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आज की सुबह संगीत जगत के लिए एक दुखद खबर लेकर आई. संगीत के स्वर्णिम दौर की एक और आवाज आज खामोश हो गई. सुमन कल्याणपुर ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. लता मंगेशकर, आशा भोसले के बाद आज सुमन कल्याणपुर ने भी दुनिया से रुखसती ले ली. वो अपने पीछे 740 गानों की बेशकीमती विरासत छोड़ गई हैं. चलिए आज आपको सुमन कल्याणपुर के करियर के उस पहलु से वाकिफ कराते हैं जिसके बारे में आप शायद नहीं जानते होंगे.
सुमन कल्याणपुर का निधन हो गया.
नई दिल्ली. बॉलीवुड के स्वर्णिम युग की एक और आवाज आज खामोश हो गई. प्लेबैक सिंगर सुमन कल्याणपुर का 89 साल की उम्र में निधन हो गया. बांग्लादेश में जन्मीं सुमन हिंदी सिनेमा को वो अध्याय हैं जो स्वर्ण अक्षरों में दर्ज जरूर है लेकिन आज भी कइयों ने उसे पढ़ा नहीं है. आज भी ज्यादातर लोग उनकी आवाज पहचान नहीं पाते हैं. लता मंगेशकर और उनकी आवाज में सामानता इतनी रही कि उन्हें दूसरी लता कहा गया. सुरों की मल्लिका का सबसे बड़ा आशीर्वाद ही उनका ‘अभिशाप’ बन गया. ताउम्र वो लता मंगेशकर के साए से निकल नहीं पाईं. सुमन कल्याणपुर को ताउम्र तुलना का दंश झेलना पड़ा था. दिग्गज संगीतकारों के लिए सुमन कल्याणपुर और लता मंगेशकर की आवाज में फर्क कर पाना कभी-कभी नामुमकिन सा हो जाता था.
सुमन कल्याणपुर ने उस दौर में अपनी जगह बनाई, जब हिंदी सिनेमा में पहले से ही कई दिग्गज आवाजें मौजूद थीं. उन्होंने हिंदी सिनेमा में संगीत का सफर इस वक्त शुरू किया जब लता मंगेशकर, आशा भोसले जैसी गायिकाओं का इंडस्ट्री पर राज था. हर फिल्ममेकर और संगीतकार लता मंगेशकर के साथ काम करने की ख्वाहिश रखता था, ऐसे में उस दौर में किसी भी गायिका के लिए अपनी जगह बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था.
लता मंगेशकर से हूबहू मिलती थी आवाज
लता मंगेशकर और सुमन कल्याणपुर की आवाज में फर्क कर पाना लगभग असंभव सा है. 1960 और 1970 के दशक में लता और सुमन के बीच की तुलना चरम पर थी. जब कई बड़े संगीतकार और निर्माता लता मंगेशकर संग काम नहीं कर पाते थे, तो वो सुमन कल्याणपुर का दरवाजा खटखटाने पहुंच जाते थे. उन्हें ज्यादातर गाने तभी मिलते जब स्वरकोकिला किसी कारणवश उन्हें मना कर देती थीं.
740 गानों को दी थी आवाज
आजकल ‘तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जुबां पर’, ‘आपसे हमको बिछड़े हुए’, ‘दिल ने फिर याद किया’, ‘मेरा प्यार भी तू है’, ‘ना ना करते प्यार तुम ही से कर बैठे’, ‘ये किसने गीत छेड़ा’…ये सिर्फ चंद गीत हैं. दिवंगत गायिका ने अपने करियर में 740 गानों को आवाज दी जिनमें उन्होंने 140 गाने मोहम्मद रफी के साथ गाए थे. लता मंगेशकर की तरह ही मोहम्मद रफी के साथ सुमन कल्याणपुर की जोड़ी भी सुपरहिट थी.
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