रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था. फिल्म और इसके सीक्वल ‘धुरंधर: रिवेंज’ ने मिलकर दुनियाभर में 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की और इस फ्रेंचाइज़ी को भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी कमर्शियल सफलताओं में शामिल कर दिया. को-प्रोड्यूसर ज्योति देशपांडे ने बताया कि बढ़ते प्रोडक्शन खर्च को देखते हुए मेकर्स ने रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर के साथ मिलकर एक रिस्क-शेयरिंग मॉडल अपनाया. साथ ही, जो फिल्म पहले एक ही पार्ट में बनने वाली थी, उसे बाद में दो पार्ट्स में बांटने का फैसला लिया गया.
रणवीर सिंह ने ‘धुरंधर’ में ली कम फीस
हाल ही में ET Digital के साथ बातचीत में ज्योति देशपांडे ने बताया कि रणवीर सिंह और आदित्य धर दोनों ने फिल्म के लिए कम अपफ्रंट फीस लेने का फैसला किया और इसके बजाय बैकएंड डील के जरिए प्रॉफिट में हिस्सेदारी चुनी. उन्होंने कहा, ”धुरंधर’ में रणवीर कम फिक्स्ड फीस और बैकएंड डील के साथ आए थे, जिससे उन्हें उस एग्रीमेंट का फायदा मिला. आदित्य ने भी कम फिक्स्ड फीस और बैकएंड चुना. उन्हें हमारे साथ मिलकर अच्छा खासा मुनाफा मिला. इसी तरह आप रिस्क और रिवॉर्ड दोनों को बांटते हैं.’
उन्होंने कहा, ‘धुरंधर के लिए हमने पूरी तरह से दांव लगाया. फिल्म बनाने में खर्च लगभग उस रकम का दोगुना हो गया, जितना हमने शुरू में सोचा था. लेकिन बाद में यह दो पार्ट्स में बदल गई. आखिर में हम सभी को इसका अच्छा फायदा मिला.’

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उन्होंने कहा, ‘धुरंधर एक ही कहानी के रूप में लिखी गई थी. इसे एक फिल्म के तौर पर ही सोचा और बजट किया गया था. लेकिन जब हमने पहला शूटिंग शेड्यूल पूरा किया, तो हमें एहसास हुआ कि बजट पहले से तय अनुमान से काफी ज्यादा बढ़ चुका है.’ उन्होंने कहा, ‘पहले शेड्यूल से जो फुटेज आया वह बहुत शानदार था. कहानी को देखकर हमें लगा कि इसमें इतना दम है कि इसे दो पार्ट की फिल्म बनाया जा सकता है.’
उन्होंने कहा, ‘ये शुरुआत में पूरी तरह पाकिस्तान पर बेस्ड थी. हम ‘डीप स्टेट’ की बात कर रहे थे, जो एक ऐसा कॉन्सेप्ट है जो सालों से मौजूद रहा है.’ उन्होंने यह भी कहा कि एक जिओपॉलिटिकल थॉट को आम दर्शकों तक समझाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी, और यही बात उन्हें इस प्रोजेक्ट की ओर खींच ले गई.

ज्योति देशपांडे ने कि फिल्म की तारीफ
की अनोखी नैरेटिव स्ट्रक्चर की भी तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘इसका चैप्टराइज्ड फॉर्मेट मुझे बहुत पसंद आया. मैं इस तरह की स्टोरीटेलिंग की फैन हूं, और वेस्टर्न फिल्मों में इसे बहुत अच्छे से किया गया है. आज के समय में लोग ओटीटी पर ऐसा कंटेंट देखने के आदी हो चुके हैं, जो एपिसोडिक और इमर्सिव होता है. इससे दर्शक उस दुनिया और किरदारों के साथ ज्यादा समय बिता पाते हैं. इसलिए मुझे ऐसा आइडिया पसंद आया जिसमें फिल्म सिर्फ शुरुआत, बीच और आखिरी नहीं हो, बल्कि दर्शकों को पूरी तरह उस दुनिया में डुबो दे.’
उन्होंने कहा कि मेकर्स को भरोसा था कि ‘धुरंधर’ एक लंबी चलने वाली फ्रेंचाइज़ी बन सकती है. ‘हमें लगा कि अगर हम इसे सही तरीके से बना पाए, तो यह ऐसी फ्रेंचाइज़ी बन सकती है जो सालों तक दर्शकों को अट्रैक्ट करती रहे. जैसे ‘जेम्स बॉन्ड’ या ‘मिशन: इम्पॉसिबल’ ये ऐसी फ्रेंचाइज़ी हैं.

