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जब किसी फिल्म का बजट लगातार बढ़ रहा हो, खर्च अनुमान से दोगुना हो चुका हो और सफलता की कोई गारंटी न हो, तब ज्यादातर सितारे अपनी फीस सुरक्षित रखना पसंद करते हैं. लेकिन ‘धुरंधर’ के मामले में कहानी बिल्कुल अलग थी. रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर ने करोड़ों की तय फीस पर जोर देने के बजाय फिल्म की किस्मत पर भरोसा जताया और मुनाफे में हिस्सेदारी का रास्ता चुना. आज 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई करने वाली यह फ्रेंचाइजी इस बात की मिसाल है कि कभी-कभी सबसे बड़ा मुनाफा सबसे बड़े जोखिम के पीछे छिपा होता है.

नई दिल्ली. रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ भारतीय सिनेमा की सबसे सफल फ्रेंचाइजी में शामिल हो चुकी है. फिल्म के दोनों पार्ट्स- धुरंधर और धुरंधर: रिवेंज… ने मिलकर दुनियाभर में 3000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है. हालांकि, आज यह सफलता जितनी बड़ी दिखाई देती है, इसकी राह उतनी ही चुनौतीपूर्ण रही थी.

फिल्म की निर्माता ज्योति देशपांडे ने हाल ही में एक ईटी को दिए एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि इस प्रोजेक्ट को बनाते समय टीम को कई मुश्किल फैसले लेने पड़े. सबसे दिलचस्प बात यह रही कि फिल्म के लीड स्टार रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर ने पारंपरिक तरीके से बड़ी फीस लेने के बजाय एक अलग मॉडल अपनाया.

फिल्म की निर्माता ज्योति देशपांडे ने हाल ही में एक ईटी को दिए एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि इस प्रोजेक्ट को बनाते समय टीम को कई मुश्किल फैसले लेने पड़े. सबसे दिलचस्प बात यह रही कि फिल्म के लीड स्टार रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर ने पारंपरिक तरीके से बड़ी फीस लेने के बजाय एक अलग मॉडल अपनाया.
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ज्योति देशपांडे के मुताबिक, रणवीर सिंह ने फिल्म के लिए अपेक्षाकृत कम फिक्स फीस ली और इसके बदले फिल्म के मुनाफे में हिस्सेदारी का समझौता किया. निर्देशक आदित्य धर ने भी ये चुना. यानी दोनों ने बड़ी फीस की बजाय बैकएंड प्रॉफिट शेयरिंग डील को चुना. इस मॉडल का फायदा यह हुआ कि फिल्म की सफलता के साथ दोनों को बड़ा आर्थिक लाभ मिला. निर्माता के मुताबिक, इससे जोखिम और पुरस्कार दोनों का संतुलित वितरण हुआ और पूरी टीम का लक्ष्य एक जैसा बना रहा.

ज्योति देशपांडे ने कहा, ‘धुरंधर’ में रणवीर छोटी फिक्स्ड फीस लेकर आए और बैकएंड डील पर सहमत हुए. इसी वजह से उन्हें फिल्म की सफलता का पूरा फायदा मिला. आदित्य धर ने भी यही फॉर्मूला अपनाया. दोनों ने रिस्क लिया और अंत में अच्छा-खासा मुनाफा कमाया. यही तरीका है, जिसमें पूरी टीम का हित जुड़ता है.

प्रोड्यूसर ने स्वीकार किया कि फिल्म का बजट शुरू में जो तय किया गया था, उससे करीब दोगुना खर्च हो गया. उन्होंने कहा कि हमने पूरी ताकत झोंक दी. फिल्म शुरू में एक ही फिल्म के रूप में बजटेड थी, लेकिन अंत में लागत दोगुनी हो गई.

बीच में ही हमें एहसास हुआ कि कहानी दो फिल्मों में बंट सकती है. शूटिंग के पहले शेड्यूल के बाद जब फुटेज देखा गया तो टीम हैरान रह गई. कहानी की गति और विजुअल्स इतने शानदार थे कि टीम को लगा कि यह कहानी दो भागों में बताई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह रिस्क था, लेकिन सही साबित हुआ.

ज्योति देशपांडे ने कहा कि हम भाग्यशाली रहे कि दर्शकों को दोनों फिल्में पसंद आईं और वे ब्लॉकबस्टर साबित हुईं. उन्होंने यह भी बताया कि पूरी टीम ने इस प्रोजेक्ट को लेकर बहुत मेहनत की. बजट बढ़ने के बावजूद सभी ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और आखिर में सब ‘सभी हंसते-हंसते बैंक गए.’ यह सफलता न केवल रणवीर सिंह और आदित्य धर के लिए फायदेमंद रही, बल्कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में बैकएंड प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल की प्रभावशीलता का भी एक बड़ा उदाहरण बन गई.

