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90 का दशक बॉलीवुड के इतिहास का एक सुनहरा दौर था, जिसने हिंदी सिनेमा की किस्मत और इमेज को हमेशा के लिए बदल दिया. 6 साल के अंदर, इस दशक में दो थ्रिलर फिल्में रिलीज हुईं, जिन्होंने न सिर्फ सिनेमा के जानेमाने स्टैंडर्ड को तोड़ा, बल्कि इंडस्ट्री को 2 नए सुपरस्टार भी दिए. हम बात कर रहे हैं शाहरुख खान की 1993 की ब्लॉकबस्टर ‘बाजीगर’ और बॉबी देओल की 1998 की सुपरहिट सस्पेंस थ्रिलर ‘सोल्जर’ की.इन दोनों फिल्मों में लीड रोल करने वाले एक्टर रातोंरात बॉक्स ऑफिस सुपरस्टार बन गए. दिलचस्प बात यह है कि इन फिल्मों की स्टोरीलाइन, किरदारों के शेड्स और बदला लेने के अनोखे स्टाइल में इतनी समानताएं थीं कि उन्होंने बॉक्स ऑफिस पर सफलता का एक नया फॉर्मूला बना दिया.

नई दिल्ली. जब भी 90 के दशक की सस्पेंस और थ्रिलर फिल्मों का जिक्र होता है, तो डायरेक्टर जोड़ी अब्बास-मस्तान का नाम हमेशा दिमाग में आता है. उन्होंने बॉलीवुड को थ्रिलर सिनेमा का ग्रामर सिखाया, रोमांटिक फिल्मों के जमाने में भी बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. 1993 में रिलीज हुई ‘बाजीगर’ ने शाहरुख खान को विलेन से सुपरस्टार बना दिया, जबकि ठीक 5 साल बाद 1998 में रिलीज हुई ‘सोल्जर’ ने बॉबी देओल को यूथ क्रश बना दिया. 6 साल के इस समय में रिलीज हुई इन दोनों फिल्मों की कहानियां ऊपर-ऊपर से अलग लगती हैं, लेकिन उनकी स्पिरिट और स्ट्रक्चर एक जैसा था. शाहरुख खान ने ‘बाजीगर’ से पहले भी कुछ फिल्में की थीं, लेकिन इस फिल्म में उनके एंटी-हीरो वाले रोल ने उन्हें मेनस्ट्रीम सिनेमा के सबसे अनोखे और सबसे बड़े सुपरस्टार में से एक बना दिया. लोगों को उनके नेगेटिव रोल भी पसंद आने लगे थे. 1995 में ‘बरसात’ से डेब्यू करने के बाद, बॉबी देओल एक बड़ी ब्लॉकबस्टर की तलाश में थे जो उन्हें A-लिस्टर्स की लिस्ट में पहुंचा दे. 1998 की ‘सोल्जर’ ने उन्हें ‘बॉलीवुड का सोल्जर’ का टैग दिलाया और वे देश के नए सुपरस्टार बनकर उभरे.

दोनों फिल्मों में सबसे बड़ी समानता उनकी अंदरूनी कहानी थी, जो पूरी तरह से ‘बदले की आग’ पर आधारित थी. फिल्म ‘बाजीगर’ में मदन चोपड़ा (दलीप ताहिल) अजय शर्मा (शाहरुख खान) के पिता को फंसाता है और उनका पूरा बिजनेस अपने हाथ में ले लेता है, जिससे अजय की मां का दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है और उनकी बहन की मौत हो जाती है. अजय अपनी मां की बेइज्जती और अपने परिवार की बर्बादी का बदला लेने के लिए मैदान में उतरता है.

वहीं, ‘सोल्जर’ की कहानी एक जैसी थी. विलेन (सुरेश ओबेरॉय, दलीप ताहिल, शरत सक्सेना) राजू (बॉबी देओल) के पिता, मेजर विजय मल्होत्रा (पंकज धीर) पर देशद्रोह का झूठा आरोप लगाते हैं और उन्हें मार देते हैं, जिससे उसकी मां को पागलपन की जिंदगी जीने पर मजबूर होना पड़ता है. राजू अपनी मां की खोई हुई इज्जत वापस दिलाने और अपने पिता के सिर से देशद्रोह का कलंक मिटाने निकल पड़ता है.
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दोनों फिल्मों में लीड एक्टर्स ने विलेन की बेटियों या उनके करीबी लोगों से प्यार का नाटक किया, जबकि उन्हें बर्बाद करने के लिए अपनी असली पहचान छिपाई. मदन चोपड़ा से बदला लेने के लिए, अजय शर्मा भेष बदलकर उनकी बड़ी बेटी, सीमा (शिल्पा शेट्टी) को फंसाता है और फिर उसका मर्डर कर देता है. बाद में, वह विक्की मल्होत्रा बन जाता है और उनकी दूसरी बेटी, प्रिया (काजोल) के करीब हो जाता है.

‘सोल्जर’ में राजू अपनी असली पहचान छिपाता है और विलेन वीरेंद्र सिन्हा की बेटी प्रीति (प्रीति जिंटा) से प्यार का नाटक करता है, उसे अपने दुश्मनों के करीब जाने के लिए अपने जाल में फंसाता है. दोनों फिल्मों में हीरोइनों को पता नहीं होता कि जिस आदमी से वे प्यार करती हैं, वह उनके ही परिवारों को बर्बाद करने पर तुला है.

एक और दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह थी कि दोनों फिल्मों में मेन विलेन और मां की लाचारी एक जैसी थी. ‘बाजीगर’ में दलीप ताहिल ने शाहरुख खान के पिता पर जो जुल्म किए थे, वे लगभग वैसे ही थे जैसे दलीप ताहिल ने ‘सोल्जर’ में बॉबी देओल के पिता पर दूसरे विलेन के साथ किए थे. इसके अलावा, दोनों फिल्मों में हीरो की मां (राखी और फरीदा जलाल) अपने पतियों के अलग होने और सदमे में अपना होश खो देती हैं और उन्हें क्लाइमेक्स में ही इंसाफ मिलता है जब उनके बेटे बदला लेते हैं.

सिर्फ कहानियां ही नहीं, इन दोनों फिल्मों का म्यूजिक भी अपने समय में कल्ट हिट साबित हुआ. अनु मलिक के म्यूजिक ने ‘बाजीगर ओ बाजीगर’ और ‘ये काली काली आंखें’ जैसे अमर गानों को जन्म दिया. वहीं, अनु मलिक ने ‘सोल्जर’ के लिए भी म्यूजिक बनाया. ‘सोल्जर सोल्जर मीठी बातें बोलकर’ और ‘मेरे दिल जिगर से’ जैसे गानों ने उस समय म्यूजिक इंडस्ट्री के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए.

