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हर दौर में म्यूजिक बदलता रहा है. फिल्मों की कहानी, उनका प्रजेंटेशन बदलता रहा है. 70 के दशक में वेस्टर्न म्यूजिक का प्रभाव भारतीय संगीत पर पड़ा. इस दौर में कुछ ऐसे गाने भी बने जिनमें प्यार का रंग बहुत ही अलग था. आसान और सरल अल्फाज में दिल की बात को होठों तक लाने का काम किया. धुन ऐसी कि मन मदमस्त हो जाए. 1971 में रिलीज एक फिल्म में ऐसा ही एक गाना था जिसमें दो सिंगर की आवाजें थी. गाना असाधारण था. आज भी पार्टी-डिस्को में बजता है. एक सिंगर को इस एवरग्रीन सुपरहिट गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.

जिस गाने को लिखने के बाद गीतकार भी सिंगर से माफी मांगने लगे, रिकॉर्डिंग के समय स्टूडियो छोड़कर चला जाए, वही गाना एवरग्रीन क्लासिक सॉन्ग बन जाए. उस फिल्म की पहचान बन जाए. ट्रेंड सेटर बन जाए तो आप क्या कहेंगे. ऐसा ही एक गाना दो सिंगर की आवाज में 45 साल पहले ‘कारवां’ मूवी में आया था. गीत के बोल थे : पिया तू अब तो आजा. इस गाने को आशा भोसले-आरडी बर्मन ने गाया है. गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी थे. मजरूह ने खुद को इस गाने को गंदा बताया था. उन्होंने आशा भोसले से माफी भी मांगी थी. आशा ताई ने रिस्क लिया और गाने को अलग ही रंग में गाया. इस गाने ने इतिहास रच दिया. 55 साल बाद भी इस गाने का क्रेज बरकरार है. आशा भोसले को इस गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. आइये जानते हैं ‘कारवां’ मूवी से जुड़ी दिलचस्प बातें…

‘कारवां’ एक मसाला फिल्म थी जिसका डायरेक्शन नासिर हुसैन ने किया था. फिल्म 29 अक्टूबर 1971 को रिलीज हुई थी. प्रोड्यूसर आमिर खान के पिता ताहिर हुसैन थे. स्क्रीनप्ले सचिन भौमिक ने लिखा था. फिल्म में जीतेंद्र-आशा पारेख लीड रोल में थे. ऐसी म्यूजिकल फिल्में यदा-कदा ही बन पाती हैं. फिल्म का प्लॉट 1953 की हॉलीवुड फिल्म गर्ल ऑन द रन से इंस्पायर्ड था.

‘कारवां’ फिल्म का म्यूजिक आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी थे. नासिर हुसैन ने इस फिल्म के जरिये अपने भाई ताहिर हुसैन को बतौर प्रोड्यूसर स्थापित किया. फिल्म के लेखक-निर्देशक नासिर हुसैन थे. आशा पारेख के साथ उनकी यह छठवीं और आखिरी फिल्म थी. 13 साल में दोनों ने छह फिल्में कीं. दोनों का अफेयर भी था. अंतिम बार मंजिल-मंजिल (1984) में उन्होंने सनी देओल की मां का किरदार निभाया था. फिल्म जितनी नासिर हुसैन की थी, उतनी ही आरडी बर्मन की. आरडी बर्मन ने अपने ब्लॉकबस्टर म्यूजिक से फिल्म को एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी बना दिया था.
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फिल्म के ओपनिंग क्रेडिट के लिए इंपैक्टफुल म्यूजिक आरडी बर्मन ने ही तैयार किया था. उन्होंने ‘तीसरी मंजिल’ से ही ऐसा म्यूजिक बनाना शुरू कर दिया था. कारवां का थीम म्यूजिक ‘लॉरेंस ऑफ अरेबिया’ से इंस्पायर्ड था लेकिन आरडी बर्मन ने उसे अपनी ही एक अलग रंग दिया था. फिल्म में कुल 8 गाने थे. हर गाने का अपना रंग था. किसी एक फिल्म में इतने अलग-अलग रंग के गाने शायद ही किसी फिल्म में आए हों. 1971 का सबसे ज्यादा बिकने वाला म्यूजिक ‘कारवां’ का ही था. फिल्म में एक से बढ़कर एक गाने थे.

फिल्म के पॉप्युलर गाने थे : हम तो हैं राही दिल के, अब जो मिले हैं तो, चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी, दइया ये मैं कहां फंसी, दिलबर दिल से प्यारे, गोरिया कहां तेरा देश, कितना प्यारा वादा है इन मतवाली आंखों का और पिया तू अब तो आजा. इन गानों को किशोर कुमार, लता मंगेशकर, आशा भोसले और मोहम्मद रफी ने आवाज दी थी. ‘दइया ये मैं कहां फंसी’ गाने को आशा भोसले ने अपनी पूरे करियर का सबसे मुश्किल गाना बताया था. ‘पिया तू अब तो आजा’ गाने के लिए आशा भोसले को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

जीतेंद्र ने फिल्म से जुड़ा एक मजेदार किस्सा शेयर करते हुए बताया था, ‘मुझे जब खुद की गायकी की भड़ास निकालनी होती है तो मैं लाउउ स्पीकर को फुल वॉल्यूम में बजाकर पूरे साउंड में गाता हूं और चाहता हूं. एक दिन ‘कांरवा’ फिल्म की शूटिंग के दौरान मैं और आशा पारेख दोनों नाच रहे थे. इसी बीच लाउड स्पीकर की वायर निकल गई. मेरी ही आवाज गूंजने लगी तो मैं डर गया. मुझे हैरानी तो तब हुई जब मैंने देखा कि आशा पारेख मुझसे भी बेसुरा गा रही हैं.’

नासिर हुसैन के साथ जीतेंद्र की यह इकलौती फिल्म थी. फिल्म की शूटिंग के दौरान आशा पारेख के बर्थडे पर नासिर हुसैन ने एक स्पेशल पार्टी दी थी. इसमें कारवां के आकार का केक मंगवाया गया था. नासिर हुसिन के भतीजे तारिक इस फिल्म में असिस्टेंट थे.

फिल्म भारत से ज्यादा चीन में खूब चली. चीन में यह फिल्म 1979 में रिलीज हुई थी. आज भी चीन में सबसे ज्यादा कामयाब करने वाली फिल्मों की लिस्ट में कारवां का नाम टॉप पर है. फिल्म के 30 करोड़ टिकट बिके थे. फिल्म का कलेक्शन 1.8 करोड़ रुपये था. फिल्म हिट थी. यह 1971 की छठवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

