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भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो सिर्फ अपनी फिल्मों की वजह से नहीं, बल्कि अपनी शख्सियत की वजह से भी अमर हो जाते हैं. नरगिस दत्त एक ऐसा ही सितारा थीं जो अब भले ही हमारे बीच नहीं हैं लेकिन फिल्मों के जरिए वो पीछे लंबी विरासत छोड़ गई हैं.

नई दिल्ली. चुलबुली अदाएं, गहरी आंखें और प्रभावशाली अभिनय से उन्होंने दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया. 3 मई 1981 को जब उन्होंने मात्र 51 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहा, तब भारतीय सिनेमा ने सिर्फ एक महान अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान और प्रेरक व्यक्तित्व को भी खो दिया.

1 जून 1929 को कोलकाता में जन्मीं नरगिस का असली नाम रशीद फातिमा था. बचपन से ही कला के प्रति उनका झुकाव था. बहुत कम उम्र में उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था, लेकिन असली पहचान उन्हें महबूब खान की कालजयी फिल्म ‘मदर इंडिया’ से मिली.

क्लासिक कल्ट ‘मदर इंडिया’ से नरगिस को न सिर्फ इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर पहचान मिली थी, बल्कि इस फिल्म ने उनकी निजी जिंदगी की दिशा भी बदलकर रख दी थी. इस फिल्म के सेट पर एक्ट्रेस की मुलाकात सुनील दत्त से हुई.
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‘मदर इंडिया’ की शूटिंग के दौरान एक आग वाले दृश्य में जब सेट पर हालात खतरनाक हो गए, तब सुनील दत्त ने अपनी जान जोखिम में डालकर नरगिस को सुरक्षित बाहर निकाला. यही वह पल था, जिसने दोनों के रिश्ते को नई गहराई दी. धीरे-धीरे यह अपनापन प्रेम में बदला और 11 मार्च 1958 को दोनों ने विवाह कर लिया.

सुनील दत्त से शादी से पहले नरगिस शादीशुदा राज कपूर से प्यार करती थीं. राज कपूर के साथ उनका रिश्ता जग-जाहिर था, लेकिन डायरेक्टर अपनी पत्नी कृष्णा कपूर को छोड़ना नहीं चाहते थे. डायरेक्टर से ब्रेकअप के बाद नरगिस अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गईं और उन्होंने सुनील दत्त से शादी कर ली.

इस शादी से कपल के तीन बच्चे- संजय, प्रिया और नम्रता हैं. नरगिस और सुनील दत्त के जीवन से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं, लेकिन उनमें से एक बेहद दिलचस्प घटना फिल्म ‘हमराज’ के सेट की है. इस फिल्म में सुनील दत्त को एक 110 वर्षीय बुजुर्ग का किरदार निभाना था. मशहूर मेकअप आर्टिस्ट पंडरी सुकर ने उनका ऐसा रूपांतरण किया कि उन्हें पहचान पाना लगभग असंभव था.

जब नरगिस सेट पर सुनील दत्त से मिलने पहुंचीं, तो उन्होंने चारों ओर नजर दौड़ाई लेकिन अपने पति को पहचान नहीं सकीं. मजेदार बात यह रही कि उन्होंने उसी बुजुर्ग बने सुनील दत्त से पूछ लिया कि ‘दत्त साहब कहां हैं?’ और सुनील ने भी शरारत करते हुए जवाब दिया कि वह अभी तक आए ही नहीं.

काफी देर तक करीबन 2 घंटे इंतजार करने के बाद जब मेकअप आर्टिस्ट ने सच्चाई बताई, तो नरगिस हैरान रह गईं. मेकअप की इस बेमिसाल कला से प्रभावित होकर उन्होंने पंडरी सुकर को अपनी कीमती घड़ी उपहार में दे दी.

नरगिस का व्यक्तित्व सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं था. उन्होंने समाजसेवा को भी उतनी ही गंभीरता से अपनाया. पद्मश्री सम्मान, राज्यसभा सदस्यता और फिल्मों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार उनकी बहुआयामी पहचान के प्रमाण हैं. नरगिस को ‘रात और दिन’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था और ‘मदर इंडिया’ के लिए फिल्मफेयर सम्मान मिला था.

