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‘नर्सों को लोग टाइमपास समझते हैं’, कंगना रनौत ने समाज के ‘गंदे नजरिये’ को किया बेनकाब!- ‘ज्यादा सेक्सुअलाइज किया’

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एक्ट्रेस कंगना रनौत ने नर्सिंग पेशे को लेकर फैली दकियानूसी सोच की निंदा की है. फिल्मों में नर्सिंग पेश को सेक्सुअलाइज करने पर अपनी भड़ास निकाली. कंगना रनौत का कहना है कि नर्स मेडिकल सिस्टम की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें कम वेतन, ज्यादा काम और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है. एक्ट्रेस अपनी अगली फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ में मेडिकल स्टाफ की सच्ची बहादुरी बयां करेंगी. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान कामा अस्पताल के स्टाफ ने लोगों की जान बचाई थी. वे अजमल कसाब को पहचानने वाले अहम गवाह भी थे.

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कंगना रनौत ने फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ में नर्स का रोल निभाया है.

नई दिल्ली: एक्ट्रेस और राजनेता कंगना रनौत ने हमारे समाज में नर्सिंग के पेशे को लेकर गलत धारणाओं पर तीखा हमला किया है. कंगना रनौत ने फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर बेबाकी से कहा था कि नर्सें हमारी स्वास्थ्य सेवा की सबसे मजबूत वर्कर होती हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि इस पेशे को समाज में अक्सर सेक्सुअलाइज्ड नजरिए से देखा जाता है. कंगना ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि नर्सों को न सिर्फ बहुत कम सैलरी मिलती है, बल्कि उनसे जरूरत से ज्यादा काम भी कराया जाता है. उन्हें बदले में वह सम्मान और सराहना कभी नहीं मिलती जिसकी वे असल हकदार हैं. उन्होंने फिल्म के एक डायलॉग का हवाला देते हुए बताया कि लोग अस्पताल में नर्सों को देखकर टाइमपास के लिए दो-चार बातें करने की कोशिश करते हैं, जो समाज की बेहद ओछी और कड़वी सच्चाई को दिखाता है. कंगना का मानना है कि जब भी अस्पताल का जिक्र होता है, तो लोग सिर्फ डॉक्टरों के योगदान की बात करते हैं, जबकि मरीजों की देखभाल से लेकर अस्पताल की साफ-सफाई और पूरे सिस्टम को चलाने की असली रीढ़ नर्सें, वार्ड बॉयज और चौकीदार जैसे सपोर्ट स्टाफ ही होते हैं, जिन्हें हमेशा नजरअंदाज कर दिया जाता है.

कंगना की फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ मुंबई में हुए 26/11 के खौफनाक आतंकी हमलों के दौरान कामा अस्पताल के जांबाज स्टाफ की बहादुरी की कहानी बयां करती है. फिल्म में कंगना खुद एक आम स्टाफ नर्स के किरदार में हैं, जिसकी मेहनत अक्सर लोगों की नजरों से ओझल रह जाती है. इस थ्रिलर फिल्म में यह दिखाया गया है कि कैसे आतंकियों के हमले के बीच अस्पताल के इन सीधे-साधे और चुपचाप काम करने वाले कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर 400 से ज्यादा मासूम लोगों की जान बचाई थी. कंगना ने बताया कि कामा अस्पताल का यही बहादुर स्टाफ आतंकी अजमल कसाब की पहचान करने में अहम गवाह बना था. इतना सब कुछ झेलने के बाद भी इन फ्रंटलाइन वर्कर्स ने अद्भुत साहस दिखाया और देश के साथ मजबूती से खड़े रहे.

फिल्म के नाम में छिपी है खास प्रेरणा
फिल्म के नाम को लेकर एक बेहद दिलचस्प बात बताते हुए कंगना ने खुलासा किया कि ‘भारत भाग्य विधाता’ टाइटल असल में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों से प्रेरित है. उन्होंने बताया कि साल 2025 में पीएम मोदी ने समाज के अलग-अलग वर्गों के लिए खास नाम दिए थे, जैसे दिव्यांगजनों और विधवाओं की योजना को ‘कल्याणी’, हाथ से काम करने वाले कारीगरों को ‘विश्वकर्मा’ और देश के मेहनतकश मजदूरों व ग्राउंड वर्कर्स को ‘भारत भाग्य विधाता’ कहा था. यह बात फिल्म की टीम के दिल को छू गई, जिसके बाद उन्होंने इसे अपनी फिल्म का टाइटल बनाने का फैसला किया क्योंकि नर्सें और अस्पताल का स्टाफ भी देश के असली भाग्य विधाता हैं. इस फिल्म के दमदार ट्रेलर ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया है और यह साफ कर दिया है कि इनके बिना हमारा पूरा सिस्टम एक दिन भी नहीं टिक सकता. कंगना ने उम्मीद जताई है कि अगर इस मार्मिक कहानी को देखने के बाद लोगों की सोच में कुछ मिनटों के लिए भी कोई बदलाव आता है, तो एक कलाकार के तौर पर उनकी पूरी टीम की मेहनत सफल हो जाएगी.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें



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