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भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य और यादगार फिल्मों में गिनी जाने वाली साल 2002 में आई फिल्म ‘देवदास’ आज भी अपने शानदार दृश्यों, दमदार संवादों और भावनात्मक किरदारों के लिए याद की जाती है. फिल्म का एक ऐसा दृश्य, जिसने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी, वह था पारो और चंद्रमुखी का आमना-सामना. अब सालों बाद इस आइकॉनिक सीन को लेकर माधुरी दीक्षित ने दिलचस्प खुलासा किया.

नई दिल्ली. भव्य सेट, शानदार संवाद और भावनाओं का तूफान… ‘देवदास’ में कई ऐसे सीन्स हैं जो आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं. लेकिन जब पारो और चंद्रमुखी पहली बार आमने-सामने आईं, तो पर्दे पर सिर्फ दो किरदार नहीं, बल्कि प्रेम, स्वाभिमान और त्याग की दो दुनियाएं टकराती नजर आई थीं. यही वजह है कि यह सीन हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार दृश्यों में गिना जाता है. अब सालों बाद माधुरी दीक्षित ने इस मशहूर सीन को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने फिल्म प्रेमियों की उत्सुकता बढ़ा दी है. एक्ट्रे, ने बताया कि उस दृश्य का एक खास फ्रेम देखते ही उन्हें अचानक फिल्म ‘सिलसिला’ की याद आ गई थी. आखिर ऐसा क्या था उस पल में, जिसने उन्हें रेखा- जया बच्चन की जोड़ी की याद दिला दी? इस दिलचस्प किस्से के पीछे छिपी कहानी उतनी ही खूबसूरत है, जितना वह आइकॉनिक सीन.

संजय लीला भंसाली की सुपरहिट फिल्म ‘देवदास’ आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं. इनमें से एक सबसे यादगार दृश्य है माधुरी दीक्षित (चंद्रमुखी) और ऐश्वर्या राय बच्चन (पारो) के बीच का कन्फ्रंटेशन. हाल ही में माधुरी ने इस सीन पर बात करते हुए इसे यश चोपड़ा की क्लासिक फिल्म ‘सिलसिला’ से जोड़ा.

जूम से बातचीत में माधुरी ने बताया, ‘मुझे याद है कि ‘देवदास’ की शूटिंग के दौरान यह मेरा इकलौता ऐसा सीन था जो दिन के उजाले में शूट हुआ था. इसके अलावा मैंने फिल्म के लिए करीब 40 नाइट शिफ्ट्स (रात की शूटिंग) की थीं.’
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माधुरी ने आगे एक बेहद दिलचस्प बात का खुलासा करते हुए कहा कि इस सीन के एक शॉट ने उन्हें सीधे फिल्म ‘सिलसिला’ की याद दिला दी थी. उन्होंने बताया,’एक शॉट ऐसा था जहां पारो और चंद्रमुखी एक-दूसरे के ठीक बगल में खड़ी थीं. उस फ्रेम को देखते ही मुझे तुरंत ‘सिलसिला’ में जया बच्चन जी और रेखा जी के खड़े होने का अंदाज याद आ गया. जब मैंने स्क्रीन पर इसे देखा तो मेरे मुंह से निकला ‘ओह, यह फ्रेमिंग तो बिल्कुल वैसी ही है.’ यह बहुत ही खूबसूरती से लिखा गया सीन था.’

माधुरी ने आगे एक बेहद दिलचस्प बात का खुलासा करते हुए कहा कि इस सीन के एक शॉट ने उन्हें सीधे फिल्म ‘सिलसिला’ की याद दिला दी थी. उन्होंने बताया,’एक शॉट ऐसा था जहां पारो और चंद्रमुखी एक-दूसरे के ठीक बगल में खड़ी थीं. उस फ्रेम को देखते ही मुझे तुरंत ‘सिलसिला’ में जया बच्चन जी और रेखा जी के खड़े होने का अंदाज याद आ गया. जब मैंने स्क्रीन पर इसे देखा तो मेरे मुंह से निकला ‘ओह, यह फ्रेमिंग तो बिल्कुल वैसी ही है.’ यह बहुत ही खूबसूरती से लिखा गया सीन था.’

इसी के साथ, ‘स्क्रीन’ के साथ बातचीत के दौरान माधुरी दीक्षित ने उस सबसे बड़े कयास पर से भी पर्दा उठाया, जो सालों से बॉलीवुड के गलियारों में चर्चा का विषय रहा है. लंबे समय से यह अफवाह थी कि जब माधुरी दीक्षित ‘डोला रे डोला’ गाने की बेहद कठिन और भारी-भरकम शूटिंग कर रही थीं, तब वह चार महीने की प्रेग्नेंट थीं. इस अफवाह पर हंसते हुए माधुरी ने कहा, ‘मेरे बड़े बेटे आरिन का जन्म 2003 में हुआ था तो अब आप खुद ही गणित लगा लीजिए.’

आपको बता दें कि माधुरी के बड़े बेटे आरिन नेने का जन्म 17 मार्च 2003 को हुआ था. वहीं फिल्म ‘देवदास’ 12 जुलाई 2002 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जबकि इसका प्रीमियर 23 मई 2002 को कान्स फिल्म फेस्टिवल में ही हो गया था. यानी जब फिल्म दुनिया के सामने आ चुकी थी, माधुरी उसके काफी बाद प्रेग्नेंट हुई थीं. माधुरी ने साफ किया कि ‘डोला रे डोला’ की शूटिंग शारीरिक रूप से बहुत थका देने वाली थी, लेकिन प्रेग्नेंसी की बातें पूरी तरह बेबुनियाद हैं.

इस सीन की गहराई को समझाते हुए माधुरी ने कहा, ‘यह एक अद्भुत सीन था. एक तरफ ऐश्वर्या का किरदार (पारो) था, जो सत्ता, गर्व और ऊंचे घराने के घमंड से आता है, वहीं दूसरी तरफ मेरा किरदार (चंद्रमुखी) था, जो बेहद विनम्र है. चंद्रमुखी जानती है कि देवदास कभी उसका नहीं हो सकता लेकिन जब पारो उसे ताना मारती है, तब चंद्रमुखी कहती है ‘तुम खरीदने आई हो देवदास को हमसे?’ यानी तुम्हें उसे मुझसे खरीदना पड़ेगा, वो तुम्हारा नहीं है. दो अलग-अलग दुनिया की औरतों को एक ही फ्रेम में देखना बेहद खूबसूरत था.’

माधुरी ने आगे एक बेहद दिलचस्प बात का खुलासा करते हुए कहा कि इस सीन के एक शॉट ने उन्हें सीधे फिल्म ‘सिलसिला’ की याद दिला दी थी. उन्होंने बताया,’एक शॉट ऐसा था जहां पारो और चंद्रमुखी एक-दूसरे के ठीक बगल में खड़ी थीं. उस फ्रेम को देखते ही मुझे तुरंत ‘सिलसिला’ में जया बच्चन जी और रेखा जी के खड़े होने का अंदाज याद आ गया. जब मैंने स्क्रीन पर इसे देखा तो मेरे मुंह से निकला ‘ओह, यह फ्रेमिंग तो बिल्कुल वैसी ही है.’ यह बहुत ही खूबसूरती से लिखा गया सीन था.’

