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वो दौर अलग था… जब प्यार के लिए अल्फाज नहीं, भावनाओं की नदी बहती थी. जब आशिक लफ्ज नहीं, संगीत के सहारे अपनी बेबसी बयां करते थे. अगर 80 के दशक के उन अमर प्रेम गीतों की बात करें तो ‘देखा एक ख्वाब’ के प्यार भरे सपने हों या ‘आप जैसा कोई’ की चमचमाती डिस्को धुन, हर गीत की अपनी कहानी थी. पर इन सबके बीच एक ऐसा गीत भी था जो न सिर्फ एक, बल्कि दो अलग आवाजों में आशिकों की जुबां बना.

नई दिल्ली. ‘पल पल दिल के पास’, ‘चिंगारी कोई भड़के’, ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं’ और ‘हमें तुमसे प्यार कितना’… हिंदी सिनेमा के ये वो गाने हैं, जो सिर्फ धुन नहीं, बल्कि मोहब्बत की जुबान बन चुके हैं. 70 और 80 के दशक में जब प्यार का इजहार चिट्ठियों, नजरों और गीतों से होता था. तब एक गाना ऐसा आया जिसने प्रेम की गहराई को शब्दों और सुरों में हमेशा के लिए कैद कर दिया. जिस गाने की हम बात कर रहे हैं. वो 45 साल बाद भी हिट हैं और आज के आशिकों की पहली पसंद बना हुआ है. खास बात ये है कि इस गाने के दो अलग-अलग वर्जन थे और दोनों ने इतिहास रच दिया.

आज बात कर रहे हैं कि साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘कुदरत’ के सदाबहार रोमांटिक गीत ‘हमें तुमसे प्यार कितना’ की. जो 45 साल बाद आज भी आशिकों की पहली पसंद बना हुआ है. खास बात ये है कि इस गाने के दो अलग-अलग वर्जन थे और दोनों ने इतिहास रच दिया. एक तरफ किशोर कुमार की दर्द भरी आवाज थी, तो दूसरी तरफ शास्त्रीय गायिका परवीन सुल्ताना की सुरों से सजी प्रस्तुति ने लोगों के मन को मोह लिया था.

फिल्म ‘कुदरत’ का निर्देशन चेतन आनंद ने किया था. फिल्म में राजेश खन्ना, हेमा मालिनी, राज कुमार और विनोद खन्ना जैसे बड़े सितारे नजर आए थे. यह फिल्म सिर्फ एक रोमांटिक कहानी नहीं थी, बल्कि पुनर्जन्म और अधूरी मोहब्बत के रहस्य से जुड़ी एक भावनात्मक कहानी थी. उस दौर में ऐसी कहानियां दर्शकों को काफी आकर्षित करती थीं और ‘कुदरत’ भी इसी वजह से चर्चा में रही.
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फिल्म की कहानी प्यार, बिछड़न और पिछले जन्म के रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है. राजेश खन्ना और हेमा मालिनी की जोड़ी ने स्क्रीन पर भावनात्मक गहराई पैदा की. वहीं, राज कुमार का दमदार अभिनय फिल्म की बड़ी ताकत बना. लेकिन इन सबके बीच जिस चीज ने दर्शकों के दिल पर सबसे ज्यादा असर छोड़ा, वह था इसका संगीत.

‘हमें तुमसे प्यार कितना’ को मशहूर संगीतकार आरडी बर्मन ने कंपोज किया था, जबकि इसके बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. गाने का मेल वर्जन किशोर कुमार ने गाया और फीमेल वर्जन परवीन सुल्ताना की आवाज में रिकॉर्ड हुआ. दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही वर्जन को फिल्मफेयर अवॉर्ड में नॉमिनेशन मिला था. किशोर कुमार को बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर और परवीन सुल्ताना को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर के लिए नामांकन मिला. परवीन सुल्ताना ने इस गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम भी किया था.

गाने की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि दोनों वर्जन का एहसास अलग है. किशोर कुमार की आवाज में जहां दर्द, तड़प और अधूरी मोहब्बत महसूस होती है, वहीं परवीन सुल्ताना ने इसे शास्त्रीय संगीत की ऊंचाई तक पहुंचा दिया. यही वजह है कि यह गीत सिर्फ फिल्मी गाना नहीं रहा, बल्कि संगीत प्रेमियों के लिए एक क्लासिक बन गया. फिल्म के दूसरे गानों ने भी दर्शकों का खूब दिल जीता. ‘तूने ओ रंगीले’, ‘साजन की हो गई गोरी’ और ‘छूकर मेरे मन को’ जैसे गीतों ने फिल्म के संगीत को और मजबूत बनाया. आरडी बर्मन का संगीत उस दौर में युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय था और ‘कुदरत’ का एल्बम भी सुपरहिट साबित हुआ.

\अगर बॉक्स ऑफिस की बात करें तो ‘कुदरत’ ने रिलीज के समय अच्छा प्रदर्शन किया था. फिल्म को इसकी कहानी, अभिनय और संगीत के लिए सराहा गया. हालांकि उस दौर में कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही थीं, लेकिन ‘कुदरत’ ने अपनी अलग पहचान बनाई. समय के साथ यह फिल्म टीवी और संगीत कार्यक्रमों के जरिए नई पीढ़ी तक भी पहुंचती रही.

45 साल बाद भी ‘हमें तुमसे प्यार कितना’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एहसास बन चुका है. यह गाना उस दौर की याद दिलाता है जब प्यार को शब्दों से ज्यादा सुरों में महसूस किया जाता था. यह गाना प्यार की उस हद को बयां करता है जहां प्यार का अंदाजा तो नहीं, लेकिन जीना भी नामुमकिन है. किशोर कुमार और परवीन सुल्ताना की आवाज ने इसे अमर बना दिया और शायद यही वजह है कि आज भी आशिक अपनी मोहब्बत बयां करने के लिए इसी गीत का सहारा लेते हैं.

