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जीवन कभी-कभी इतनी अजीब मोड़ ले लेता है कि लगता है जैसे कोई ऊपर वाला खुद कहानी लिख रहा हो. कल्पना कीजिए एक श्मशान घाट की… जहां धुआं उठ रहा है, चिताएं जल रही हैं और एक कोने में अकेली एक बूढ़ी महिला बैठी है. उसके शरीर पर घाव हैं, चेहरा पीड़ा से झलक रही है, आंखों में सहारा की बिनती. चारों तरफ मौत का सन्नाटा है, लेकिन उसकी आंखों में जिंदगी की आखिरी उम्मीद बाकी है.कोई अपना नहीं, कोई पूछने वाला नहीं… वहां किसी के अंतिम संस्कार में शामिल होने कॉमेडियन गया था. जो उस महिला की तकलीफ देखी नहीं पाया… दिल पिघल गया. वह युवक चुपचाप उसके पास गया, उसे सहारा दिया और घर ले आया, फिर जो आया वो किसी फिल्म से कम नहीं था.

नई दिल्ली. जिंदगी कभी-कभी इंसान को ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहां उसके पास खुद के लिए भी कुछ नहीं बचता, लेकिन वही इंसान किसी और का सहारा बन जाता है. एक ऐसा ही लड़का, जो कभी ढाबे पर काम करके अपना पेट भरता था, जिसने गरीबी, भूख और संघर्ष को बहुत करीब से देखा, एक दिन श्मशान घाट पहुंचा. वहां चारों तरफ सिर्फ सन्नाटा था, धुएं की गंध थी और अपनों को खो चुके लोगों का दर्द था. लेकिन उसी भीड़ के बीच एक कोने में बैठी एक बुजुर्ग महिला ने उसकी जिंदगी बदल दी. महिला के शरीर पर घाव थे, आंखों में दर्द था और शायद दुनिया से सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी थीं. लोग उन्हें नजरअंदाज कर आगे बढ़ रहे थे, लेकिन उस लड़के से उनका दर्द देखा नहीं गया. वह उन्हें अपने घर ले आया. उनके घावों पर मरहम लगाया, खाना खिलाया और मां की तरह उनकी सेवा की. फिर एक दिन मरते समय उस महिला ने जो दुआ दी, उसने उसकी पूरी जिंदगी बदल दी. आज वही लड़का करोड़ों लोगों को हंसाने वाला बड़ा कॉमेडियन बन चुका है.

हम बात कर रहे हैं सुदेश लहरी की, जिन्होंने अपनी जिंदगी में बेहद कठिन दौर देखा. पंजाब के जालंधर में जन्मे सुदेश लहरी का बचपन गरीबी में बीता. घर की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि उन्हें छोटी उम्र से ही काम करना पड़ा. कभी फैक्ट्री में काम किया तो कभी ढाबे पर बर्तन साफ कर गुजारा किया. कई बार ऐसा भी हुआ जब परिवार के पास दो वक्त का खाना तक नहीं होता था. फोटो साभार-@realsudeshlehri/Instagram

संघर्षों के बीच सुदेश को लोगों को हंसाने का हुनर मिला. वह छोटी-मोटी स्टेज परफॉर्मेंस करने लगे और धीरे-धीरे कॉमेडी की दुनिया में पहचान बनाने लगे. लेकिन, उनकी जिंदगी का सबसे भावुक अध्याय उस दिन शुरू हुआ, जब वह किसी अंतिम संस्कार में शामिल होने श्मशान घाट पहुंचे थे. सुदेश लहरी ने खुद कभी ये किस्सा किसी इंटरव्यू या शो में नहीं सुनाया है. लेकिन, हाल ही में ये मामला तब सामने आया, जब कृष्णा अभिषेक ने ये पूरा किस्सा ‘लाफ्टर शेफ्स 3’ में सुनाया. फोटो साभार-@realsudeshlehri/Instagram
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कृष्णा ने बताया कि सुदेश किसी के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे. श्मशान घाट में उन्होंने एक बूढ़ी महिला को एक कोने में बैठे देखा. उस महिला के शरीर पर घाव थे और वो बहुत तकलीफ में थी. सुदेश से बुजुर्ग महिला की तकलीफ देखी नहीं गई और वह उन्हें अपने साथ घर ले आए. फोटो साभार-@realsudeshlehri/Instagram

घर लाने के बाद सुदेश ने उनकी मां की तरह सेवा की. उनके घाव साफ किए, दवाइयां दीं और खाना खिलाया. उस समय खुद सुदेश के पास ज्यादा पैसे नहीं थे, लेकिन उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की. वह सिर्फ इतना चाहते थे कि महिला को आखिरी दिनों में अपनापन और सम्मान मिले. फोटो साभार-@realsudeshlehri/Instagram

कुछ समय बाद जब महिला की हालत ज्यादा खराब हो गई. प्राण त्यागने से पहले उन्होंने सुदेश का हाथ पकड़कर कहा, ‘तेरा कभी कुछ बुरा नहीं होगा और तू जिंदगी में बहुत सफल होगा.’ बुजुर्ग महिला की कही बात के बाद सुदेश लहरी के दिन फिर गए. यह शब्द सुदेश के दिल में हमेशा के लिए बस गए. बुजुर्ग महिला के जाने के बाद ही सुदेश लहरी को मुंबई से पहला फोन आया. फोटो साभार-@realsudeshlehri/Instagram

यह दुआ सुदेश लहरी की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुई. उसके बाद उनकी किस्मत बदली. उन्होंने ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ जैसे शोज में हिस्सा लिया. स्टेज कॉमेडी की, पंजाबी फिल्मों में काम किया और आखिरकार ‘कपिल शर्मा शो’ में ‘टिप टॉप’ और अपनी खास स्टाइल से लाखों दिल जीत लिए. आज वे देश के सबसे लोकप्रिय कॉमेडियंस में शुमार हैं. फोटो साभार-@realsudeshlehri/Instagram

