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जब भी बॉलीवुड में डांस, लुक्स और दमदार एक्टिंग के कॉम्बिनेशन की बात होती है, तो सिर्फ एक ही नाम दिमाग में आता है… ऋतिक रोशन का. 2000 में ‘कहो ना प्यार है’ से रातोंरात नेशनल क्रश बने ऋतिक रोशन ने अपने 2 दशक से ज्यादा के करियर में कामयाबी का ऐसा ब्रांड बनाया है जिसका कोई मुकाबला नहीं है. वह सिर्फ एक एक्टर नहीं, बल्कि बॉलीवुड के पहले कामयाब ‘सुपरहीरो’ हैं, जिनके नाम हिट से ज्यादा ब्लॉकबस्टर फिल्में हैं. बॉक्स ऑफिस पर उनकी पकड़ और किरदारों में जान डालने की उनकी काबिलियत ने उन्हें ग्लोबल सुपरस्टार बना दिया है.

नई दिल्ली. इतिहास इस बात का गवाह है कि बॉलीवुड में कामयाबी पाना मुश्किल है, लेकिन उसे बनाए रखना और भी मुश्किल है. अगर ऋतिक रोशन के करियर को एक शब्द में बताना हो, तो वह होगा एक्सीलेंस. जब उन्होंने 2000 में इंडस्ट्री में कदम रखा, तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि खान तिकड़ी के दबदबे के बीच एक नया एक्टर इतना अनोखा एम्पायर बना लेगा. ऋतिक की सफलता का राज उनकी फिल्मों की संख्या में नहीं, बल्कि उनकी क्वालिटी और उनके निभाए गए किरदारों के असर में है. (तस्वीर बनाने में एआई की मदद ली गई है.)

ऋतिक रोशन की ‘कहो ना प्यार है’ से मिली सफलता आज भी एक रिकॉर्ड है. यह फिल्म किसी भी डेब्यू एक्टर के लिए सबसे ज्यादा अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म बन गई. इसने ऋतिक को रातोंरात स्टार बना दिया, थिएटर्स के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लग गईं. हालांकि उनकी शुरुआती सफलता के बाद कुछ उतार-चढ़ाव आए, लेकिन हर असफलता के बाद उनकी वापसी किसी सुपरहीरो से कम नहीं थी. उन्होंने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक चॉकलेट ब्वॉय नहीं हैं, बल्कि उनके अंदर बहुत टैलेंट है.

ऋतिक रोशन ने ‘कोई… मिल गया’ में एक मेंटली चैलेंज्ड बच्चे रोहित मेहरा का रोल करके सभी को हैरान कर दिया. यह एक ऐसा टर्निंग प्वाइंट था जहां उन्होंने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक अच्छे दिखने वाले एक्टर ही नहीं, बल्कि एक अनुभवी परफॉर्मर भी हैं. यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफल हुई बल्कि इसने ऋतिक रोशन को एक सीरियस एक्टर के तौर पर भी स्थापित किया. उन्होंने हर प्रोजेक्ट के साथ खुद को चैलेंज किया. चाहे वह ‘लक्ष्य’ में एक दिशाहीन युवा से एक अनुशासित सैनिक बनने का उनका सफर हो या ‘गुजारिश’ में एक लकवाग्रस्त जादूगर का उनका किरदार, ऋतिक रोशन ने हर बार स्क्रीन पर जादू बिखेरा.
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बॉलीवुड में सुपरहीरो फिल्में पहले भी बनाई गई थीं, लेकिन ऋतिक रोशन ने सफलता का असली स्वाद चखाया. ‘कृष’ फ्रैंचाइजी ने भारतीय बच्चों और युवाओं को एक देसी सुपरहीरो दिया. इस रोल के लिए ऋतिक ने जो शारीरिक मेहनत और लगन दिखाई, उसने भारतीय फिल्म टेक्नोलॉजी और विजुअल इफेक्ट्स (VFX) के बारे में दुनिया भर में चर्चा छेड़ दी. ‘कृष’ के बाद ऋतिक का कद इतना बढ़ गया कि उन्हें ‘बॉलीवुड का सुपरहीरो’ कहा जाने लगा.

ऋतिक की फिल्मोग्राफी पर एक नजर डालें, जिसमें ‘धूम 2’, ‘जोधा अकबर’, ‘अग्निपथ’, ‘वॉर’ और ‘सुपर 30’ जैसी फिल्में शामिल हैं, जो उनकी वर्सेटिलिटी का सबूत हैं. जहां ‘धूम 2’ में उनका स्टाइल और डांस मूव्स एक नेशनल ट्रेंड बन गए, वहीं ‘जोधा अकबर’ में उनके शाही अंदाज और शानदार परफॉर्मेंस ने सभी का दिल जीत लिया. ‘अग्निपथ’ में विजय दीनानाथ चौहान के रूप में उनके इंटेंसिटी ने दर्शकों को अट्रैक्ट किया. वहीं, ‘सुपर 30’ में उन्होंने खुद को बिहारी मैथमैटिशियन आनंद कुमार के रोल में पूरी तरह से ढाल लिया.

2019 की फिल्म ‘वॉर’ ने एक बार फिर ऋतिक को बॉक्स ऑफिस का बेताज बादशाह बना दिया. इस फिल्म ने कमाई के कई पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए और बॉलीवुड के लिए एक नया बेंचमार्क सेट किया. ऋतिक के लिए, सफलता का पैमाना सिर्फ पैसा नहीं है. वह उन कुछ एक्टर्स में से एक हैं जो साल में चार फिल्में करने के बजाय एक बार में एक प्रोजेक्ट पर फोकस करते हैं. वह अपनी हर फिल्म के लिए महीनों तैयारी करते हैं, चाहे वह ‘फाइटर’ के लिए प्लेन उड़ाने की ट्रेनिंग हो या ‘विक्रम वेधा’ के लिए एक खतरनाक गैंगस्टर के तौर-तरीके सीखना हो.

इसलिए दर्शक उनकी फिल्मों का बेसब्री से इंतजार करते हैं. वह हिट से ज्यादा ब्लॉकबस्टर हैं और आज भी उनकी हर फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक केस स्टडी का काम करती है. ऋतिक रोशन सिर्फ एक नाम नहीं हैं, बल्कि सिनेमाई परफेक्शन का एक ऐसा ब्रांड हैं जिसे आने वाली पीढ़ियां हमेशा एक इंस्पिरेशन के तौर पर देखेंगी.

