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फिल्म जगत का इतिहास ऐसी कई दास्तानों का गवाह रहा है, जहां सितारों ने बुलंदी से जमीन पर गिरने और फिर वापस शिखर तक पहुंचने का सफर तय किया है. एक ऐसी ही कहानी उस पिता की है, जिसके अपने बेटे के प्रति अटूट विश्वास ने न केवल एक डूबते हुए करियर को सहारा दिया, बल्कि सिनेमा की दुनिया में एक नया चैप्टर भी लिख दिया. यह कहानी एक ऐसे मशहूर फिल्ममेकर और उनके बेटे की है, जिसने अपनी पहली ही फिल्म से रातों-रात शोहरत हासिल की थी, लेकिन बाद में उसकी लगातार कई फिल्में नाकाम रहीं और करियर ढलान पर आ गया था. फिर पिता ने अपने बेटे की तकदीर बदल दी.

नई दिल्ली. इंडस्ट्री के एक नामी फिल्मकार के बेटे ने अपनी पहली ही फिल्म से रातों-रात शोहरत का स्वाद चखा. लेकिन किस्मत ने ऐसी करवट ली कि अगली कुछ फिल्मों की विफलता ने उनके करियर पर सवालिया निशान लगा दिए. ऐसे में पिता अपनी औलाद के बिखरते करियर को देख न सके. फिर उन्होंने एक ऐसी अनोखी कहानी पर फिल्म बनाने का जोखिम उठाया, जिसके बारे में पहले कभी सोचा भी नहीं गया था.

कमाल की बात है कि यह फिल्म न केवल बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई, बल्कि इसने स्टारकिड के करियर को ऐसा संवारा कि वह आज बॉलीवुड का सुपरस्टार बन चुका है. हम जिनकी बात कर रहे हैं वो कोई और नहीं बल्कि ऋतिक रोशन हैं, जिन्हें ग्रीक गॉड कहा जाता है. उनकी एक्टिंग के लोग कायल हैं और अब तक कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दे चुके हैं.

ऋतिक रोशन ने साल 2000 में फिल्म कहो ना प्यार है’ से एक धमाकेदार शुरुआत की. लुक्स, डांसिंग स्किल्स और एक्टिंग ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया. लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बाद उनके करियर डूबने की कगार पर पहुंच गया. ‘कहो ना प्यार है’ के बाद ऋतिक की लगातार कई फिल्में ‘फिजा’, ‘मिशन कश्मीर’, ‘यादें’, ‘आप मुझे अच्छे लगने लगे’, ‘ना तुम जानो ना हम’ और ‘मुझसे दोस्ती करोगे’ बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं दिखा पाईं. सिर्फ ‘कभी खुशी कभी गम’ सुपरहिट रही लेकिन यह मल्टीस्टारर फिल्म थी. फिर ऐसा लगने लगा था कि ऋतिक का करियर खत्म होने की कगार पर है.
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इस कठिन समय में ऋतिक के पिता राकेश रोशन उनके सबसे बड़े सहारा बने. उन्होंने देखा कि ऋतिक का करियर पटरी से उतर गया है. राकेश रोशन ने एक बड़ा जोखिम लेने का फैसला किया. उन्होंने एक ऐसी कहानी पर काम करना शुरू किया, जो उस समय बॉलीवुड के लिए बिल्कुल नई थी, एक ऐसे एलियन की कहानी जो धरती पर भटक जाता है और एक मानसिक रूप से अक्षम युवक से उसकी दोस्ती हो जाती है. फिल्म का नाम है ‘कोई मिल गया’.

उस दौर में जब बॉलीवुड में रोमांटिक और एक्शन फिल्मों का बोलबाला था, तब एक साइंस-फिक्शन फिल्म बनाना एक बड़ी चुनौती थी. राकेश रोशन ने इस फिल्म में पानी की तरह पैसा बहाया, हॉलीवुड के तकनीक-विशेषज्ञों को बुलाया और बड़े पर्दे पर एक ऐसा एलियन तैयार किया, जिसे भारतीय दर्शक पहले कभी नहीं देख पाए थे.

मगर सबसे बड़ी चुनौती थी ऋतिक के लिए थी. उन्हें एक ऐसे किरदार को निभाना था जो दिखने में जवान था लेकिन मानसिक मानसिक रूप से पूरी तरह विकास नहीं हुआ था. यह एक ऐसा किरदार था जो उनके पिछले चॉकलेट बॉय वाली इमेज से बिल्कुल अलग था. ऋतिक ने इस चुनौती को स्वीकार किया और रोहित के किरदार में खुद को पूरी तरह ढाल लिया.

उनकी उनकी मेहनत रंग लाई. जब कोई मिल गया’ साल 2003 में रिलीज हुई, तो इसे दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों ने खूब सराहा. फिल्म ने ऋतिक के करियर को एक नया जीवन दिया. रोहित के किरदार के लिए उन्हें आलोचकों से तारीफ मिली और उन्होंने साबित कर दिया कि वह एक वर्सेटाइल एक्टर हैं.

‘कोई मिल गया’ न केवल बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई, बल्कि इसने कई पुरस्कार भी जीते. फिल्म ने उस साल की कई कैटेगरी में पुरस्कार हासिल किए. इसे फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर और ऋतिक रोशन के लिए बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स) और बेस्टर एक्टर का अवॉर्ड मिला. कुल मिलाकर, फिल्म ने पुरस्कार समारोहों में 42 पुरस्कार जीते, जिसमें 3 नेशनल अवॉर्ड भी शामिल थे.

बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई के साथ फिल्म सुपरहिट साबित हुई. दुनियाभर में मूवी ने 75 करोड़ रुपये का बिजनेस किया था. यह उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. ‘कोई मिल गया’ की सफलता ने राकेश रोशन और ऋतिक रोशन की जोड़ी को बॉलीवुड में सबसे सफल पिता-पुत्र की जोड़ी के रूप में स्थापित कर दिया. इसके बाद फिल्म के दो सीक्वल ‘कृष’ और ‘कृष 3’ नाम से बने और यह भारतीय सिनेमा की सबसे सफल फ्रेंचाइजी बन गई.

