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मनोज बाजपेयी का बड़ा खुलासा, बजट की भारी किल्लत और मुश्किल हालातों के बीच कैसे बनीं ‘भोंसले’ और ‘जोरम’?

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मनोज बाजपेयी ने अपनी सबसे चर्चित फिल्मों ‘भोंसले’, ‘तांडव’ और ‘जोरम’ के पीछे छिपे आर्थिक संकट और कड़े संघर्ष पर से पर्दा उठाया है. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे कम बजट और मुश्किल हालातों ने इन फिल्मों को बेहतरीन बनाया और क्यों ‘जोरम’ ने एक एक्टर के तौर पर उनकी सबसे कड़ी परीक्षा ली. पूरा किस्सा जानने के लिए पढ़ें.

मनोज बाजपेयी का खुलासा, बजट की भारी किल्लत के बीच कैसे बनी भोंसले’ और ‘जोरम’?Zoom

मनोज बाजपेयी

नई दिल्ली: मनोज बाजपेयी इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘गवर्नर’ को लेकर काफी चर्चा में हैं. फिल्म के प्रमोशन के दौरान जब भी वह मीडिया से मुखातिब होते हैं, तो उनके अभिनय के सफर की कई अनसुनी कहानियां सामने आती हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी कुछ सबसे यादगार और शानदार फिल्मों जैसे ‘भोंसले’, ‘तांडव’ और ‘जोरम’ के बनने के पीछे के संघर्ष और बेहद दिलचस्प किस्सों को याद किया है.

मनोज बाजपेयी ने खुलकर बात की कि कैसे पैसों की तंगी, कई मुश्किल हालातों और आर्थिक चुनौतियों ने इन फिल्मों को सिर्फ बनाया ही नहीं, बल्कि उन्हें एक बेहतरीन आकार देने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई. इसके साथ ही उन्होंने इन तीनों फिल्मों के बीच के एक बहुत ही गहरे और खास कनेक्शन का भी खुलासा किया है.

सिर्फ 30-35 लाख रुपये में बनाई थी ‘तांडव’

आईएएनएस से बातचीत में मनोज बाजपेयी ने इस पूरे सफर की शुरुआत के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि फिल्म मेकर देवाशीष मखीजा उस समय सिनेमा की दुनिया में बिल्कुल नए थे. उनके साथ मनोज बाजपेयी ने सबसे पहले ‘तांडव’ नाम की एक शॉर्ट फिल्म पर काम किया था. मनोज बाजपेयी ने उन दिनों को याद करते हुए बताया कि देवाशीष के पास उस वक्त काम करने के लिए संसाधन बहुत ही कम थे और बजट की भी भारी कमी थी. उन्होंने यह फिल्म महज 30 से 35 लाख रुपए के बेहद छोटे बजट में बनाकर तैयार की थी. लेकिन जब यह फिल्म रिलीज हुई, तो इसने यूट्यूब पर सफलता के झंडे गाड़ दिए और इसे कई इंटरनेशनल अवॉर्ड्स से भी नवाजा गया.

जब मनोज बाजपेयी खुद जुटाने लगे थे फंड

‘तांडव’ को मिली इस जबरदस्त कामयाबी के बाद इन दोनों ने मिलकर ‘भोंसले’ फिल्म बनाने का फैसला किया. हालांकि, इस फिल्म को बनाने की राह इतनी आसान नहीं थी. मनोज बाजपेयी ने बताया कि इस फिल्म के लिए पैसा यानी फंड जुटाने में उन्होंने खुद बहुत बड़ी जिम्मेदारी उठाई थी. वह काफी समय तक लगातार फिल्म के लिए पैसों का इंतजाम करने में जुटे रहे और उनकी कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार ‘भोंसले’ बनकर तैयार हो पाई. मनोज बाजपेयी की यह मेहनत रंग भी लाई, क्योंकि इसी फिल्म में उनकी बेहतरीन अदाकारी के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर के सम्मान से नवाजा गया था.

‘जोरम’ की शूटिंग के दौरान भावुक हो गए थे एक्टर

सफर यहीं नहीं रुका, बल्कि ‘भोंसले’ की शूटिंग के दौरान ही डायरेक्टर देवाशीष मखीजा ने मनोज बाजपेयी को अपनी अगली फिल्म ‘जोरम’ की कहानी सुना दी थी. बाद में इस फिल्म को जी स्टूडियोज ने प्रोड्यूस किया और यह सिनेमाघरों तक पहुंची. मनोज बाजपेयी ‘जोरम’ को अपने पूरे करियर की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंसेस में से एक मानते हैं. इस फिल्म के अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि इस फिल्म ने एक एक्टर के तौर पर उनकी बहुत कड़ी परीक्षा ली थी. इसकी शूटिंग मानसिक और शारीरिक रूप से इतनी गहरी और भावुक थी कि एक वक्त पर वह खुद पूरी तरह लड़खड़ा गए थे, लेकिन आज उन्हें अपनी इस परफॉर्मेंस पर बहुत ज्यादा गर्व महसूस होता है.

संघर्ष से सफलता तक का सफर

मनोज बाजपेयी ने अपनी बात को खत्म करते हुए इस बात पर खास जोर दिया कि अगर आपके पास अटूट विश्वास और संघर्ष करने का जज्बा हो, तो एक छोटी सी शुरुआत भी बहुत बड़ी उपलब्धियों की नींव रख सकती है. ‘तांडव’ जैसी एक शॉर्ट फिल्म से शुरू हुई यह खूबसूरत यात्रा ‘भोंसले’ और ‘जोरम’ जैसी शानदार फिल्मों तक जा पहुंची, जहां हर एक फिल्म ने उन्हें नई चुनौतियां दीं और उन्हें समय के साथ एक और भी बेहतर अभिनेता बनाया.

आपको बता दें कि मनोज बाजपेयी इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘गवर्नर’ के प्रमोशन में काफी बिजी हैं, जिसमें वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई के गवर्नर का मुख्य किरदार निभा रहे हैं. विपुल अमृतलाल शाह द्वारा प्रोड्यूस की गई यह फिल्म 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसका डायरेक्शन चिन्मय मांडलेकर ने किया है.

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गार्गी द्विवेदीSub Editor

मैं इस समय News18 App टीम का हिस्सा हूं. News18 App पर आप आसानी से अपनी मनपसंद खबरें पढ़ सकते हैं. मुझे खबरें लिखने का 3 साल से ज्यादा का अनुभव है और फिलहाल मैं सब एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले मैंने, दैनिक जाग…और पढ़ें

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