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साल 2000 में बॉबी देओल की एक फिल्म के जरिए धर्मेंद्र का सपना पूरा हुआ था. फिल्म में बॉबी देओल और रानी मुखर्जी नजर आए थे. धर्मेंद्र ने ही इस फिल्म का टाइटल दिया था. इस फिल्म के लिए वह 17 साल से इंतजार कर रहे थे.

नई दिल्ली. धर्मेंद्र अपनी जुबां के बहुत पक्के थे. वह जो ठान लेते थे, करते ही थे. साल 1983 में उन्होंने एक सपना देखा था. लेकिन उनका ये सपना पूरा नहीं हो सका था. फिर पूरे 17 साल बाद उन्होंने अपने इस सपने को साकार किया. फिर भी खुशी नहीं मिली.

बॉलीवुड में कई फिल्मों के पीछे ऐसी कहानियां छिपी होती हैं, जिनके बारे में सुनकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है. ऐसी ही एक कहानी है बॉबी देएल की साल 2000 में आई फिल्म ‘बिच्छू’ की.फिल्म में बॉबी देओल और रानी लीड रोल में नजर आए थे.

बहुत कम लोग जानते हैं कि साल 1983 में धर्मेंद्र बिच्छू नाम से ही एक फिल्म बनाना चाहते थे. इस फिल्म में वो बतौर एक्टर ही नहीं, बल्कि बतौर प्रोड्यूसर भी काम करने वाले थे. यह उनके प्रोडक्शन हाउस की शुरुआती फिल्मों में से एक होने वाली थी.
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अपनी इस फिल्म को लेकर वह काफी सीरियस थे. वह चाहते थे कि इस फिल्म को उस दौर के मशहूर निर्देशक राज खोसला डायरेक्ट करें. फिल्म में बतौर लीड हीरोइन वह शबाना आजमी को लेना चाहते थे. शूटिंग भी शुरू हो चुकी थी.

लेकिन वक्त को ये मंजूर न था और धर्मेंद्र की इस फिल्म की पहले शेड्यूड के बाद ही शूटिंग बंद करनी पड़ी. क्योंकि राज खोसला का निधन हो गया था. यूं फिल्म के निर्देशक की अचानक मौत से फिल्म ठंडे बस्ते में चली गई.

काफी इंतजार के बाद धर्मेंद्र ने फिल्म की जिम्मेदारी साई परांजपे को सौंप दी. वह उस दौर में चश्मे बद्दूर, कथा और स्पर्श जैसी शानदार फिल्में बना चुकी थीं. लेकिन फिल्म को संगीत दे रहे थे शंकर सिंह रघुवंशी. लेकिन साई चाहती थीं कि फिल्म का संगीत राज कमल दे और बात खराब हो गई.

इसके बाद फिल्म फिर से बंद हो गई. ये फिल्म कभी रिलीज ही नहीं हो पाई. 17 साल बाद जब धर्मेंद्र के भतीजे और निर्देशक गुड्डू धनोवा बॉबी देओल को लेकर फिल्म बना रहे थे, तो धर्मेंद्र ने अपनी फिल्म का टाइटल बिच्छू उन्हें दिया और फिल्म रिलीज हुई तो 17 साल बाद धर्मेंद्र का सपना पूरा हुआ.

बता दें कि साल 2000 में बिच्छू आई, जिसमें बॉबी देओल ने जीवा नाम के लड़के का रोल निभाया था.फिल्म में रानी मुखर्जी नजर आई थीं. लेकिन फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई. धर्मेंद्र का सपना तो पूरा हुआ. लेकिन फिर वह खुशी को तरसते रह गए थे.

