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फिल्मों की दुनिया में शान और बड़ा बजट हमेशा से सफलता की गारंटी माना जाता रहा है. लेकिन, इतिहास गवाह है कि अगर स्क्रिप्ट कमजोर हो तो अरबों रुपये का इन्वेस्टमेंट भी बेकार जा सकता है. इसका सबसे हालिया और डरावना उदाहरण 2026 में ग्लोबली रिलीज होने वाली फिल्म ‘डेजर्ट वॉरियर’ है. सऊदी अरब और हॉलीवुड के कोलेबोरेशन से बनी लगभग ₹1400 करोड़ के भारी बजट वाली इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ ₹6 करोड़ कमाए. अपने बजट का एक परसेंट भी वसूल न कर पाने के कारण, यह वर्ल्ड सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी फ्लॉप और डिजास्टर साबित हुई है.

नई दिल्ली. ग्लोबल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक नया ट्रेंड उभर रहा है, जहां कई देश अपनी कल्चरल विरासत और ऐतिहासिक शान को इंटरनेशनल लेवल पर दिखाने के लिए खूब खर्च कर रहे हैं. इसी सिलसिले में खाड़ी देश सऊदी अरब ने सिनेमा के जरिए अपनी पहचान बदलने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया. 2021 में सऊदी अरब के मशहूर MBC स्टूडियोज ने कई इंटरनेशनल प्रोडक्शन कंपनियों के साथ मिलकर एक ऐसी फिल्म की नींव रखी जिसे सबसे बड़ा अरब-हॉलीवुड को-प्रोडक्शन माना गया. फिल्म का नाम था ‘डेजर्ट वॉरियर’, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. जब फिल्म 2026 में स्क्रीन पर आई, तो इसने इतिहास रच दिया, लेकिन कामयाबी से नहीं, बल्कि एक बहुत बुरी और ऐतिहासिक नाकामी के साथ.

फिल्म की कहानी का दायरा बहुत बड़ा और ऐतिहासिक था. इसका बैकग्राउंड 7वीं सदी की पुरानी अरब दुनिया में सेट था. फिल्म की मेन कहानी एक निडर और खुद की इज्जत करने वाली राजकुमारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने देश और इज्जत की रक्षा के लिए उस समय के बेरहम बादशाह किसरा के खिलाफ जंग का ऐलान करती है. इस बहुत मुश्किल और आत्मघाती लड़ाई में, राजकुमारी को अरब की सबसे मशहूर और बहादुर योद्धा ‘हंसला’ का साथ मिलता है. कागज पर कहानी दमदार, रोमांचक और ‘ग्लेडिएटर’ या ‘किंगडम ऑफ हेवन’ जैसी कल्ट हिस्टोरिकल फिल्मों की याद दिलाती थी. मेकर्स का विजन अरब इतिहास की इस शानदार कहानी को इस फिल्म के जरिए दुनिया के सामने पेश करना था और इसे हॉलीवुड की लेटेस्ट टेक्निकल काबिलियत के साथ मिलाना था.

यह बड़ा प्रोजेक्ट मशहूर हॉलीवुड डायरेक्टर रूपर्ट वायट को सौंपा गया था, जिन्होंने ‘राइज ऑफ द प्लैनेट ऑफ द एप्स’ जैसी ब्लॉकबस्टर और क्रिटिक्स द्वारा सराही गई फिल्मों को डायरेक्ट करके अपनी काबिलियत साबित की थी. फिल्म को इंटरनेशनल लेवल पर बनाने के लिए कई जाने माने हॉलीवुड स्टार्स को मोटी फीस पर साइन किया गया था.
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फिल्म की शूटिंग इतनी बड़ी थी कि रोजाना 400 से 500 लोगों की टीम सेट पर काम करती थी. बड़े रेगिस्तानों में सेट लगाना, पुराने महलों को फिर से बनाना और सैकड़ों जूनियर आर्टिस्ट के साथ लड़ाई के सीन फिल्माना बहुत महंगा साबित हुआ. हालांकि, दिक्कतें तब शुरू हुईं जब फिल्म का प्रोडक्शन शेड्यूल से बहुत पीछे होने लगा. लगातार देरी, रीशूट और विदेशी एक्टर्स की बहुत ज्यादा स्टार फीस की वजह से फिल्म का शुरुआती बजट कंट्रोल से बाहर हो गया और आखिर में लगभग ₹1,400 करोड़ से ज्यादा हो गया.

शूटिंग पूरी होने के बाद भी फिल्म की मुश्किलें जारी रहीं. फिल्म के सीन को शानदार और असली जैसा दिखाने के लिए बहुत सारे विजुअल इफेक्ट्स (VFX) और ग्राफिक्स का इस्तेमाल किया गया. एडिटिंग और ग्राफिक्स जैसे मुश्किल पोस्ट-प्रोडक्शन कामों में मेकर्स का 2 साल से ज्यादा का समय लग गया. इस लंबी देरी की वजह से फिल्म को लेकर शुरुआती चर्चा धीरे-धीरे कम होती गई. आखिरकार, कई मुश्किलों को पार करते हुए फिल्म अप्रैल 2026 में दुनिया भर के थिएटर में एक साथ रिलीज हुई. मेकर्स को उम्मीद थी कि हॉलीवुड कलाकारों और अरब कल्चर का यह अनोखा मेल दुनिया भर के दर्शकों को अपनी ओर खींचेगा, लेकिन थिएटर दोबारा खुलते ही बॉक्स ऑफिस के नतीजों ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया.

यूएस से लेकर सऊदी अरब तक के दर्शकों ने ‘डेजर्ट वॉरियर’ को पूरी तरह से नकार दिया. फिल्म की कहानी शानदार थी, लेकिन उसमें वह जान और इमोशन नहीं था जो दर्शकों को बांधे रखता है. हैरानी की बात यह है कि फिल्म पश्चिमी देशों (यूएस और यूरोप) में भी कमाई नहीं कर पाई और न ही इसे अपने घरेलू बाजारों (सऊदी अरब और मिडिल ईस्ट) में दर्शकों का प्यार मिला.

इस फिल्म ने दुनिया भर में सिर्फ ₹6 करोड़ का लाइफटाइम बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया. ट्रेड एनालिस्ट के मुताबिक, फिल्म को अपनी टोटल प्रोडक्शन कॉस्ट का 99.6 परसेंट नेट लॉस हुआ. सिनेमा के 100 साल से ज्यादा के इतिहास में किसी भी फिल्म को अपने बजट के मुकाबले इतना बड़ा और शर्मनाक नुकसान नहीं हुआ. इस तरह ‘डेजर्ट वॉरियर’ हमेशा के लिए वर्ल्ड सिनेमा की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्मों में से एक बन गई है.

