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AI इंसान को रिप्लेस कर देगा? भूल जाओ! सुभाष घई ने बताया क्यों कोई मशीन इंसानी दिमाग को कभी मात नहीं दे सकती

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Subhash Ghai on AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते दौर में डायरेक्टर सुभाष घई ने एआई की सीमाओं पर बड़ी बात कही है. उन्होंने साफ किया कि एआई सिर्फ एक टूल है जो इंसान की मदद के लिए बना है, उसकी जगह लेने के लिए नहीं.पढ़ें घई का यह वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट.

AI इंसान को रिप्लेस कर देगा? भूल जाओ! बोले सुभाष घईZoom

सुभाष घई

नई दिल्ली: बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर सुभाष घई ने एक बार फिर टेक्नोलॉजी और इंसानी दिमाग को लेकर एक बहुत ही गहरी बात कही है.आजकल हर तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की चर्चा हो रही है, ऐसे में सुभाष घई ने इस पर अपने विचार साझा किए हैं. उनका मानना है कि आने वाले समय में एआई भले ही लोगों के कई काम आसान कर दे, लेकिन असली सफलता हमेशा उन्हीं को मिलेगी जो अपनी क्रिएटिविटी और भावनाओं को जिंदा रखेंगे.

सुभाष घई ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी एक तस्वीर शेयर करते हुए एक बेहद खूबसूरत और सोच बदलने वाला कैप्शन लिखा. उन्होंने साफ किया कि मशीनें कितनी भी स्मार्ट हो जाएं, वो इंसानी दिल और दिमाग का मुकाबला नहीं कर सकतीं.

मशीनें काम संभाल सकती हैं, इंसानियत नहीं

सुभाष घई ने अपनी पोस्ट में लिखा कि एआई आने वाले कल में इंसान के ज्यादातर मानसिक और दिमागी कामों को खुद संभाल सकता है. लेकिन, वह इंसान के भीतर मौजूद असली मानवीय गुणों की जगह कभी नहीं ले पाएगा. भविष्य सिर्फ उन्हीं लोगों का होने वाला है जो अपनी रचनात्मक सोच को लगातार मजबूत करते रहेंगे. संगीत, कविता, पेंटिंग, आपस की बातचीत और सही-गलत को परखने की समझ, ये कुछ ऐसे खास गुण हैं जो सिर्फ इंसानों के पास हैं और यही हमें मशीनों से अलग बनाते हैं.

भावनाएं भी जरूरी हैं

फिल्ममेकर का कहना है कि एआई से केवल जानकारी या डेटा हासिल कर लेना ही बड़ी बात नहीं है. असली जादू तब होता है जब आप उस जानकारी को अपनी भावनाओं और क्रिएटिविटी के साथ जोड़ते हैं. जब कोई व्यक्ति कला, साहित्य और समाज के मूल्यों से जुड़ा रहता है, तभी वह दुनिया के लिए कुछ बेहतर कर पाता है. दूसरों की मदद करने का भाव सिर्फ एक इंसान के अंदर ही आ सकता है, किसी रोबोट या कंप्यूटर में नहीं.

पहले भी उठा चुके हैं एआई पर सवाल

यह कोई पहली बार नहीं है जब सुभाष घई ने एआई को लेकर अपनी बात रखी हो. वह अक्सर इस मुद्दे पर बेबाकी से बोलते नजर आते हैं. उनका हमेशा से मानना रहा है कि एआई एक बहुत ही ताकतवर और कमाल की टेक्नोलॉजी है, लेकिन इसे इंसानी दिमाग का विकल्प या रिप्लेसमेंट नहीं माना जाना चाहिए. फिल्में, कहानियां, भावनाएं और नई कल्पनाएं हमेशा इंसानी दिमाग से ही जन्म लेती हैं, और इन सब चीजों को हम किसी मशीन के भरोसे बिल्कुल नहीं छोड़ सकते.

बदलती टेक्नोलॉजी के बीच क्या है स्थायी?

सुभाष घई ने अपनी बात को खत्म करते हुए कहा कि समय के साथ पीढ़ियां बदल जाती हैं, नई टेक्नोलॉजी आ जाती है और लोगों के सोचने का तरीका भी बदल जाता है. लेकिन इन सब बड़े बदलावों के बीच भी जो चीज़ हमेशा टिकी रहती है, वह है इंसान की रचनात्मक सोच. आखिर एआई को बनाने वाला भी तो एक इंसान ही है! इसलिए एआई का असली मकसद इंसान की जगह लेना नहीं, बल्कि उसकी मदद करना है.

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गार्गी द्विवेदीSub Editor

मैं इस समय News18 App टीम का हिस्सा हूं. News18 App पर आप आसानी से अपनी मनपसंद खबरें पढ़ सकते हैं. मुझे खबरें लिखने का 3 साल से ज्यादा का अनुभव है और फिलहाल मैं सब एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले मैंने, दैनिक जाग…और पढ़ें

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