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संजय कपूर एक ऐसे एक्टर हैं, जिनका करियर बॉलीवुड के सबसे दिलचस्प चैप्टर्स में से एक है. कपूर खानदान की लेगेसी के बावजूद, उनका सफर आसान नहीं था. उनकी पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही, तो दूसरी ने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. लेकिन, इतिहास बताता है कि कभी-कभी एक गलत फैसला या रिजेक्ट की गई फिल्म करियर को पूरी तरह बदल सकती है. अगर संजय कपूर ने 2003 में वह हिस्टोरिक गलती न की होती और ‘तेरे नाम’ जैसी फिल्म रिजेक्ट न की होती, तो आज बॉलीवुड में सफलता का बेंचमार्क कुछ और होता.

नई दिल्ली. बॉलीवुड में कपूर खानदान का नाम सफलता की गारंटी माना जाता है. बोनी कपूर और अनिल कपूर की सफलता के बाद, जब उनके छोटे भाई संजय कपूर ने बड़े पर्दे पर कदम रखा, तो उम्मीदें आसमान छू रही थीं. लेकिन, संजय कपूर का करियर इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि फिल्म इंडस्ट्री में सिर्फ फेम काफी नहीं है, टाइमिंग और सही च्वाइस ही मेन फैक्टर्स हैं. (तस्वीर बनाने में एआई की मदद ली गई है.)

संजय कपूर ने 1995 में आज ही के दिन यानी 5 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म ‘प्रेम’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया. इस फिल्म ने काफी चर्चा बटोरी, क्योंकि इसे बोनी कपूर ने प्रोड्यूस किया था और इसमें संजय के साथ तब्बू जैसी टैलेंटेड एक्ट्रेस थीं. फिल्म बहुत शानदार बनी थी, लेकिन जब यह रिलीज हुई तो दर्शकों ने इसे पूरी तरह से रिजेक्ट कर दिया. यह संजय कपूर के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि किसी को भी कपूर खानदान के वारिस से ऐसे डेब्यू की उम्मीद नहीं थी.

‘प्रेम’ के फेल होने के बाद, संजय कपूर को अपनी काबिलियत साबित करने के लिए एक चमत्कार की जरूरत थी और वह चमत्कार ‘राजा’ के रूप में आया. इंद्र कुमार के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में संजय कपूर के साथ ‘धक-धक गर्ल’ माधुरी दीक्षित थीं. फिल्म ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया. ‘राजा’ 1995 की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई. फिल्म के गानों और संजय और माधुरी की केमिस्ट्री ने दर्शकों को लुभाया. संजय कपूर रातोंरात ‘राजा’ बन गए और ऐसा लगा कि उन्हें सुपरस्टार बनने से कोई नहीं रोक सकता.
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संजय कपूर का करियर पटरी पर था, लेकिन 90 के दशक के आखिर में उनकी कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर स्ट्रगल कर रही थीं. इसी बीच 2003 आया, जो उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट हो सकता था. डायरेक्टर सतीश कौशिक अपनी फिल्म ‘तेरे नाम’ के लिए लीड एक्टर ढूंढ रहे थे. रिपोर्ट्स बताती हैं कि शुरू में यह रोल संजय कपूर को ऑफर किया गया था. उस समय संजय दूसरे प्रोजेक्ट्स में बिजी थे या शायद उन्हें कैरेक्टर की गहराई समझ नहीं आई और उन्होंने इसे ठुकरा दिया.

संजय कपूर की रिजेक्ट की हुई फिल्म ‘तेरे नाम’ बाद में सलमान खान के पास चली गई. सलमान खान का करियर भी उस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा था. सलमान ने न सिर्फ फिल्म एक्सेप्ट की बल्कि ‘राधे’ के कैरेक्टर में अपनी जान भी डाल दी. ‘तेरे नाम’ ब्लॉकबस्टर साबित हुई और सलमान खान को खोया हुआ स्टारडम फिर से मिला.

फिल्म ‘तेरे नाम’ ने सलमान को वह स्टारडम दिया जो आज भी कायम है. दूसरी ओर, संजय कपूर के पास पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचा. अगर उन्होंने वह फिल्म की होती, तो ‘राधे’ का क्रेज संजय कपूर के सिर चढ़कर बोलता और आज उनकी गिनती बॉलीवुड के ए-लिस्ट सुपरस्टार्स में होती.

संजय कपूर ने बाद में टीवी और OTT प्लेटफॉर्म पर अपना टैलेंट दिखाया. ‘लस्ट स्टोरीज’ जैसी सीरीज से खुद को एक सीरियस एक्टर के तौर पर फिर से स्थापित किया. लेकिन, 2003 का वह एक फैसला फिल्म इंडस्ट्री में हमेशा चर्चा का विषय रहेगा.

