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राज कुमार हिंदी सिनेमा के उन दिग्गज कलाकारों में गिने जाते हैं, जिनकी दमदार आवाज, शानदार डायलॉग डिलीवरी और अलग अंदाज आज भी लोगों के बीच मशहूर है. उनके ‘जानी’ कहने का स्टाइल इतना लोकप्रिय हुआ कि वह उनकी पहचान बन गया. अब फिल्ममेकर केसी बोकाडिया ने एक्टर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि राज कुमार लगभग हर किसी को ‘जानी’ कहकर बुलाते थे और इसके पीछे भी एक खास वजह थी.

नई दिल्ली. वो बॉलीवुड के उन चुनिंदा दिग्गजों में से एक थे, जिनकी एक झलक ही किसी सीन को क्लासिक बना देती थी. राज कुमार का नाम आते ही मशहूर डायलॉग याद आता है, ‘जानी… हम तुम्हें मारेंगे, और जरूर मारेंगे… लेकिन बंदूक भी हमारी होगी, गोली भी हमारी होगी और वक्त भी हमारा होगा!’. पर अब फिल्ममेकर केसी बोकाड़िया ने उनकी एक फनी आदत का खुलासा कर दिया है जो शायद ही किसी को पता हो.

राज कुमार हिंदी सिनेमा के उन दिग्गज कलाकारों में गिने जाते हैं, जिनकी दमदार आवाज, शानदार डायलॉग डिलीवरी और अलग अंदाज आज भी लोगों के बीच मशहूर है. उनके ‘जानी’ कहने का स्टाइल इतना लोकप्रिय हुआ कि वह उनकी पहचान बन गया. अमिताभ बच्चन को पहली बार 1 करोड़ देने वाले फिल्ममेकर केसी बोकाडिया ने राज कुमार से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि राज कुमार लगभग हर किसी को ‘जानी’ कहकर बुलाते थे और इसके पीछे भी एक खास वजह थी.

हाल ही में इंडिया टीवी को दिए इंटरव्यू में केसी बोकाडिया ने बताया कि राज कुमार के पालतू कुत्ते का नाम ‘जानी’ था. यही वजह थी कि एक्टर ने लगभग हर व्यक्ति को इसी नाम से बुलाना शुरू कर दिया था. हालांकि, उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि खुशकिस्मती से राज कुमार उन्हें कभी ‘जानी’ नहीं कहते थे और हमेशा ‘बोकाडिया साहब’ कहकर संबोधित करते थे.
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उन्होंने बातचीत में यह भी बताया कि राज कुमार का स्वभाव बाकी कलाकारों से काफी अलग था. उनके मुताबिक, वह फिल्मों की कहानी से ज्यादा सामने वाले इंसान को महत्व देते थे. अगर उन्हें किसी व्यक्ति का स्वभाव पसंद आ जाता, तभी वह उसके साथ काम करने के लिए तैयार होते थे.

फिल्ममेकर ने फिल्म ‘पुलिस और मुजरिम’ का किस्सा याद करते हुए बताया कि उन्होंने फिल्म के मुहूर्त से सिर्फ एक दिन पहले राज कुमार को फोन किया था. उस समय तक राज कुमार फिल्म के लिए फाइनल नहीं हुए थे. बोकाडिया के मुताबिक, अगर राज कुमार किसी इंसान को जानते नहीं थे या उससे प्रभावित नहीं होते थे, तो वह फिल्म करने से साफ इनकार कर देते थे.

केसी बोकाडिया ने आगे कहा, ‘राज साहब को संभालना अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा मुश्किल था. बच्चन साहब काफी कैलकुलेटिव इंसान हैं, लेकिन राज कुमार बेहद मूडी थे’. बोकाडिया ने समझाया कि किसी कैलकुलेटिव इंसान को मनाना आसान होता है, क्योंकि वह हर चीज को तर्क से समझता है. लेकिन राज कुमार का फैसला पूरी तरह उनके मूड पर निर्भर करता था.

डायरेक्टर ने मजेदार अंदाज में कहा कि राज कुमार का स्वभाव ऐसा था जैसे गाय अगर मूड में हो तो दूध दे दे और अगर मूड न हो तो बिल्कुल नहीं. उन्होंने बताया कि फोन पर एक सीन सुनाने के बाद राज कुमार को कहानी पसंद आ गई और उसी वक्त उन्होंने फिल्म करने के लिए हामी भर दी.

राज कुमार ने अपने लंबे करियर में कई यादगार फिल्में दीं. ‘पाकीजा’, ‘वक्त’, ‘सौदागर’, ‘तिरंगा’ और ‘हीर रांझा’ जैसी फिल्मों में उनकी अदाकारी आज भी याद की जाती है. उनका अलग अंदाज और डायलॉग बोलने का तरीका उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे खास अभिनेताओं में शामिल करता है.

