली थी. नदीम-श्रवण के म्यूजिक और कमल सदाना की मासूम एक्टिंग ने इन गानों को अमर बना दिया. आज भी जब ये गाने बजते हैं, तो कमल सदाना का चेहरा याद आ जाता है.
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कमल सदाना के गानों में वो चार्म था जो उस जमाने के दूसरे एक्टर्स में कम ही देखने को मिलता था. चाहे वह ‘बेखुदी’ का ‘खत मैंने तेरे नाम लिखा’ हो या उनकी दूसरी फिल्मों के रोमांटिक ट्रैक, उन्होंने हमेशा अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से गानों की रूह को पकड़ लिया. उनके गानों में प्यार का दर्द और जवानी का जोश मिला हुआ था. यही वजह है कि आज भी कमल सदाना की फिल्मों के गाने DJ नाइट्स में या पुरानी यादों के लिए रीमिक्स में सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं.

इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि कमल सदाना में वह सब कुछ था जो एक हीरो को चाहिए होता है. लेकिन, पर्सनल स्ट्रगल और खराब फिल्म च्वाइस ने उनके करियर पर असर डाला. इसके अलावा, उस दौर में शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान के आने से कमल जैसे कई उभरते स्टार्स के लिए रास्ता मुश्किल हो गया, लेकिन कमल सदाना ने कभी हार नहीं मानी.

उन्होंने डायरेक्शन में भी हाथ आजमाया और खुद को एक फिल्ममेकर के तौर पर स्थापित करने की कोशिश की. कमल सदाना भले ही लाइमलाइट से दूर हों, लेकिन उनकी लेगेसी यूट्यूब व्यूज और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर जिंदा है.

उन्हें आज भी एक ऐसे एक्टर के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने भले ही ‘हिट’ फिल्में न दी हों, लेकिन उन्होंने इंडियन फिल्म म्यूजिक को ऐसे अनमोल तोहफे दिए जिन्हें आने वाली पीढ़ियां भी गुनगुनाएंगी. उनके गानों में 90 के दशक की मासूमियत और मिठास ही है जो उन्हें आज भी लाखों लोगों के दिलों में जिंदा रखती है.

