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90 के दशक में एक ऐसी फिल्म आई थी, जिसने रिलीज के वक्त बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं किया, लेकिन सालों बाद वही फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत और इमोशनल फिल्मों में गिनी जाने लगी. इस फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती थी, जहां प्यार था, दर्द था और खामोशी के बीच छिपी भावनाएं थीं. माधुरी-काजोल ने फिल्म को रिजेक्ट किया और फिर नई हसीना ने खुद संजय लीला भंसाली से फिल्म मांग डाली.

नई दिल्ली. संजय लीला भंसाली आज हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा निर्देशकों में गिने जाते हैं, जिनकी पहचान उनकी भव्यता, संगीत और स्थापत्य कला से होती है. हम दिल दे चुके सनम से लेकर देवदास, बाजीराव मस्तानी और गंगूबाई काठियावाड़ी तक, उन्होंने कई यादगार फिल्में बनाईं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि संजय लीला भंसाली की एक ऐसी फिल्म भी थी, जिसे रिलीज के वक्त दर्शकों ने खास पसंद नहीं किया. दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म को पहले माधुरी दीक्षित और काजोल जैसी बड़ी अभिनेत्रियों ने ठुकरा दिया था. इसके बाद एक नई हसीना को मौका मिला और वही फिल्म आगे चलकर हिंदी सिनेमा की कल्ट क्लासिक बन गई.

1996 का वह दशक था, जब एक युवा निर्देशक ने अपने ‘ख्वाबों की पहली फिल्म’ का जादू बिखेरने की कोशिश की. उनकी पहली पसंद थीं ‘डांस की रानी’ माधुरी दीक्षित और ‘बाजीगर’ की तेज-तर्रार काजोल. लेकिन दोनों ने इस प्रोजेक्ट को ठुकरा दिया. ये कहानी है संजय लीला भंसाली की पहली निर्देशित फिल्म खामोशी: द म्यूजिकल की. आज हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्मों में गिनी जाती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि रिलीज के समय यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी.

1996 में रिलीज हुई इस फिल्म में सलमान खान, नाना पाटेकर और सीमा बिस्वास मुख्य किरदार में नजर आए थे. वहीं फिल्म की लीड हीरोइन थीं मनीषा कोइराला. एक इंटरव्यू में मनीषा कोइराला ने खुलासा किया था कि भंसाली पहले यह फिल्म माधुरी दीक्षित और काजोल को ऑफर कर चुके थे. काजोल ने जनवरी 1995 में साइन भी कर लिया था, लेकिन बाद में छोड़ दिया. इसके बाद यह रोल मनीषा को मिला.
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मनीषा ने बताया था कि फिल्म की स्क्रिप्ट सुनते ही वह भावुक हो गई थीं और उन्हें महसूस हुआ कि यह कहानी बेहद खास है. बाद में यही फिल्म उनके करियर की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल हो गई.

‘खामोशी’ की कहानी एनी नाम की लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके माता-पिता बोल और सुन नहीं सकते. एनी बचपन से ही अपने परिवार और बाहरी दुनिया के बीच एक पुल बनकर रहती है. फिल्म में दिखाया गया कि कैसे एनी संगीत से प्यार करती है, लेकिन उसके पिता को उसका गाना पसंद नहीं होता. बाद में उसकी जिंदगी में प्यार आता है, सपने आते हैं और परिवार के साथ भावनात्मक टकराव भी शुरू होता है. फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी इमोशनल गहराई और रिश्तों की संवेदनशील प्रस्तुति मानी गई. खासतौर पर नाना पाटेकर की एक्टिंग को काफी सराहा गया.

फिल्म का संगीत जतिन-ललित ने दिया था और इसके गाने आज भी बेहद लोकप्रिय हैं. ‘आज मैं ऊपर’, ‘बाहों के दरमियान’, ‘ये दिल सुन रहा है’ और ‘आंखों में क्या’
जैसे गानों ने फिल्म को म्यूजिक लवर्स के बीच खास पहचान दिलाया. खासकर ‘बाहों के दरमियां’ और ‘आज मैं ऊपर’ आज भी 90s के सबसे रोमांटिक गानों में गिने जाते हैं.

‘खामोशी’ बॉक्स ऑफिस पर औसत से नीचे प्रदर्शन कर पाई थी. उस दौर में दर्शक मसाला और एक्शन फिल्मों को ज्यादा पसंद कर रहे थे, जबकि ‘खामोशी’ एक इमोशनल और म्यूजिकल ड्रामा थी. फिल्म की धीमी रफ्तार और गंभीर विषय भी इसकी कमाई पर असर डाल गए. हालांकि क्रिटिक्स ने फिल्म की कहानी, निर्देशन और अभिनय की खूब तारीफ की थी. समय के साथ टीवी और म्यूजिक चैनलों पर फिल्म के गाने बेहद लोकप्रिय हुए और धीरे-धीरे ‘खामोशी’ को कल्ट क्लासिक का दर्जा मिल गया.

भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन इसने संजय लीला भंसाली को इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाई. फिल्म में उनकी विजुअल स्टाइल, भावनाओं को दिखाने का तरीका और म्यूजिक के इस्तेमाल ने लोगों का ध्यान खींचा. बाद में संजय लीला भंसाली ने ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘देवदास’ और ‘ब्लैक’ जैसी कई यादगार फिल्में बनाईं. लेकिन ‘खामोशी’ आज भी उनके करियर की सबसे संवेदनशील फिल्मों में गिनी जाती है.

