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फिल्ममेकर्स ने एक ही ‘टैग’ का इस्तेमाल करके 8 फिल्में बनाईं. उन सभी के सेंटर में अक्षय कुमार थे. हैरानी की बात है कि जहां बॉलीवुड में सीक्वल का मैथ अक्सर फेल हो जाता है, वहीं इस जादुई फॉर्मूले ‘खिलाड़ी’ ने 8 में से 7 बार बॉक्स ऑफिस पर कब्जा कर लिया. सिर्फ एक फिल्म को छोड़कर, बाकी 7 फिल्मों ने अक्षय कुमार को उस जगह पहुंचा दिया जहां उन्हें अब ‘बॉलीवुड का सबसे बड़ा खिलाड़ी’ कहा जाता है. आइए इस सीरीज के बनने, सफल होने और एक फ्लॉप होने के पीछे की दिलचस्प कहानी जानते हैं.

नई दिल्ली. अगर आप बॉलीवुड के इतिहास के पन्ने को पलटेंगे, तो आपको कई सुपरस्टार मिलेंगे जिन्होंने अपनी एक यूनिक इमेज बनाई है. लेकिन, अक्षय कुमार की ‘खिलाड़ी’ सीरीज जैसा उदाहरण मिलना नामुमकिन है. यह बॉलीवुड की सबसे लंबे समय तक चलने वाली इनफॉर्मल सीरीज है, जहां फिल्में एक-दूसरे से जुड़ी नहीं थीं, लेकिन उनके नाम एक साथ जुड़े हुए थे. इस सीरीज ने अक्षय कुमार को तब पहचान दिलाई, जब वह इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे. अक्षय कुमार ने 1991 में ‘सौगंध’ से डेब्यू किया, लेकिन उन्हें असली पहचान अब्बास-मस्तान की 1992 की फिल्म ‘खिलाड़ी’ से मिली. यह एक सस्पेंस थ्रिलर थी जिसमें कॉलेज के चार दोस्तों की कहानी थी. फिल्म का म्यूजिक और अक्षय का बेबाक स्टाइल दर्शकों को बहुत पसंद आया. मेकर्स को एहसास हुआ कि ‘खिलाड़ी’ शब्द में एक चार्म है जो युवाओं को अट्रैक्ट करता है. इससे इसी नाम से 8 फिल्मों की सीरीज शुरू हुई, जिसने अक्षय को ‘खिलाड़ी कुमार’ के नाम से पहचान दिलाई.

‘खिलाड़ी (1992)’ की सफलता के बाद, 1994 में ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ रिलीज हुई. इस फिल्म में अक्षय की जोड़ी सैफ अली खान के साथ बहुत पॉपुलर हुई. यह फिल्म बहुत बड़ी हिट रही और इसने साबित कर दिया कि अक्षय न सिर्फ एक्शन बल्कि कॉमेडी में भी माहिर हैं. उसी साल ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ रिलीज हुई, जिसने अक्षय की जबरदस्त इमेज को और पक्का कर दिया. फिर आया 1996, जब ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ थिएटर में आई. फिल्म में अक्षय कुमार का मशहूर रेसलर ‘द अंडरटेकर’ से मुकाबला दिखाया गया था. फिल्म के खतरनाक स्टंट ने अक्षय को रातोंरात नेशनल क्रश और एक्शन आइकन बना दिया. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही, जो सीरीज का सबसे मजबूत पिलर साबित हुई.

मेकर्स ने रिस्क लिया और ‘मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी (1997)’ में कॉमेडी के लिए ‘खिलाड़ी’ शब्द का इस्तेमाल किया. डेविड धवन के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म भी सुपरहिट रही. इसके बाद ‘इंटरनेशनल खिलाड़ी (1999)’ और ‘खिलाड़ी 420 (2000)’ जैसी फिल्में आईं. ‘खिलाड़ी 420’ में उड़ते हुए हवाई जहाज के ऊपर खड़े होने के अक्षय कुमार के स्टंट ने पूरी इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया. इन फिल्मों ने अक्षय को एक ऐसे लेवल पर पहुंचा दिया जहां उनका नाम ही ‘गारंटीड सक्सेस’ का दूसरा नाम बन गया. यह पूरा सिलसिला 1992 में ‘खिलाड़ी’ से शुरू हुआ, जो बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही, इसके बाद 1994 में ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ आई. सफलता का यह सिलसिला 1995 में ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ के साथ जारी रहा, जबकि 1996 में रिलीज हुई ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए ब्लॉकबस्टर बन गई.
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इसके बाद, 1997 में ‘मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी’ भी बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई. 1999 में रिलीज हुई ‘इंटरनेशनल खिलाड़ी’ देश में औसत रही, लेकिन विदेशी बाजारों में हिट रही. हालांकि 2000 में रिलीज हुई ‘खिलाड़ी 420’ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करने में सफल नहीं रही और फ्लॉप साबित हुई, लेकिन अपने जबरदस्त स्टंट की वजह से यह एक कल्ट क्लासिक बन गई. आखिर में, 12 साल के गैप के बाद 2012 में रिलीज हुई ‘खिलाड़ी 786’ ने भी दर्शकों का मनोरंजन किया और सेमी-हिट से हिट बन गई.

बॉक्स ऑफिस पर गहराई से एनालिसिस करने पर पता चलता है कि सीरीज की लगभग हर फिल्म ने प्रॉफिट कमाया है. हालांकि ‘खिलाड़ी 420’ को उस समय उम्मीद के मुताबिक बॉक्स ऑफिस सक्सेस नहीं मिली, लेकिन बाद में इसके स्टंट्स ने इसे एक कल्ट क्लासिक बना दिया. वहीं, ‘इंटरनेशनल खिलाड़ी’ को क्रिटिक्स ने ज्यादा पसंद नहीं किया, लेकिन फिल्म ने अपनी लागत वसूल कर ली. असल में, सीरीज की रेप्युटेशन इतनी मजबूत थी कि जब 12 साल के गैप के बाद 2012 में ‘खिलाड़ी 786’ रिलीज हुई, तो उसने भी जबरदस्त ओपनिंग की, जिससे सीरीज की लेगेसी बनी रही.

इन 8 फिल्मों को अलग-अलग डायरेक्टर और प्रोड्यूसर ने डायरेक्ट किया, लेकिन सबने एक ही नाम पर भरोसा किया. उमेश मेहरा, अब्बास-मस्तान और केशव रामसे जैसे दिग्गजों ने अक्षय की पर्सनैलिटी को ‘खिलाड़ी’ शब्द से इस तरह मैच किया कि ऑडियंस उन्हें किसी और नाम से इमेजिन नहीं कर सकती थी. अक्षय कुमार ने इन फिल्मों के लिए अपनी जान भी रिस्क में डाली. बिना बॉडी डबल के खतरनाक स्टंट करना और हर बार ‘खिलाड़ी’ शब्द को एक नया डायमेंशन देना अक्षय की सबसे बड़ी अचीवमेंट थी.

‘खिलाड़ी’ सिर्फ एक टाइटल नहीं बल्कि एक ब्रांड बन गया. ऑडियंस जानती थी कि अगर किसी फिल्म के नाम में ‘खिलाड़ी’ है, तो उसमें एक्शन, थ्रिल और अक्षय कुमार का मैजिक जरूर होगा. मेकर्स ने एक ही नाम के साथ अलग-अलग जॉनर में एक्सपेरिमेंट किया- कभी सस्पेंस थ्रिलर (‘खिलाड़ी’), कभी कॉमेडी (‘मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी’) और कभी डार्क एक्शन (‘खिलाड़ी 420’). उस जमाने में जब टेक्नोलॉजी आज की तरह अच्छी नहीं थी, अक्षय का खुद अपने स्टंट करना ऑडियंस से सीधा कनेक्ट बनाता था.

