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बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान ने खुलासा किया है कि फिल्म रेस में मेकर्स उन्हें अक्षय खन्ना वाला रोल देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने बड़े भाई का जिम्मेदार किरदार चुनकर सबको चौंका दिया था. सैफ ने बताया कि ‘ओमकारा’ और ‘कर्तव्य’ जैसी फिल्में उनके पास आसानी से नहीं आतीं. उन्हें ‘परिणीता’ और ‘एक हसीना थी’ जैसी फिल्मों के लिए भी मेकर्स को काफी मनाना पड़ा था ताकि वह अपनी रोमांटिक-कॉमेडी और चॉकलेट बॉय वाली इमेज को तोड़कर कुछ अलग कर सकें.

नई दिल्ली. बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान की नई फिल्म कर्तव्य नेटफ्लिक्स पर दस्तक दे चुकी है. इस समय उनकी यह मूवी खूब सुर्खियां बटोर रही है. इस फिल्म में सैफ ने एक ऐसे पुलिसवाले का किरदार निभाया है जो हरियाणवी लहजे में बात करता है. सैफ का यह अंदाज देखकर दर्शकों को उनके आइकॉनिक किरदार लंगड़ा त्यागी की याद आ गई.

बड़े पर्दे पर अक्सर बड़े शहरों के मॉडर्न लड़के का रोल निभाने वाले सैफ अली खान ने ‘ओमकारा’ में अपनी देसी और रफ-टफ बोली-भाषा से सबको हैरान कर दिया था. अब न्यूज18 इंग्लिश से खास बातचीत में सैफ अली खान ने खुलासा किया है कि ‘ओमकारा’ और ‘कर्तव्य’ जैसी फिल्में उनके पास आसानी से नहीं आतीं. सैफ ने यह भी खुलासा किया कि रेस मूवी में उन्हें सबसे पहले अक्षय खन्ना वाला रोल ऑफर हुआ था.

सैफ ने बताया, ‘मुझे फिल्ममेकर्स को यह भरोसा दिलाने के लिए कई बार काफी पापड़ बेलने पड़े और खुद को साबित करना पड़ा कि मैं सिर्फ बड़े शहरों के मॉडर्न और चिकने-चुपड़े लड़के के रोल तक ही सीमित नहीं हूं, बल्कि इस तरह के देसी और कड़क किरदार भी निभा सकता हूं.’
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उन्होंने बताया कि फिल्म परिणीता में शेखर का रोल पाना भी उनके लिए कोई बच्चों का खेल नहीं था. असल में, फिल्म के प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा के दिमाग में इस रोल के लिए कोई दूसरा ही एक्टर चल रहा था. सैफ ने बताया, ‘यह काफी लंबी कहानी है, चोपड़ा साहब वैसे तो नए टैलेंट को बढ़ावा देने वाले बेहद कमाल के इंसान हैं. जब वह परिणीता फिल्म बना रहे थे, तब हमारी इस रोल को लेकर बात हुई.’

एक्टर ने आगे कहा, ‘उन्होंने मुझसे साफ कह दिया था कि वह शेखर के रोल के लिए किसी और को कास्ट करना चाहते हैं. उनका मानना था कि उस एक्टर का करियर वैसा नहीं चल पाया जैसी उम्मीद थी, इसलिए उसके चेहरे पर एक दर्द और अधूरापन है, जो मेरे चेहरे पर नजर नहीं आता.’

सैफ के मुताबिक, प्रोड्यूसर का सोचने का यह नजरिया उन्हें कुछ ठीक नहीं लगा. हालांकि, वह बेहद खुश हैं कि आखिरकार प्रदीप सरकार के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में उन्हें ही साइन किया गया. सैफ ने बताया, ‘मैंने चोपड़ा साहब से सीधे कह दिया कि सर, भला किसी रोल को पाने के लिए करियर का फ्लॉप होना कब से जरूरी शर्त बन गया? इस बात पर हमारे बीच थोड़ी हंसी-मजाक भी हुई. दरअसल, उन्हें लगता था कि मेरी इमेज सिर्फ रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों वाले चॉकलेट बॉय की है. लेकिन मैंने हार नहीं मानी, उनसे इस बारे में लंबी बात की और उन्हें इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह मुझे शेखर के किरदार के लिए कम से कम एक मौका जरूर दें.’

एक्टर ने बताया कि ‘परिणीता’ के अलावा दो और ऐसी बड़ी फिल्में थीं, जिनके किरदारों को हासिल करने के लिए उन्हें मेकर्स को काफी समझाना-बुझाना पड़ा था. उन्होंने याद करते हुए कहा, ‘फिल्म एक हसीना थी में मैंने जो रोल निभाया था, उसे पाने के लिए भी मुझे मेकर्स को काफी मनाना पड़ा था. यहां तक कि सुपरहिट फिल्म रेस में भी मेकर्स चाहते थे कि मैं अक्षय खन्ना वाला रोल करूं. वह किरदार वाकई बेहद शानदार था, लेकिन मैंने उनसे साफ कह दिया था कि मैं बड़े भाई का रोल निभाना चाहता हूं, जो थोड़ा शांत और जिम्मेदार स्वभाव का हो.’

सैफ आगे बताते हैं, ‘उस दौर में मेरी रोमांटिक-कॉमेडी और हल्के-फुल्के अंदाज वाली फिल्में काफी सफल हो रही थीं. यही वजह थी कि मेकर्स को मुझे किसी सीरियस या डार्क रोल में कास्ट करने के लिए थोड़ा जोखिम उठाना पड़ रहा था. हालांकि, ‘ओमकारा’ का उनका आइकॉनिक किरदार लंगड़ा त्यागी इस लिस्ट में शामिल नहीं है. सैफ का मानना है कि यह रोल पूरी तरह से डायरेक्टर विशाल भारद्वाज का विजन था. सैफ ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई डायरेक्टर उनके पास एक ऐसा किरदार लेकर आएगा, जो उनकी चमक-धमक और चॉकलेट बॉय वाली इमेज से कोसों दूर और एकदम अलग हो.

सैफ अली खान ने आगे कहा, ‘ओमकारा में मुझे लंगड़ा त्यागी बनाने का पूरा फैसला विशाल जी (विशाल भारद्वाज) का था. मैं खुद कभी उनके पास इस रोल को मांगने नहीं जाता, क्योंकि मेरा दिमाग कभी उस तरफ चलता ही नहीं. मैंने खुद कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कोई किरदार निभा सकता हूं. यह पूरी तरह उनका विजन था कि उन्होंने मुझे इस रोल में देखा. सच कहूं तो, ऐसे गंभीर, शांत और कूल किस्म के किरदार मेकर्स आमतौर पर मेरे पास लेकर नहीं आते हैं, इसके लिए मुझे खुद ही हाथ-पैर मारने पड़ते हैं.’

