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Lata Mangeshkar Mohammed Rafi Evergreen Hit Song: 60 साल पहले लता मंगेशकर-मोहम्मद रफी का विवाद चरम पर था. दोनों दिग्गजों ने साथ गाने से इनकार कर दिया था. तब शंकर जयकिशन ने महान गीतकार शैलेंद्र के लिखे एक नायाब गीत को कंपोज किया, जिसे वह इनके सिवा किसी और से नहीं गवाना चाहते थे. वे मानते थे कि अगर इसे किसी और ने गया तो यह बर्बाद हो जाएगा. आखिरकार, शंकर जयकिशन ने इस समस्या का तोड़ निकाल ही लिया. राजेंद्र कुमार-सायरा बानो पर फिल्माए इस रोमांटिक गाने को रफी-लता ने एक-दूसरे का मुंह देखे बगैर रिकॉर्ड किया था.

नई दिल्ली: संगीत की दुनिया में लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी का नाम बड़े अदब से लिया जाता है. वे उस गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल हैं, जिसकी छांव में हिंदी सिनेमा खूब फला-फूला. दोनों दिग्गजों ने साथ में कई यादगार हिंदी गाने गाए थे. मगर ऐसा भी वक्त आया जब दोनों के बीच मनमुटाव हो गया. उन्होंने साथ गाने से इनकार कर दिया. काफी मनाने के बाद वे फिल्म ‘आई मिलन की बेला’ का एक रोमांटिक गाना गाने को तैयार हुए, लेकिन रिकॉर्डिंग के दौरान उन्होंने एक-दूसरे का मुंह नहीं देखा. गाना जब बनकर तैयार हुआ, तो सुनने वालों को यकीन नहीं हुआ कि दो दिग्गजों ने इसे इतनी नाराजगी में रिकॉर्ड किया था. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

शंकर जयकिशन का कमाल था कि उन्होंने रफी-लता के आपसी मतभेद के बावजूद उनसे गाना गवा लिया, जो सुपरहिट रहा था. इसे लोग आज भी खूब गुनगुनाते हैं. 1960 के दशक में दोनों दिग्गजों के बीच विवाद चरम पर था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म ‘माया’ की शूटिंग के दौरान रफी-लता के बीच रॉयल्टी को लेकर विवाद हो गया था.

मतभेद जब काफी बढ़ गए, तो लता मंगेशकर ने मोहम्मद रफी से कहा कि मैं अब आपके साथ कोई गाना रिकॉर्ड नहीं करूंगी. इस पर मोहम्मद रफी ताव में आकर बोले कि आप ही क्यों, मैं भी आपके साथ गाना नहीं गाऊंगा. जाहिर है कि दो बड़े दिग्गजों के विवाद का तमाम संगीतकारों-फिल्म मेकर्स पर भी असर पड़ना था. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)
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कई फिल्म मेकर्स ने तब लता मंगेशकर की जगह सुमन कल्याणपुर संग मोहम्मद रफी से गाने गवाए. तब लता ने महेंद्र कपूर के साथ कई गाने रिकॉर्ड किए. लता-रफी के विवाद के चरम पर शंकर जयकिशन का एक गीत फंस गया, जिसे उन्हें इन दो दिग्गजों से गवाना था. उन्हें लगता था कि अगर उनकी जगह किसी और ने यह गाना गाया, तो उसमें वह बात नहीं होगी, जिसकी उन्हें दरकार है.

शंकर जयकिशन गाने के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते थे. आज वह तकनीक मौजूद है, जिसके जरिये डुएट गाने को सिंगर्स अलग-अलग समय में रिकॉर्ड कर सकते हैं, मगर तब ऐसा कारगर सिस्टम नहीं था. तब डुएट गाने को अलग-अलग समय पर गायकों से गवाना बड़ी मशक्कत का काम होता था. (फोटो साभार: IMDb)

शंकर-जयकिशन ने इसका तोड़ निकाला. उस वक्त थोड़ा-बहुत पैच वर्क होता था, जिसे बड़ी सूझ-बूझ के साथ करना पड़ा था. उन्होंने लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी को अलग-अलग बुलाया और यह गाना रिकॉर्ड किया. फिर इसे मिक्स करके नायाब गीत की रचना की. (फोटो साभार: IMDb)

कोई सोच भी नहीं सकता कि फिल्म ‘आए मिलन की बेला’ का रोमांटिक गाना ‘ऐ सनम तेरे हो गए हम’ लता मंगेशकर-मोहम्मद रफी ने एक-दूसरे का मुंह देखे बगैर रिकॉर्ड किया था. यह रफी-लता का आखिरी गीत था, जिसे उन्होंने विवाद के बाद रिकॉर्ड किया था. कहते हैं कि उन्होंने 3-4 साल तक साथ में कोई गाना रिकॉर्ड नहीं किया. (फोटो साभार: IMDb)

राजेंद्र कुमार-सायरा बानो पर फिल्माए गाने ‘ऐ सनम तेरे हो गए हम’ को महान गीतकार शैलेंद्र ने लिखा था. यह गाना सुनने के बाद यकीन करना मुश्किल है कि इसे लता-रफी ने नाराजगी में अलग-अलग रिकॉर्ड किया था.

