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सोनाक्षी सिन्हा का मानना है कि फिल्मों का काम केवल समाज को संदेश देना नहीं, बल्कि दर्शकों का मनोरंजन करना भी है. अपनी अपकमिंग फिल्म ‘सिस्टम’ के प्रमोशन के दौरान उन्होंने कहा कि सही और गलत की शिक्षा माता-पिता और स्कूल से मिलनी चाहिए, न कि फिल्मों से. सोनाक्षी के अनुसार, दर्शक इतने समझदार होते हैं कि वे पर्दे पर दिखाई गई कहानी और वास्तविक जीवन के बीच फर्क कर सकें.
सोनाक्षी सिन्हा सिस्टम में नजर आने वाली हैं.
नई दिल्ली. सोनाक्षी सिन्हा इन दिनों अपनी आगामी कोर्टरूम ड्रामा सिस्टम के प्रमोशन में व्यस्त हैं. फिल्म की रिलीज से पहले अभिनेत्री ने सिनेमा की भूमिका को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है. उनका मानना है कि फिल्मों से हर बार समाज सुधार की उम्मीद करना सही नहीं है, क्योंकि सिनेमा का सबसे बड़ा उद्देश्य दर्शकों का मनोरंजन करना भी होता है. आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में सोनाक्षी ने कहा कि वह इस सोच से सहमत नहीं हैं कि हर फिल्म को सामाजिक संदेश देना ही चाहिए.
उनके मुताबिक, सही और गलत का ज्ञान बच्चों को परिवार और स्कूल से मिलता है, न कि फिल्मों से. अभिनेत्री ने कहा, ‘फिल्में मनोरंजन का माध्यम हैं. यह जरूरी नहीं कि हर कहानी समाज को बदलने के लिए बनाई जाए. नैतिक शिक्षा देना हमारे माता-पिता और शिक्षकों की जिम्मेदारी है, फिल्मकारों की नहीं’.
‘सिस्टम’ में दिखेंगी सोनाक्षी सिन्हा
सोनाक्षी ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक दिन फिल्म में वकील की कहानी दिखाई जा सकती है और दूसरे दिन किसी सीरियल किलर की. इसका मतलब यह नहीं कि दर्शक पर्दे पर दिखाए गए हर व्यवहार की नकल करने लगेंगे. उनका मानना है कि दर्शक पर्याप्त समझ रखते हैं और वे कल्पना तथा वास्तविकता के बीच फर्क करना जानते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि फिल्मों के लिए अलग-अलग आयु वर्ग के अनुसार रेटिंग सिस्टम मौजूद है. ऐसे में दर्शकों को अपनी समझ से यह तय करना चाहिए कि उन्हें क्या देखना है और किस नजरिए से देखना है. सोनाक्षी के अनुसार, कई बार किसी फिल्म को लेकर अनावश्यक विवाद खड़े कर दिए जाते हैं. उन्होंने कहा कि आखिरकार फिल्म एक कहानी होती है, जिसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए. अगर कोई फिल्म सोचने पर मजबूर करती है, तो यह उसकी अतिरिक्त उपलब्धि है, लेकिन हर फिल्म पर सामाजिक जिम्मेदारी का बोझ डालना उचित नहीं है.
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कला समाज का आईना होती है. कई फिल्में वास्तविक घटनाओं या सामाजिक परिस्थितियों से प्रेरित होती हैं. इसलिए यदि कोई फिल्म दर्शकों के भीतर चर्चा या विचार पैदा करे, तो यह सकारात्मक बात है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर फिल्म का उद्देश्य समाज को दिशा देना ही हो.
इस दिन रिलीज होगी ‘सिस्टम’
वर्क फ्रंट की बात करें तो सिस्टम एक कोर्टरूम थ्रिलर है, जिसमें सोनाक्षी एक सरकारी वकील की भूमिका निभा रही हैं. फिल्म में उनके साथ ज्योतिका भी अहम भूमिका में नजर आएंगी. इसका निर्देशन अश्विनी अय्यर तिवारी ने किया है. यह फिल्म 22 मई को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी. दर्शकों को इससे एक दमदार कहानी और प्रभावशाली अभिनय की उम्मीद है. सोनाक्षी की यह टिप्पणी भी सिनेमा और समाज के रिश्ते पर एक नई बहस छेड़ सकती है.
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From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें

