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Father Son duo in Same Bollywood Movies : बॉलीवुड में पिता-पुत्र के साथ में काम करने के कई उदाहरण मिलते हैं. अमिताभ बच्चन-अभिषेक बच्चन, सुनील दत्त-संजय दत्त एक साथ कई फिल्मों में काम कर चुके हैं. जिस तरह की फिल्म पिता ने की हो, ठीक वैसी ही स्टोरी पर बेटे ने काम किया हो, ऐसा कम देखने को मिलता है. पिता ने जिस सुपरहिट फिल्म में काम किया, ठीक उसी तरह की स्क्रिप्ट पर बनी मूवी में बेटे ने काम किया. दोनों ही फिल्में 17 साल के अंतराल में रिलीज हुई थीं. ये फिल्में कौन सी थीं, बाप-बेटे की जोड़ी कौन सी थी, आइये जानते हैं……..

बॉलीवुड में सुपरहिट फिल्मों की स्क्रिप्ट में मामलू फेरबदल करके मूवी बनाने का चलन बहुत पुराना है. 60 के दशक के कई फिल्मों की स्टोरी को नए अंदाज में सलीम-जावेद की जोड़ी पेश किया और 70 के दशक में एक से बढ़कर एक फिल्में बनाईं. ऐसी ही दो फिल्में बॉलीवुड में बनाई गईं जिनकी स्टोरी सेम थी. एक में पिता ने काम किया तो दूसरे में बेटे ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा. मजे की बात यह है कि दोनों ही फिल्में सुपरहिट रहीं. हम धर्मेंद्र-सनी देओल की बात कर रहे हैं. वो फिल्में ‘सीता और गीता’ तथा ‘चालबाज’ थीं.

हिंदी सिनेमा की सार्वकालिक महान फिल्म ‘शोले’ फिल्म की स्टोरी 1971 की फिल्म ‘मेरा गांव मेरा देश’ से ही इंस्पायर्ड थी. 1965 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘वक्त’ की स्टोरी में बदलाव करके ‘यादों की बारात’ जैसी मूवी बनाई गई. बॉलीवुड के मोस्ट पॉप्युलर राइटर सलीम-जावेद ने इस काम को बखूबी अंजाम दिया. दोनों जीपी सिप्पी के स्टोरी डिपार्टमेंट में काम करते थे. सलीम-जावेद की पहली
सफल फिल्म ‘हाथी मेरे साथी’ थी लेकिन क्रेडिट उन्हें नहीं मिला. सलीम-जावेद ने ही ‘सीता और गीता’ फिल्म की कहानी लिखी.
मूवी 1972 में रिलीज हुई. फिल्म नायिका प्रधान थी. पर्दे पर छा गई.

‘सीता और गीता’ का निर्देशन रमेश सिप्पी ने किया था. स्क्रीनप्ले सलीम-जावेद ने सतीश भटनागर के साथ मिलकर लिखा था. मजेदा बात यह है कि इस फिल्म का बेसिक आइडिया 1967 में आई दिलीप कुमार की फिल्म ‘राम और श्याम’ से कॉपी किया गया था. ‘राम और श्याम’ एक तेलुगू फिल्म का रीमेक थी. दो जुड़वा भाइयों की कहानी थी. 1967 की दूसरी सबसे कामयाब फिल्म थी. ‘राम और श्याम’ में जहां दिलीप कुमार का डबल रोल था, वहीं ‘सीता और गीता’ में हेमा मालिनी का डबल रोल था.
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‘सीता और गीता’ में संजीव कुमार और धर्मेंद्र थे. रूपेश कुमार, सत्येन कप्पू, हनी ईरानी और प्रतिमा देवी भी अहम भूमिकाओं में थे. म्यूजिक आरडी बर्मन का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. फिल्म का हर गाना सुपरहिट था. ‘हवा के साथ-साथ, घटा के संग-संग’ गाना आज भी हमें रेडियो-टीवी पर सुनने को मिल जाता है. इस गाने को किशोर कुमार ने गाया था.

पूरी फिल्म में हेमा मालिनी छाई रही थीं. ‘जॉनी मेरा नाम’ (1970) से वैसे भी हेमा मालिनी स्टार बन गई थीं. ‘सीता और गीता’ में धर्मेंद्र संग उनकी केमिस्ट्री खूब जमी थी. हेमा मालिनी को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी.

पूरे 17 साल बाद ‘सीता और गीता’ से मिलती-जुलती कहानी पर एक और फिल्म ‘चालबाज’ बनाई गई. श्री देवी-सनी देओल और रजनीकांत स्टारर यह मूवी 8 दिसंबर 1989 को रिलीज हुई थी. डायरेक्टर पंकज पाराशर थे. मजेदार बात यह है कि इस फिल्म में धर्मेद्र के बेटे सनी देओल ने काम किया था. उनका रोल अपने पिता के जैसा ही था.

सनी देओल ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने ‘चालबाज’ फिल्म में काम सिर्फ इसलिए किया कि क्योंकि वो अपने पिता के जैसा ही रोल फिल्मों में निभाना चाहते थे. चालबाज फिल्म की कहानी राजेश मजूमदार ने लिखी थी. डायलॉग कमलेश पांडेय ने लिखे थे. इस बार हेमा मालिनी की जगह श्रीदेवी पर्दे पर छा गई थीं. सनी देओल और रजनीकांत सिर्फ शो पीस साबित हुए थे. फिल्म में अपने छोटे से रोल से बाद में सनी देओल डायरेक्टर पंकज पाराशर से खासे नाराज हुए थे.

‘चालबाज’ फिल्म का सुपरहिट म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. गीतकार आनंद बख्शी 5 गाने लिखे थे. सबसे पॉप्युलर गाना ‘किसी के हाथ ना आएगी ये लड़की’ था जिसे कविता कृष्णमूर्ति ने गाया था. हेमा मालिनी की तरह श्री देवी को भी इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म में सनी देओल और श्री देवी के बीच ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री बहुत अच्छी दिखाई देती है लेकिन हकीकत में सेट पर दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं होती थी.

