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हिंदी सिनेमा का वो सितारा, जिसने एक्टिंग के साथ-साथ बतौर डायरेक्टर भी इतिहास रच दिया. आज भी इस शख्स की गिनती महान कलाकारों में होती है. वो हैं, राज कपूर. उन्हें इंडस्ट्री में ‘शोमैन’ कहा जाता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था, जब उनके पिता पृथ्वीराज कपूर को लगता था कि उनका बेटा जिंदगी में कुछ खास नहीं कर पाएगा.

नई दिल्ली. राज कपूर ने अपने करियर में हर तरह के रोल निभाए हैं. लेकिन फिल्ममेकर बनने के बाद उन्होंने अपनी सोच को फिल्मों में उतारा. एक्सपेरिमेंट करने से भी वह कभी परहेज नहीं करते थे. लेकिन उनके पिता को उनकी काबिलियत पर शक था.

14 दिसंबर 1924 को पेशावर में जन्मे राज कपूर का पूरा नाम रणबीर राज कपूर था. वह दिग्गज अभिनेता और थिएटर कलाकार पृथ्वीराज कपूर के बेटे थे. बचपन से ही उनका झुकाव फिल्मों और अभिनय की तरफ था. पढ़ाई से ज्यादा उनका मन सिनेमा की दुनिया में लगता था. यही बात उनके पिता को परेशान करती थी.

कहा जाता है कि पृथ्वीराज कपूर अक्सर अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंता जताते थे और मजाक-मजाक में कह देते थे कि “राज कुछ नहीं कर पाएगा”. हालांकि उन्हें अपने बेटे की रुचि का भी अंदाजा था. इसलिए उन्होंने उसे सही दिशा देने का फैसला किया.
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पृथ्वीराज कपूर ने मशहूर फिल्मकार केदार शर्मा से बात की और राज कपूर को उनके पास भेजा. केदार शर्मा ने उन्हें अपने साथ असिस्टेंट के तौर पर काम करने का मौका दिया. शुरुआती दिनों में राज कपूर सेट पर छोटे-मोटे काम करते थे. कभी क्लैप देते तो कभी दूसरे जरूरी कामों में हाथ बंटाते. यहीं से उनके फिल्मी सफर की असली शुरुआत हुई.

राज कपूर ने इस दौरान फिल्म निर्माण और अभिनय की बारीकियां बहुत करीब से सीखीं. उनकी मेहनत और लगन देखकर केदार शर्मा काफी प्रभावित हुए. उन्हें लगा कि इस युवा में एक सफल अभिनेता बनने की पूरी क्षमता है. इसके बाद उन्होंने 1947 में फिल्म नीलकमल में राज कपूर को हीरो के तौर पर मौका दिया. इस फिल्म में उनके साथ मधुबाला नजर आई थीं.

इसके बाद 1949 में रिलीज हुई बरसात ने उनकी किस्मत बदल दी. फिल्म सुपरहिट साबित हुई और राज कपूर रातोंरात बड़े स्टार बन गए. इसी फिल्म के जरिए शंकर-जयकिशन, शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी जैसी शानदार टीम भी बनी, जिसने आगे चलकर हिंदी सिनेमा को कई यादगार गाने दिए.

बेटे की यह सफलता देखकर पृथ्वीराज कपूर का नजरिया भी पूरी तरह बदल गया. जो पिता कभी उसके भविष्य को लेकर चिंतित रहते थे, वही बाद में गर्व से कहा करते थे कि आज लोग राज कपूर को उनके बेटे के रूप में जानते हैं, लेकिन एक दिन ऐसा आएगा जब लोग उन्हें राज कपूर के पिता के रूप में पहचानेंगे.

राज कपूर ने अपने करियर में आवारा, श्री 420, संगम, मेरा नाम जोकर और बॉबी जैसी कई यादगार फिल्में दीं. अभिनेता, निर्देशक और निर्माता के रूप में उनके योगदान ने उन्हें भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा शोमैन बना दिया. आज भी उनका नाम हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास का अहम हिस्सा माना जाता है.महान अभिनेता और फिल्म निर्माता राज कपूर का निधन 2 जून 1988 को नई दिल्ली में हुआ था.

