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Bollywood Blockbuster Movies : बॉलीवुड की कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों के किस्से हैरान करने वाले हैं. कई फिल्मों को बनाने के दौरान सेट पर अजीबो-गरीब स्थिति देखने को मिल जाती है. कई बार डायरेक्टर-एक्टर के बीच किसी खास को लेकर बहस भी हो जाती है. कई बार हीरोइन कोई सीन करने से इनकार कर देती है. इस तरह के किस्से हमें अक्सर पढ़ने-सुनने को मिल जाते हैं. 7 साल के अंतराल दो ऐसी ब्लॉकबस्टर फिल्में बनीं जिनकी शूटिंग पर खूब तमाशा हुआ. दो घंटे से भी ज्यादा समय तक शूटिंग बंद रही. पूरी यूनिट परेशान रही. दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुईं. ये फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं……….

ब्लॉकबस्टर फिल्मों की कहानी, उसके निर्माण के दौरान होने वाले वाकिये भी उतने ही दिलचस्प होते हैं. कई बार तो डायरेक्टर के फैसले पर नाखुशी यूनिट ही जाहिर देती है. कई बार सेट पर हीरोइन-हीरो के बीच मनमुटाव हो जाता है. बड़े सितारों के बीच तो ईगो की लड़ाई भी अक्सर देखने को मिल जाती है. 7 साल के अंतराल में दो ऐसी फिल्में बनीं जिनकी शूटिंग पूरे दो घंटे रुकी. एक फिल्म में तो गाने की शूटिंग के दौरान हीरोइन इतनी थक गई थी कि बेहोश हो गई. एक फिल्म में एक खास सीन पर पूरी यूनिट नाखुश थी. दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही फिल्में जब रिलीज हुईं तो बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया. ये फिल्में थीं : मोहरा और गदर : एक प्रेम कथा. आइये जानते हैं इन दोनों फिल्में से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स…

‘मोहरा’ और ‘गदर : एक प्रेम कथा’ हिंदी सिनेमा की दो ऐसी फिल्में हैं जो आज भी अगर टीवी पर आ रही हों तो नजरें हटाना मुश्किल हो जाता है. मोहरा जहां एक्शन क्राइम थ्रिलर फिल्म थी, वहीं, एपिक पीरियड एक्शन ड्रामा फिल्म थी. मोहरा का निर्देशन राजीव राय ने किया था तो ‘गदर’ के डायरेक्टर अनिल शर्मा थे. मोहरा 1994 में रिलीज हुई थी जबकि ‘गदर’ 2001 में सिनेमाघरों में आई थी. दोनों ही फिल्मों का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था. हर गाना सुपरहिट था.

सबसे पहले बात करते हैं 1 जुलाई 1994 में रिलीज हुई अक्षय कुमार-सुनील शेट्टी और रवीना टंडन स्टारर फिल्म ‘मोहरा’ की. राजीव राय फिल्म के डायरेक्टर थे. उनके पिता गुलशन राय प्रोड्यूसर थे. राजीव राय ने ‘त्रिदेव’ और ‘विश्वात्मा’ जैसी फिल्में बनाई हैं. अक्षय कुमार को इस फिल्म में कास्ट किए जाने का किस्सा भी दिलचस्प है. राजीव राय की अक्षय से मुलाकात ‘वक्त हमारा है (1993) के सेट पर हुई थी. अक्षय कुमार-सुनील शेट्टी के फाइट सीक्वेंस देखकर ही राजीव राय ने दोनों की अपनी अगली फिल्म ‘मोहरा’ में साइन कर लिया.
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वैसे ‘मोहरा’ फिल्म का मूल आइडिया राइटर शब्बीर बॉक्सवाला को जिम में आया था. उन्होंने डायरेक्टर राजीव राय को जिम में एक ऐसे व्यक्ति की कहानी सुनाई थी जो अंधे होने का नाटक करता है. अपने रास्ते के गुंडों को साफ करने के लिए एक कैदी को मोहरा बनाता है. फिल्म की स्टोरी हॉलीवुड मूवी ‘डेथ विश 4 : द क्रैकडाउन (1987) से हूबहू मिलती है. मोहरा का म्यूजिक विजु शाह ने कंपोज किया था. विजु शाह 70-80 के दशक के मशहूर संगीतकार कल्याणजी विरजी शाह के बेटे हैं. कल्याणजी-आनंदजी रिश्ते में सगे भाई थे.

‘मोहरा’ फिल्म के दो गाने गीतकार इंदीवर ने तो दो गाने गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे. गजल गायक पंकज उदास ने ‘मोहरा’ का पॉप्युलर गाना ‘न कजरे की धार’ गाया था. गाना सुनील शेट्टी-पूनम झावर फिल्माया गया था. वैसे यह गाना कल्याणजी-आनन्दजी की जोड़ी ने तैयार किया था. मुकेश की आवाज में रिकॉर्ड भी हुआ था. मुकेश की आवाज में यह गाना यूट्यूब पर उपलब्ध है. फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त’ को उदित नारायण-कविता कृष्णामूर्ति ने बहुत ही खूबसूरत अंदाज में गाया था.

‘तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त’ गाना पूरे छह दिन में लिखा गया था. इस गाने की शूटिंग के दौरान रवीना टंडन थककर चूर-चूर हो गई थीं. वो इतनी थक गई थीं कि सेट पर बेहोश हो गई थी. ऐसे में पूरे दो घंटे शूटिंग रुकी रही थी. रवीना टंडन को यह फिल्म दिव्या भारती के निधन के बाद मिली थी. ‘तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त’ गाने ने रवीना को अमर पहचान दी. करीब 4 करोड़ रुपये के बजट में बनी मोहरा फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 23 करोड़ की कमाई की थी. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.

अब बात करते हैं जून 2001 में सिनेमाघरों में आई सनी देओल-अमीषा पटेल की फिल्म ‘गदर : एक प्रेमकथा की जिसने सही मायने में गदर मचा दी थी. फिल्म में क्रॉस बॉर्डर लव स्टोरी दिखाई गई थी. फिल्म के ‘हैंडपंप वाले सीन’ ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी. यह सीन हिंदी सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया. दर्शकों के दिल में हमेशा के लिए बस गया. जब ही यह सीन स्क्रीन पर आता था थिएटर्स में ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगते थे. सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस सीन का पूरी यूनिट ने विरोध किया था. पूरे दो घंटे फिल्म की शूटिंग रुकी रही थी. ‘गदर’ फिल्म के डायरेक्टर अनिल शर्मा ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था.

अनिल शर्मा ने बताया था, ‘गदर के हैंडपंप वाले सीन पर सबको ऐतराज था. दो-तीन घंटे शूटिंग रुकी रही थी. सब इस सीन को अतार्किक बता रहे थे. मैंने उन्हें समझाते हुए कहा कि ‘हीरो पाकिस्तान जिंदाबाद बोल रहा है, इस्लाम कबूल करने के लिए उसे कहा जा रहा है, उससे हिंदुस्तान मुर्दाबाद बोलने के लिए कहा जा रहा है, मुझे ऐसा गुस्सा आ रहा है कि बिल्डिंग ही उखाड़ दूं. रामायण का उदाहरण दिया. हनुमान जी ने भी इमोशन में पहाड़ उखाड़ दिया था. तारा सिंह हनुमान जी तो नहीं हो सकता लेकिन इमोशन में हैंडपंप तो उखाड़ सकता है? मैं अड़ गया. यही सीन टर्निंग प्वॉइंट बन गया. कई बार रचनात्मक असहमतियां हो जाती हैं.’

‘गदर’ का म्यूजिक संगीतकार उत्तम सिंह ने कंपोज किया था. आनंद बख्शी गीतकार थे. फिल्म की स्क्रिप्ट सुनकर आनंद बख्शी रो पड़े थे. उन्होंने ‘उड़ जा काले कावां’ के 16 मुखड़े लिखे थे. उन्होंने स्क्रिप्ट सुनकर डायरेक्टर अनिल शर्मा से कहा था कि फिल्म नए जमाने की मुगल-ए-आजम साबित होगी. हुआ भी कुछ ऐसा ही. फिल्म के दो सुपरहिट गाने ‘मैं निकला ओ गड्डी लेके’ और ‘उड़ जा काले कावां’ को उदित नारायण ने गाया था. उदित नारायण ने अपनी खनकती आवाज में दोनों गानों को अमर कर दिया. ‘उड़ जा काले कावां’ गाना फिल्म में कई बार रिपीट होता है. यह गाना खुशी-गम, जुदाई हर तरह के सीन को बखूबी दिखाता है. करीब 20 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘गदर’ फिल्म ने 133 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी.

