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‘बंदर’ से पहले देख डालिए अनुराग कश्यप की 7 फिल्में, डार्क कॉमेडी घूमा देंगी दिमाग, हर एक की रेटिंग है धांसू

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अनुराग कश्यप की फिल्म ‘बंदर’ 5 जून को रिलीज हो चुकी है. इस फिल्म में बॉबी देओल के साथ सान्या मल्होत्रा, सबा आजाद, रिद्धि सेन, राज बी. शेट्टी और जितेंद्र जोशी अहम किरदारों में नजर आए हैं. अपनी लीक से हटकर फिल्मों के लिए मशहूर अनुराग कश्यप एक बार फिर अनोखी फिल्म लेकर आ रहे हैं. बंदर की कहानी क्राइम, सामाजिक परतों और साइकोलॉजिकल इशू के इर्द-गिर्द बुनी गई है.

नई दिल्ली. अनुराग कश्यप की फिल्म ‘बंदर’ का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था. उनकी फिल्मों में अपराध, राजनीति, समाज और ह्यूमन साइकोलॉजी की जटिल परतें देखने को मिलती हैं. पारंपरिक बॉलीवुड फार्मूले से हटकर बनाई गई उनकी फिल्मों ने न सिर्फ क्रिटिक्स की वाहवाही बटोरी बल्कि दर्शकों के बीच भी एक खास पहचान बनाई. ‘बंदर’ देखने से पहले अनुराग कश्यप की इन फिल्मों को देखना न भूलें.

नई दिल्ली. अनुराग कश्यप की फिल्म ‘बंदर’ का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था. उनकी फिल्मों में अपराध, राजनीति, समाज और ह्यूमन साइकोलॉजी की जटिल परतें देखने को मिलती हैं. पारंपरिक बॉलीवुड फार्मूले से हटकर बनाई गई उनकी फिल्मों ने न सिर्फ क्रिटिक्स की वाहवाही बटोरी बल्कि दर्शकों के बीच भी एक खास पहचान बनाई. ‘बंदर’ देखने से पहले अनुराग कश्यप की इन फिल्मों को देखना न भूलें.

ब्लैक फ्राइडे (2004): 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के बैकग्राउंड पर बनी ‘ब्लैक फ्राइडे’ अनुराग कश्यप की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार है. पत्रकार एस. हुसैन जैदी की किताब पर आधारित यह फिल्म आतंकवादी हमलों की जांच, अपराधियों की तलाश और पूरे घटनाक्रम को बेहद रियलिस्टिक अंदाज में पेश करती है. डॉक्यूमेंट्री जैसी प्रस्तुति, दमदार अभिनय और काफी रिसर्च को क्रिटिक्स ने खूब सराहा.

ब्लैक फ्राइडे (2004): 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के बैकग्राउंड पर बनी ‘ब्लैक फ्राइडे’ अनुराग कश्यप की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार है. पत्रकार एस. हुसैन जैदी की किताब पर आधारित यह फिल्म आतंकवादी हमलों की जांच, अपराधियों की तलाश और पूरे घटनाक्रम को बेहद रियलिस्टिक अंदाज में पेश करती है. डॉक्यूमेंट्री जैसी प्रस्तुति, दमदार अभिनय और काफी रिसर्च को क्रिटिक्स ने खूब सराहा.

देव.डी (2009): शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के कालजयी उपन्यास देवदास को अनुराग कश्यप ने बिल्कुल नए और आधुनिक अंदाज में देव.डी के रूप में पेश किया. यह फिल्म पारंपरिक प्रेम कहानी से हटकर आज के दौर के रिश्तों, टूटन और आत्म-विनाश को दिखाती है. अभय देओल, माही गिल और कल्कि कोचलिन अभिनीत इस फिल्म में प्यार, दिल टूटने, नशे और सेल्फ एक्सेप्टेंस को बहुत अलग तरह से दर्शाती है.

देव.डी (2009): शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के कालजयी उपन्यास देवदास को अनुराग कश्यप ने बिल्कुल नए और आधुनिक अंदाज में देव.डी के रूप में पेश किया. यह फिल्म पारंपरिक प्रेम कहानी से हटकर आज के दौर के रिश्तों, टूटन और आत्म-विनाश को दिखाती है. अभय देओल, माही गिल और कल्कि कोचलिन अभिनीत इस फिल्म में प्यार, दिल टूटने, नशे और सेल्फ एक्सेप्टेंस को बहुत अलग तरह से दर्शाती है.

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गुलाल (2009): राजस्थान की सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित गुलाल सत्ता, जातीय पहचान, छात्र राजनीति और महत्वाकांक्षा जैसे विषयों को गहराई से छूती है. रिलीज के समय भले ही फिल्म को सीमित सफलता मिली, लेकिन समय के साथ यह एक कल्ट क्लासिक बन गई. इसके गाने और संवाद आज भी प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय हैं.

गुलाल (2009): राजस्थान की सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित गुलाल सत्ता, जातीय पहचान, छात्र राजनीति और महत्वाकांक्षा जैसे विषयों को गहराई से छूती है. रिलीज के समय भले ही फिल्म को सीमित सफलता मिली, लेकिन समय के साथ यह एक कल्ट क्लासिक बन गई. इसके गाने और संवाद आज भी प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय हैं.

गैंग्स ऑफ वासेपुर (2012): अनुराग कश्यप की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ दो भागों में बनी एक विशाल क्राइम गाथा है. धनबाद के कोयला कारोबार और कई पीढ़ियों तक चली दुश्मनी की कहानी को फिल्म में बेहद प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है. इसके यादगार किरदार, दमदार संवाद और शानदार संगीत ने इसे भारतीय सिनेमा की कल्ट फिल्मों में शामिल कर दिया.

गैंग्स ऑफ वासेपुर (2012): अनुराग कश्यप की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ दो भागों में बनी एक विशाल क्राइम गाथा है. धनबाद के कोयला कारोबार और कई पीढ़ियों तक चली दुश्मनी की कहानी को फिल्म में बेहद प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है. इसके यादगार किरदार, दमदार संवाद और शानदार संगीत ने इसे भारतीय सिनेमा की कल्ट फिल्मों में शामिल कर दिया.

अग्ली (2013): एक बच्चे के अचानक गायब हो जाने से शुरू होने वाली ‘अग्ली’ सिर्फ एक थ्रिलर नहीं, बल्कि इंसानी स्वार्थ, टूटते रिश्तों और लालच की पड़ताल भी है. फिल्म का यथार्थवादी अंदाज और भावनात्मक गहराई दर्शकों को भीतर तक झकझोर देती है.

अग्ली (2013): एक बच्चे के अचानक गायब हो जाने से शुरू होने वाली ‘अग्ली’ सिर्फ एक थ्रिलर नहीं, बल्कि इंसानी स्वार्थ, टूटते रिश्तों और लालच की पड़ताल भी है. फिल्म का यथार्थवादी अंदाज और भावनात्मक गहराई दर्शकों को भीतर तक झकझोर देती है.

रमन राघव 2.0 (2016): मुंबई के कुख्यात सीरियल किलर रमन राघव से प्रेरित इस मनोवैज्ञानिक थ्रिलर में नवाजुद्दीन सिद्दीकी और विक्की कौशल ने यादगार अभिनय किया है. फिल्म अपराधी मानसिकता और अच्छाई-बुराई के धुंधले होते अंतर को बेहद अलग अंदाज में पेश करती है.

रमन राघव 2.0 (2016): मुंबई के कुख्यात सीरियल किलर रमन राघव से प्रेरित इस मनोवैज्ञानिक थ्रिलर में नवाजुद्दीन सिद्दीकी और विक्की कौशल ने यादगार अभिनय किया है. फिल्म अपराधी मानसिकता और अच्छाई-बुराई के धुंधले होते अंतर को बेहद अलग अंदाज में पेश करती है.

मुक्काबाज (2017): यह फिल्म एक छोटे शहर के युवा मुक्केबाज की कहानी है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए सामाजिक भेदभाव, राजनीति और भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ता है. खेल के साथ-साथ फिल्म समाज की कई कड़वी सच्चाइयों को भी सामने लाती है.

मुक्काबाज (2017): यह फिल्म एक छोटे शहर के युवा मुक्केबाज की कहानी है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए सामाजिक भेदभाव, राजनीति और भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ता है. खेल के साथ-साथ फिल्म समाज की कई कड़वी सच्चाइयों को भी सामने लाती है.

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