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2015 में रिलीज हुई रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘तमाशा’ वक्त के साथ युवाओं के बीच कल्ट फिल्म बन गई. इस फिल्म ने कई लोगों को अपनी पहचान और अधूरी जिंदगी पर सोचने के लिए मजबूर किया. अब निर्देशक इम्तियाज अली ने खुलासा किया है कि फिल्म देखने के बाद कई युवाओं ने इंजीनियरिंग और कॉर्पोरेट जैसी अच्छी नौकरियां छोड़कर राइटिंग और आर्ट की दुनिया चुन ली. इसे लेकर इम्तियाज ने कहा कि उन्हें ‘गिल्ट’ महसूस होता है. उनका कहना है कि अगर ये लोग सफल नहीं हुए तो उनकी नाकामी और संघर्ष के लिए वो खुद को जिम्मेदार मानेंगे. यही डर उन्हें आज भी परेशान करता है.

नई दिल्ली. ‘जब वी मेट’, ‘लव आज कल’, ‘रॉकस्टार’, ‘हाईवे’, ‘तमाशा’, ‘जब हैरी मेट सेजल’ और ‘अमर सिंह चमकीला’ जैसी फिल्मों के साथ बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपनी खास जगह बनाने वाले फिल्ममेकर इम्तियाज अली एक बार फिर सुर्खियों में हैं. जल्द उनकी नई फिल्म ‘मैं वापस आउंगा’ रिलीज होने वाली हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी 11 साल पहले रिलीज हुई उस फिल्म पर बात की, जिसके लिए उन्हें आज भी गिल्ट होता है. ये फिल्म है साल 2015 में आई ‘तमाशा’. ये एक ऐसी रोमांटिक ड्रामा रिलीज हुई जो बेकार प्रमोशन के चलते फ्लॉप हो गई, लेकिन बाद में इसे कल्ट का दर्जा मिला.

फिल्म ‘तमाशा’ ने कई युवाओं की जिंदगी को भी प्रभावित किया. फिल्म के डायरेक्टर इम्तियाज अली ने खुलकर माना है कि फिल्म देखकर कई युवाओं ने अपनी अच्छी-खासी नौकरियां छोड़ दीं, जिसके लिए उन्हें बेहद गिल्ट महसूस होता है. न्यूज18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में इम्तियाज अली ने कहा कि वे उन युवाओं की सफलता की दुआ करते हैं, लेकिन अगर वे संघर्ष में फंस गए तो पूरा परिवार प्रभावित होगा और इसके लिए उन्हें खुद को जिम्मेदार मानते हैं.

2015 में रिलीज हुई रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण स्टारर फिल्म ‘तमाशा’ को उस वक्त मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिली थीं और बॉक्स ऑफिस पर भी औसत प्रदर्शन रहा था. लेकिन समय के साथ यह फिल्म कल्ट स्टेटस हासिल कर चुकी है. रणबीर कपूर के किरदार वेद के जरिए फिल्म ने पारंपरिक हीरो इमेज को तोड़ते हुए एक्सटेंशन क्राइसिस, पहचान और असंतोषजनक करियर की कहानी को रोमांटिक कहानी के रूप में पेश किया. इस कहानी का खासकर शहरी मिलेनियल्स पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा. कई लोग मजाक में कहते हैं कि इस फिल्म ने पूरी पीढ़ी को अपनी प्रोफेशन छोड़ने के लिए प्रेरित किया.
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इम्तियाज अली ने हाल ही में बोमन इरानी के ‘स्पाइरल बाउंड’ राइटर्स कन्वेंशन में हिस्सा लिया. वहां कई नए लेखकों ने उनसे मुलाकात की और बताया कि उन्होंने ‘तमाशा’ देखने के बाद अपनी जॉब्स छोड़ दीं और अब लेखन के क्षेत्र में आ गए हैं. इम्तियाज ने कहा, ‘मुझे बेहद गिल्टी फील हुआ. मेरा तुरंत मन में ख्याल आया कि काश वे सफल हो जाएं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘अगर वे सफल नहीं हुए तो मैं उनके जीवन की विफलता के लिए जिम्मेदार बन जाऊंगा. न सिर्फ उस व्यक्ति के लिए, बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए. उनकी पत्नियां, बच्चे और खासकर माता-पिता. उनके माता-पिता की आकांक्षा होती है कि मेरा बेटा इंजीनियर बनेगा और आगे अमेरिका में काम करेगा.’ इम्तियाज अली ने कहा कि मुंबई में हर कलाकार को शुरुआती संघर्ष से गुजरना पड़ता है. वे अपनी आकर्षक प्रोफेशन छोड़कर कलाकार बनने की राह पर निकले हैं. मैं मिक्स्ड फीलिंग्स रखता हूं. एक तरफ खुशी है कि वे अपना सपना पूरा कर रहे हैं, दूसरी तरफ जिम्मेदारी का बोझ भी है.’

फिल्ममेकर ने आगे कहा कि मैं उन सबके लिए दुआ करता हूं. अगर मैं उनकी जगह होता तो खुद को खुश ही मानता. मैंने कभी चीजों को बहुत मेथोडिकल, मनी माइंडेड या न तरीके से नहीं सोचा. अंत में मुझे अच्छा लगता है, लेकिन जिम्मेदारी भी महसूस होती है. मैं इन लोगों से एक तरह से जुड़ा हुआ महसूस करता हूं.’

इम्तियाज अली अब अपनी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ की रिलीज की तैयारी में हैं, जो 12 जून को रिलीज होने वाली है. फिल्म के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया, ‘इस फिल्म में अतीत की खोज वर्तमान के नजरिए से बहुत बड़ी भूमिका निभाती है. रेमिनिसेंस (यादें) फिल्म का बड़ा हिस्सा हैं. ‘समय के साथ मैंने क्या खो दिया’ यह कॉन्सेप्ट फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है. ‘जो मैं याद करता हूं, वही मेरी मौजूदा व्यक्तित्व को बनाता है’.

उन्होंने कहा कि आज के समय में जब माइग्रेशन बहुत ज्यादा हो रहा है, यह फिल्म प्रासंगिक है. टीवी पर चैनल खोलते ही आपको अलग-अलग देशों में कानूनी और अवैध रूप से हो रहे माइग्रेशन के सीन्स दिखते हैं. खोने का एहसास केवल भौतिक नहीं होता, बल्कि भावनात्मक भी होता है. यह फिल्म उस प्यार के बारे में है जो आप अपने साथ लेकर चलते हैं जब आप एक सीमा पार करते हैं.

