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Bollywood Movies on Same Storyline : बॉलीवुड की कई फिल्में ऐसी हैं जो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गईं लेकिन दर्शकों के दिल में खास जगह बना गईं. जब ये फिल्में टीवी पर आईं सुपरहिट रहीं. गाने तो सुपरहिट थे ही. ऐसी फ्लॉप फिल्मों की कहानी ने कई फिल्मकारों को फिर ऐसी मूवी बनाने के लिए भी प्रेरित किया. 27 साल पहले सिनेमाघरों में ऐसी ही एक फिल्म आई थी जिसकी कहानी की बेसिक थीम कई दूसरी फिल्मों में नजर आई. इस फ्लॉप फिल्म के बेसिक आइडिया को चुराकर दो और फिल्में बनाई गईं और दोनों ही फिल्में ब्लॉकबस्टर साबित हुईं. इस तरह से एक जैसी कहानी पर कुल तीन फिल्में बनीं. तीनों ही फिल्मों का म्यूजिक भी सुपरहिट रहा.

बॉलीवुड में सुपरहिट-ब्लॉकबस्टर फिल्मों की कहानी में फेरबदल करके तो फिल्में बनाई जाती रही हैं. यह चलन बहुत पुराना है लेकिन किसी फ्लॉप फिल्म की कहानी का बेसिक आइडिया चुराकर फिल्म बनाई गई हो, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है. बॉलीवुड में कुछ भी संभव है. 1980 की एक फ्लॉप फिल्म की कहानी से मिलती-जुलती दो और फिल्में 27 साल के अंतराल में बनाई गईं. मजे की बात यह है कि दोनों ही फिल्में ब्लॉकबस्टर निकलीं. म्यूजिक तो तीनों ही फिल्मों का सुपरहिट था. दो फिल्मों की गिनती आइकॉनिक मूवी में होती है. यानी तीनों ही फिल्मों की कहानी एक जैसी थी. ये फिल्में थीं : कर्ज, करण अर्जुन और ओम शांति ओम. कर्ज मूवी से इंस्पायर्ड होकर ही ये फिल्में बनाई गईं.

शोमैन सुभाष घई के निर्देशन में बनी ‘कर्ज’ फिल्म 11 जून 1980 को रिलीज हुई थी. फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर रहा लेकिन मूवी नहीं चल पाई. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म औंधे मुंह गिर गई थी. फिल्म में ऋषि कपूर, सिमी ग्रेवाल, राज किरण और प्रेमनाथ लीड रोल में थे. स्टोरी डॉ. राही मासूम रजा ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले सचिन भौमिक ने लिखा था. सुभाष घई ने 1978 में अपना प्रोडक्शन हाउस ‘मुक्ता आर्ट्स’ खोला था. ‘कर्ज’ मुक्ता आर्ट्स के बैनर तले बनी पहली फिल्म थी.

दरअसल 1974 में अमेरिकन लेखक मैक्स एरलिक का एक नॉवेल प्रकाशित हुआ जिसका नाम ‘दी इनकार्नेशन ऑफ पीटर प्राउड’ था. 1975 में इसी नाम से एक फिल्म भी बनी. फिल्म की कहानी पुनर्जन्म की थी. 1973 में प्रोड्यूसर रवि आनंद ने ‘हिंदुस्तान की कसम’ फिल्म बनाई थी. यह मूवी पुनर्जन्म पर बेस्ड थी. चेतन आनंद इस फिल्म के निर्देशक थे. रवि आनंद ‘छोटी सी दुनिया’ नाम से ‘दी इनकार्नेशन ऑफ पीटर प्राउड’ का रीमेक बनाना चाहते थे. जब उन्हें पता चला कि सुभाष घई इसी कहानी से मिलती-जुलती फिल्म बना रहे हैं तो उन्होंने फौरन ही फिल्म बंद कर दी. प्राण के बेटे सुनील सिकंद भी इसी तरह का फिल्म बनाना चाहते थे.
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‘कर्ज’ फिल्म में ऋषि कपूर काम करने के लिए इच्छुक नहीं थे. अपने भाई रणधीर कपूर के समझने पर फिल्म के लिए हामी भरी थी. रणधीर कपूर ने कहा था कि फिल्म हिट साबित होगी. फिल्म के प्रोड्यूसर जगजीत खुराना-अख्तर फारुकी थे. फिल्म में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का सदाबहार म्यूजिक था. म्यूजिक उस समय की सभी फिल्मों से बहुत हटकर था. फिल्म का म्यूजिक आज भी उतना ही हिट है. गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे. फिल्म के तीन गाने ‘ओम शांति ओम’, ‘एक हसीना थी, एक दीवाना था’ और ‘मैं सोलह बरस’ आज भी पॉप्युलर हैं. म्यूजिक बहुत ही यूथफुल था. ‘दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-जिगर’ गजल आनंद बख्शी ने अपनी तरफ से लिखी थी. अपनी बेमिसाल गायकी से रफी साहब ने इसे अमर कर दिया.

प्यारेलाल के भाई गोरख शर्मा ने ‘कर्ज’ की वो कालजयी गिटार वाली धुन बनाई थी. यह म्यूजिक इतना असरदार था कि जब-जब फिल्म में सुनाई दिया, दर्शकों में रोमांच भर गया. गोरख शर्मा ने यह शानदार पीस जॉर्ज बेनसन की 1978 की एल्बम ‘वी एज लव’ से इंस्पायर्ड होकर बनाया था. फिल्म एंटरटेनिंग थी लेकिन चली नहीं. फिल्म के ना चलने से ऋषि कपूर डिप्रेशन का शिकार हो गए थे. फिल्म फ्लॉप होने की वजह भी सुभाष घई ने अपने एक इंटरव्यू में बताई थी. उन्होंने कहा था कि डिस्ट्रीब्यूटर्स के मुताबिक यह फिल्म समय से आगे की थी, इसलिए दर्शकों को पसंद नहीं आई. फिल्म के फ्लॉप होने की वजह फिरोज खान की फिल्म ‘कुर्बानी’ भी बनी जो इसके अगले हफ्ते रिलीज हुई थी.

‘कर्ज’ फिल्म रिलीज होने के पूरे 15 साल बाद पुनर्जन्म की कहानी पर एक और फिल्म ‘करण-अर्जुन’ आई और सिनेमाघरों में छा गई. राकेश रोशन इसके डायरेक्टर-प्रोड्यूसर थे. 13 जनवरी 1995 को रिलीज इस फिल्म में शाहरुख खान, सलमान खान, राखी, काजोल, ममता कुलकर्णी, अमरीश पुरी, रंजीत और अशोक सर्राफ जैसे सितारों ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. पहली बार शाहरुख-सलमान की जोड़ी पर्दे पर देखकर दर्शक खुश हो गए थे. म्यूजिक राजेश रोशन का था. कुल 7 गाने थे. फिल्म के ज्यादातर गाने रिजेक्टेड ट्यून पर बनाए गए थे. फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा था. फिल्म का सबसे चर्चित गाना ‘छत पर सोया था बहनोई’ और ‘ये बंधन तो प्यार का बंधन है’ था. गीतकार इंदीवर थे.

करण-अर्जुन फिल्म की कहानी सचिन भौमिक, रवि कपूर और अनवर खान ने लिखी थी. दिलचस्प बात यह भी है कि सचिन भौमिक ने ही 1980 में आई कर्ज फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखा था. यानी जो फिल्म 1980 में फ्लॉप हो गई, उसी के राइटर ने जब यह स्टोरी 90 के दशक में लिखी. करण-अर्जुन फिल्म में शाहरुख खान ने काम जरूर किया लेकिन वो फिल्म की पुनर्जन्म की कहानी पर विश्वास नहीं करते थे. उन्होंने राकेश रोशन से कहा था कि वो एक एक्टर हैं, इसलिए फिल्म में काम करेंगे लेकिन वो पुनर्जन्म की कहानी को नहीं मानते. इसी फिल्म ने शाहरुख खान-अजय देवगन के बीच ऐसे अविश्वास-धोखे की ऐसी गहरी खाई खोदी कि दोनों कभी दोस्त नहीं बन सके. 6 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 43 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी.

शाहरुख खान जब ‘करण-अर्जन’ फिल्म में काम कर रहे थे तब उन्होंने डायरेक्टर-प्रोड्यूसर राकेश रोहन से कहा था कि वो पुनर्जन्म की कहानी पर विश्वास नहीं करते. आगे चलकर उन्होंने खुद को ही गलत साबित किया और पुनर्जन्म की कहानी पर फिल्म बनाई और वो भी ब्लॉकबस्टर साबित हुई. यह फिल्म थी ‘ओम शांति ओम’जिसका डायरेक्शन कोरियोग्राफर फराह खान ने किया था. शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण लीड रोल में थे. दीपिका पादुकोण की यह डेब्यू फिल्म थी. स्क्रीनप्ले फराह खान-मुश्ताक शेख ने लिखा था. डायलॉग मयूर पुरी ने लिखे थे. रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के बैनर तले गौरी खान ने इसे प्रोड्यूस किया था. अर्जुन रामपाल निगेटिव रोल में थे. अर्जुन रामपाल की कास्टिंग शूटिंग शुरू होने के चार दिन पहले शाहरुख खान के बाथरूम में हुई थी. ‘मैं हूं ना’ के बाद शाहरुख खान के साथ फराह की यह दूसरी फिल्म थी.

‘ओम शांति ओम’ का म्यूजिक विशाल-शेखर ने कंपोज किए थे. गीतकार जावेद अख्तर थे. म्यूजिक सुपरहिट था. ‘दीवानगी दीवानगी दीवानगी है..’ में 31 एक्टर-एक्ट्रेस नजर आए थे. ओम शांति ओम एक मसाला फिल्म थी जिसमें कॉमेडी, सस्पेंस, ड्रामा सब कुछ था. फिल्म में 70 के दशक को दिखाया गया. फिल्म का फर्स्ट हॉफ 70-80 के दशक की आइकॉनिक फिल्मों से मिलता-जुलता था. बजट करीब 40 करोड़ था. फिल्म ने वर्ल्डवाइड 149 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.

