Last Updated:
साल 1981 की वह कालजयी फिल्म ‘एक दूजे के लिए’. इसने करोड़ों दिलों को तोड़ा, प्यार के नए आयाम गढ़े और एक ऐसा कल्चरल फेनोमेनन बन गई, जिसकी चर्चा आज भी होती है. हिंदी सिनेमा में अपनी पहली ही फिल्म से धूम मचाने वाली रति अग्निहोत्री ने हाल ही में इस फिल्म की शूटिंग से जुड़े अनसुने किस्से सुनाए, जिन्हें जानकर आप यकीनन हैरान रह जाएंगे.

नई दिल्ली. भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सदाबहार और दर्दनाक प्रेम कहानियों का जिक्र होता है, तो साल 1981 में आई निर्देशक के. बालाचंदर की फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ का नाम सबसे ऊपर आता है. इस फिल्म ने साउथ के सुपरस्टार कमल हासन और महज 16 साल की रति अग्निहोत्री को हिंदी सिनेमा के पटल पर हमेशा के लिए अमर कर दिया. हाल ही में ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ को दिए एक इंटरव्यू में दिग्गज अभिनेत्री रति अग्निहोत्री ने इस फिल्म की शूटिंग से जुड़े कई हैरान करने वाले और बेहद कठिन अनुभवों को साझा किया है. रति ने बताया कि स्क्रीन पर दिखने वाली यह खूबसूरत प्रेम कहानी असल जिंदगी में कलाकारों और तकनीशियनों के लिए शारीरिक रूप से कितनी थका देने वाली और दर्दनाक थी.

रति अग्निहोत्री ने बताया कि फिल्म से जुड़ी उनकी सबसे पहली याद विशाखापत्तनम के आउटडोर शेड्यूल की है. सिनेमाई पर्दे पर जो लोकेशंस बेहद खूबसूरत और जादुई नजर आ रही थीं, हकीकत में वहां काम करना किसी बुरे सपने जैसा था. फिल्म की आईएमबीडी रेटिंग 7.5 है.

रति ने उस दौर को याद करते हुए कहा, ‘विशाखापत्तनम में उस वक्त भीषण गर्मी पड़ रही थी. हम जिन लोकेशंस पर शूट कर रहे थे, वे काफी पथरीली थीं. वहां किसी भी तरह के जूते, सैंडल या चप्पल पहनना बिल्कुल मुमकिन नहीं था. हमें नंगे पैर ही उन तपते पत्थरों और रेत पर चलना पड़ा, जिसकी वजह से हमारे पैरों में बड़े-बड़े छाले पड़ गए थे. यह शूट एक्टर्स और तकनीशियनों, दोनों के लिए शारीरिक रूप से बेहद थका देने वाला था.’
Add News18 as
Preferred Source on Google

इंटरव्यू में रति ने एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि भले ही आज इस फिल्म को एक कल्ट क्लासिक माना जाता है, लेकिन जब यह बनकर तैयार हुई थी तो इसकी किस्मत अधर में थी. फिल्म की शूटिंग महज कुछ महीनों में पूरी कर ली गई थी, लेकिन उस दौर में कोई भी डिस्ट्रीब्यूटर या खरीदार इस फिल्म को खरीदने के लिए तैयार नहीं था. हालांकि, बाद में जब यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई तो इसने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ ब्लॉकबस्टर साबित हुई.

फिल्म के कुछ बेहद आइकॉनिक और अजीबोगरीब सीन्स के बारे में बात करते हुए रति ने बताया कि उस समय वे इतनी कम उम्र की थीं कि उन्हें भावनाओं की गहरी समझ नहीं थी. वे पूरी तरह से अपने निर्देशक के बालाचंदर के निर्देशों पर निर्भर थीं. उस समय तमिल भाषा पर रति की पकड़ मजबूत नहीं थी, फिर भी बालाचंदर ने उन्हें बेहतरीन तरीके से गाइड किया. रति ने शेयर किया कि वे मुझे कुछ सीनों में डिफायंट (विद्रोही) होने को कहते थे, लेकिन मुझे डेफिएंस का मतलब भी नहीं पता था तो उन्होंने कहा- ‘गुस्सा करो.’ उन्होंने कहा कि मैंने बस डायरेक्टर के निर्देशों का पालन किया और इसलिए मैं इसे डिलीवर कर पाई.

उन्होंने दो खास सीन को याद करते हुए उन्होंने ‘पेट पर लट्टू घुमाना’ और ‘तस्वीर की राख चाय में पीने’ वाले सीन को उन्होंने याद किया. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता था कि इन सीन्स को करने का कोई दूसरा तरीका भी हो सकता है. बालाचंदर सर ने मुझे कोई दूसरा ऑप्शन ही नहीं दिया था. उन्होंने जैसा कहा, मैंने बस एक स्पंज की तरह उसे सोख लिया और कैमरे के सामने कर दिया.’

रति ने स्वीकार किया कि जब उन्होंने फिल्म की शूटिंग शुरू की तो वे कमल हासन के स्टारडम और उनकी अभिनय क्षमता को देखकर काफी डरी और सहमी हुई थीं. लेकिन कमल हासन ने उन्हें सेट पर बेहद सहज महसूस कराया. फिल्म के सुपरहिट गाने ‘मेरे जीवन साथी’ का जिक्र करते हुए रति ने बताया कि चेन्नई के ‘ताज होटल’ की एक बेहद छोटी सी लिफ्ट के अंदर इस पूरे गाने को महज 8 घंटे के भीतर शूट करना था. जगह इतनी कम थी कि डांस करते और कूदते समय दोनों कलाकारों को लगातार कैमरा एंगल्स का ध्यान रखना पड़ता था ताकि उनका कोई बॉडी पार्ट फ्रेम से बाहर न कट जाए.

फिल्म की सफलता को याद करते हुए रति भावुक भी नजर आईं. उन्होंने कहा, ‘आज भी लोग एक दूजे के लिए और मेरे किरदार सपना को याद करते हैं. हर फिल्म आपको कुछ न कुछ देती है, लेकिन एक दूजे के लिए ने मुझे सब कुछ दिया.’

