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बॉलीवुड के दो सुपर स्टार राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन ने ‘आनंद’ और ‘नमक हराम’ जैसी फिल्मों में साथ में काम किया है. उस समय इंडस्ट्री में राजेश खन्ना की तूती बोलती थी. फिर 1973 में ‘जंजीर’ से अमिताभ बच्चन रातोंरात सुपर स्टार बनकर उभरे. पूरे 15 साल इंडस्ट्री में एकतरफा राज किया. 80 के दशक में एक समय ऐसा भी आया जब राजेश खन्ना की फिल्म का मुहुर्त शॉट देने अमिताभ बच्चन पहुंचे थे. इस फिल्म के गाने ब्लॉकबस्टर साबित हुए. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं…….

डायरेक्टर सुल्तान अहमद को बड़ी स्टार कास्ट के साथ फिल्में बनाने का शौक था. 80 के दशक में उन्होंने एक ऐसी मल्टी स्टारर फिल्म बनाई जिसका मुहुर्त क्लैप अमिताभ बच्चन ने दिया था. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में राजेश खन्ना ने अमिताभ बच्चन को रिप्लेस किया था लेकिन मुहूर्त शॉट अमिताभ के हाथों ही कराया गया था. यह फिल्म थी धरम-कांटा जो कि 1982 में रिलीज हुई थी. फिल्म के गाने खूब पॉप्युलर हुए थे. ‘ए गोटेदार लहंगा’ गाना आज भी उतनी ही मकबूल है.

धरम कांटा में राज कुमार, वहीदा रहमान, जीतेंद्र, राजेश खन्ना, रीना रॉय और सुलक्षणा पंडित ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. यह एक एक्शन फिल्म थी. डाकुओं की कहानी थी. अमजद खान डबल रोल में थे. पहले पिता का फिर बेटे का रोल किया. पहले प्राण साहब को साइन किया गया था लेकिन बाद में सुल्तान अहमद को लगा कि अगर इस रोल को राज कुमार साहब करेंगे तो फिल्म का कैनवास बड़ लगेगा. फिल्म की प्राइस भी अच्छी मिलेगी. राज कुमार ने उस भूमिका को हीरो के अंदाज में निभाकर चार चांद लगा दिए.

फिल्म का यादगार म्यूजिक नौशाद ने कंपोज किया था. गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी थे. फिल्म में कुल 5 गाने थे. ये गाने थे : तेरी मेरी है नजर कातिल की, घुंघरू टूट गए, ये गोटेदार लहंगा निकलूं जब डाल के, तेरा नाम लिया दिल थाम लिया और दुनिया छूटे यार ना छूटे. इन गानों में आशा भोसले, मोहम्मद रफी और भूपिंदर सिंह की आवाजें थीं. सुपरहिट गाना ‘ये गोटेदार लहंगा निकलूं जब डाल के’ आशा भोसले ने गाया था.
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डायरेक्टर सुल्तान अहमद ने 1978 में ‘गंगा की सौगंध’ बनाई थी जिसमें अमिताभ-रेखा की जोड़ी थी. सुल्तान ने अपनी अगली फिल्म अमिताभ के साथ प्लान की लेकिन अमिताभ बच्चन को जब पता चला कि सुल्तान अहमद ने राजेश खन्ना से संपर्क किया है वो बहुत नाराज हुए.

उधर, सुल्तान अहमद ने इसकी बिल्कुल अलग कहानी सुनाई थी. उनका कहना था कि अमिताभ चाहते थे कि यह फिल्म सलीम-जावेद से लिखवाऊं. वो मेरे राइटर बीबी भल्ला से खुश नहीं थे. कश्मीर को कहानी सुनाने के लिए श्रीनगर भी गए थे. पूरे दो दिन टरकाते रहे और कहानी नहीं सुनी.

‘धर्मकांटा’ का मुहूर्त अगस्त 1978 में हुआ था. मुहुर्त शॉट राजेश खन्ना पर होना था. डायरेक्टर ने तय किया कि मुहूर्त क्लैप अमिताभ बच्चन देंगे. बताया जाता है कि राजेश खन्ना सेट पर बार-बार फोन करके पूछ रहे थे कि अमिताभ आए हैं या नहीं. वो अमिताभ के बाद ही फिल्म के सेट पर आना चाहते थे. दूसरी तरफ अमिताभ भी लगातार फोन कर काका के आने की बात पूछ रहे थे. मजेदार बात यह है कि अमिताभ जब सेट पर आए, ठीक उसी समय काका भी आए. इस तरह से फिल्म का मुहूर्त सीन शूट किया गया.

डायरेक्टर सुल्तान अहमद ‘मुगल-ए-आजम’ के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर के. आसिफ के असिस्टेंट रहे थे. उन्होंने ‘धरम कांटा’ में के. आसिफ की बेटी हिना कौसर को भी एक रोल दिया था. फिल्म के शुरुआती 35 मिनट तक राज कुमार ही छाए रहे. फिल्म के एक सीन में राजकुमार को हीरो का हार पकड़ना था. उन्हें नकली हीरों का हार पकड़ाया गया तो नाराज हो गए और बोले कि हम नकली चीजों को हाथ नहीं लगाते. फिर उनके लिए असली हीरों का हार मंगवाया गया.

धरम कांटा के असली किरदार राज कुमार-वहीदा रहमान थे. दोनों के रोल बहुत ही पावरफुल थे. जब भी राज कुमार पर्दे पर आए, छा गए. इस फिल्म में एक भी गाना लता मंगेशकर ने नहीं गाया था. उन दिनों लता मंगेशकर और संगीतकार नौशाद में अनबन थी. फिल्म को 90 फीसदी ओपनिंग मिली थी. छोटे शहरों में फिल्म खूब चली थी. रिपीट रन में फिल्म ने अच्छा बिजनेस किया. धरम कांटा का बजट करीब पौने दो करोड़ रुपये था. नेट कलेक्शन 3 करोड़ था. मूवी बॉक्स ऑफिस पर करीब-करीब हिट थी.

