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बॉलीवुड के सुनहरे दौर की इस फिल्म को लगभग 58 साल बीत चुके हैं, जिसने न केवल बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया बल्कि अपने गानों की बदौलत लोगों के दिलों में आज भी जगह बनाए हुए है. हम बात कर रहे हैं साल 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ की. फिल्म की कहानी के साथ गानों ने भी जबरदस्त धमाल मचाया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म के एक गाने ने शम्मी कपूर को भावुक कर दिया था. उन्होंने तो मेकर्स से गाना बदलने की गुजारिश भी कर डाली थी. क्या है ये किस्सा चलिए बताते हैं…

नई दिल्ली. 1968 में रिलीज हुई ‘ब्रह्मचारी’ हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में गिनी जाती है, जिसने मनोरंजन, संगीत और भावनाओं का ऐसा संगम पेश किया कि आज भी इसका जादू बरकरार है. शम्मी कपूर और राजश्री स्टारर इस फिल्म को भप्पी सोनी ने डायरेक्ट किया था, जबकि इसके निर्माता जी.पी. सिप्पी थे. करीब 2 घंटे 37 मिनट लंबी इस फिल्म ने उस दौर में बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की थी.

फिल्म की कहानी एक अनाथ युवक ब्रह्मचारी (शम्मी कपूर) की है, जो 12 अनाथ बच्चों के साथ एक गिरवी रखे हुए घर में रहता है. वह एक महिला की जान बचाता है और उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है. फिल्म में सामाजिक संदेश, रोमांस, कॉमेडी और भावुकता का सुंदर मिश्रण है. शम्मी कपूर की एनर्जी, प्राण की खलनायक भूमिका, राजश्री की मासूमियत, मुमताज की अदाकारी और जगदीप-धूमल की कॉमेडी टाइमिंग ने फिल्म को यादगार बना दिया.

1968 के हिसाब से ब्रह्मचारी एक बड़ा बजट वाली फिल्म थी. इसका अनुमानित बजट करीब 60 लाख रुपये था. फिल्म ने विश्व स्तर पर 2.50 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की और सुपर हिट का दर्जा हासिल किया. उस दौर में यह फिल्म व्यावसायिक रूप से बेहद सफल रही और फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार समेत कई अवॉर्ड्स जीते.
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‘ब्रह्मचारी’ की सबसे बड़ी ताकत इसके गाने थे. फिल्म का संगीत शंकर-जयकिशन की अमर जोड़ी ने तैयार किया था, जबकि गीत हसरत जयपुरी और नीरज जैसे नामचीन शायरों ने लिखे थे. ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर’, ‘चक्के पे चक्का, चक्के पे गाड़ी’, ‘मैं गाऊं तुम सो जाओ’ , ‘मोहब्बत के खुदा’, ‘तू बेमिसाल है’ जैसे गानों ने तब पूरे देश में धूम मचा दी थी. खासकर ‘दिल के झरोखे में’ आज भी शम्मी कपूर और रफी साहब की जोड़ी का प्रतीक माना जाता है.

ब्रह्मचारी शम्मी कपूर के करियर की उन फिल्मों में शुमार है जिन्होंने उन्हें ‘यूनिवर्सल हीरो’ का दर्जा दिलाया. फिल्म ने उस दौर के समाज में अनाथ बच्चों, परिवार और प्रेम के मुद्दों को भी छुआ. भप्पी सोनी का निर्देशन, सचिन भावमिक की पटकथा और शंकर-जयकिशन का जादुई संगीत फिल्म को टाइमलेस क्लासिक बनाते हैं. लेकिन, जब फिल्म का गाना का हिट गाना ‘दिल के झरोखे में’ शम्मी कपूर ने सुना तो वह उदास हो गए. उन्होंने इसे फिल्माने से मना कर दिया था.

इस फिल्म से जुड़ा एक किस्सा गीतकार और कवि मनोज मुंतशिर ने इंडियन आइडल में सुनाया. उन्होंने बताया, ‘जब यह गाना शम्मी जी को सुनाया गया, तो उन्होंने इसे फिल्माने से मना कर दिया था. ‘ब्रह्मचारी’ फिल्म के निर्माता रमेश सिप्पी थे और सेट पर यह खबर फैलते ही हड़कंप मच गया. सभी को लगा कि शायद शम्मी जी को गाना पसंद नहीं आया.’ लेकिन असली वजह तो कुछ और ही थी.

उन्होंने कहा, ‘असल में बात कुछ और थी. शम्मी जी ने कहा था कि फिल्म के उस सीन में उन्हें रोना नहीं था, लेकिन शंकर-जयकिशन ने इतना भावुक गाना बना दिया था कि उन्हें डर था कि शूटिंग के दौरान वे अपने आंसू नहीं रोक पाएंगे. उन्होंने कहा था, ‘मैं खुद को जानता हूं… कृपया यह गाना बदल दीजिए.’ शम्मी कपूर ने खुद एक इंटरव्यू में कहा था कि इस गाने की शूटिंग करते समय अपने आंसू रोकना उनके लिए बेहद मुश्किल था. उस भावना को सिर्फ उनका दिल ही समझ सकता था.

उस दौर के कलाकार अपने किरदारों और संगीत से कितनी गहराई से जुड़ते थे. ‘दिल के झरोखे में’ सिर्फ एक गाना नहीं रहा, बल्कि यह हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक और अमर गीतों में शामिल हो गया. मोहम्मद रफी की आवाज और शम्मी कपूर की स्क्रीन प्रेजेंस ने इसे हमेशा के लिए यादगार बना दिया. आज ब्रह्मचारी सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक युग का प्रतिनिधित्व करती है, जहां कहानी, संगीत और अदाकारी का अनुपम संगम दर्शकों को आज भी बांधे रखता है.

