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एक्टर बचपन में मुंबई के ओपन थियेटर में छिपकर नाटक देखते थे. एक्टर के जुनून को देखकर थियेटर वालों ने उन्हें छोटे रोल देना शुरू किया. बड़े हुए तो बैंक में नौकरी लगी, पर आखिर में अभिनय को चुना. साल 1984 में आई ‘होली’ फिल्म से शुरुआत की. 80 और 90 के दशक में 100 से ज्यादा फिल्मों में कड़क विलेन बनकर छाए रहे. फिर, साल 2000 में आई एक फिल्म ने उन्हें कॉमेडी का आइकॉन बना दिया.

नई दिल्ली: बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर ने अपनी गजब की एक्टिंग, लाजवाब कॉमिक टाइमिंग और कड़क सीरियस किरदारों से करोड़ों दिलों में अपनी जगह बनाई है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जो आज अपनी फिल्मों की करोड़ों की टिकटें बिकवाते हैं, बचपन में वो खुद बिना टिकट के थिएटर में घुस जाया करते थे. उनकी दीवानगी ऐसी थी कि लोग उन्हें पकड़कर बाहर निकाल देते थे, पर वो फिर से नाटक देखने पहुंच जाते थे. (फोटो साभार: IMDb)

परेश रावल का जन्म 30 मई 1955 को मुंबई के एक गुजराती परिवार में हुआ था. उनका बचपन मुंबई के पार्ले ईस्ट इलाके में बीता, जहां पास में ही एक ओपन थिएटर ग्राउंड था. यहीं से उनके दिल में एक्टिंग का कीड़ा काटा. बचपन में वो पढ़ाई के साथ-साथ नंबर वन के शरारती थे, लेकिन उनका असली प्यार सिर्फ और सिर्फ नाटक था. 9 साल की उम्र में वो थिएटर के अंदर चोरी-छिपे घुसने के लिए मशहूर हो चुके थे. (फोटो साभार: IMDb)

जब वो बार-बार बिना टिकट पकड़े गए, तो थिएटर के स्टाफ ने उनके इस गजब के जुनून को भांप लिया. उन्होंने परेश को न सिर्फ नाटक देखने की छूट दी, बल्कि धीरे-धीरे उन्हें स्टेज पर छोटे-मोटे रोल भी मिलने लगे. बस, यही से परेश रावल के शानदार करियर की पहली सीढ़ी तैयार हुई और उन्होंने ठान लिया कि उन्हें जिंदगी में आगे चलकर एक्टर ही बनना है.
(फोटो साभार: IMDb)
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शुरुआती दिनों में परेश रावल ने ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ में एक सरकारी नौकरी भी पकड़ी थी. लेकिन उनका दिल तो एक्टिंग में बसा था, इसलिए बैंक की फाइलों में उनका मन नहीं लगा. उन्होंने कुछ ही दिनों में उस सुरक्षित नौकरी को लात मार दी और पूरी तरह से थिएटर और फिल्मों की दुनिया में कूद पड़े, जिसके बाद उनका एक नया सफर शुरू हुआ. (फोटो साभार: IMDb)

परेश ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1984 में आई फिल्म ‘होली’ से की थी. इसके बाद ‘अर्जुन’ जैसी फिल्मों में छोटे रोल करने के बाद उन्हें असली पहचान 1986 की सुपरहिट फिल्म ‘नाम’ से मिली. 80 और 90 के दशक में उन्होंने विलेन के किरदारों से पर्दे पर खौफ पैदा कर दिया. ‘राम लखन’, ‘मोहरा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘दामिनी’ जैसी 100 से ज्यादा फिल्मों में वे कड़क खलनायक बने. (फोटो साभार: IMDb)

विलेन के तौर पर नाम कमाने के बाद परेश रावल ने कॉमेडी की तरफ रुख किया. साल 2000 में आई फिल्म ‘हेरा फेरी’ ने उनके करियर का पासा ही पलट दिया. इस फिल्म में उनका निभाया ‘बाबूराव गणपतराव आप्टे’ (बाबू भैया) का किरदार इतना जबरदस्त हिट हुआ कि आज भी मीम्स की दुनिया और भारतीय कॉमेडी सिनेमा में उनके इस चेहरे को कोई भूल नहीं पाया है.
(फोटो साभार: IMDb)

‘हंगामा’, ‘भूल भुलैया’, ‘वेलकम’ और ‘ओह माय गॉड’ जैसी फिल्मों से परेश ने साबित कर दिया कि वो हर रोल में फिट बैठते हैं. उनके इस हुनर के लिए उन्हें दो बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड और भारत सरकार की तरफ से ‘पद्मश्री’ भी मिला. अगर उनकी पर्सनल लाइफ की बात करें, तो उन्होंने मिस इंडिया रह चुकीं खूबसूरत एक्ट्रेस स्वरूप संपत से शादी की, जिनसे उनका प्यार कॉलेज के दिनों में शुरू हुआ था.
(फोटो साभार: IMDb)

परेश रावल सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहे, उन्होंने राजनीति में भी हाथ आजमाया और साल 2014 में अहमदाबाद पूर्व से सांसद (MP) चुने गए. इसके साथ ही, एक्टिंग की दुनिया में उनके बड़े कद को देखते हुए उन्हें ‘नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा’ का हेड भी बनाया गया.

