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जुबीन गर्ग डेथ केस में 4 के खिलाफ हत्या के आरोप, लगी BNS की 10 धाराएं, अब दर्ज होंगे गवाहों के बयान

मुंबई. गुवाहाटी की एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने मंगलवार को असमिया गायक जुबीन गर्ग की मौत के मामले में 7 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए, जिनमें से 4 पर हत्या का आरोप है. यह कार्रवाई उस घटना के दो महीने बाद हुई है जब सिंगापुर की एक अदालत जुबीन गर्ग की मौत को दुर्घटनावश डूबने का मामला बताया था. कोर्ट ने किसी भी तरह की साजिश से इनकार किया था. वहीं, जिला और सेशन कोर्ट की जज शर्मिला भुयान की कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और असम सीआईडी द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की चार्जशीट का परीक्षण करने के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 10 धाराओं के तहत आरोप तय किए.

कोर्ट द्वारा तय किए गए आरोपों में सामान्य इरादा और कई लोगों की अपराध में भागीदारी, आपराधिक साजिश, हत्या, गैर-इरादतन हत्या, जबरन वसूली, धोखाधड़ी, विश्वासघात और सबूत मिटाने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं. इस फैसले के बाद अब मामले की पूरी सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है. सबसे गंभीर आरोप BNS की धारा 103(1) के तहत हत्या का है, जो चार आरोपियों – सिद्धार्थ शर्मा, श्याम काणु महंता, शेखर ज्योति गोस्वामी और अमृत प्रवा महंता – पर लगाया गया है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, अन्य आरोपों में कई लोगों द्वारा संयुक्त रूप से अपराध करना, धोखाधड़ी, जबरन वसूली, सबूत छुपाना और विश्वासघात शामिल हैं. कोर्ट दस्तावेजों के अनुसार, सिद्धार्थ शर्मा, श्याम काणु महंता, शेखर ज्योति गोस्वामी और अमृत प्रवा महंता पर BNS की संबंधित धाराओं के तहत संयुक्त रूप से अपराध, आपराधिक साजिश और हत्या के आरोप लगाए गए हैं.

इसके अलावा, श्याम काणु महंता पर धारा 308(2) (जबरन वसूली), 318(4) (धोखाधड़ी और बेईमानी से प्रेरित करना) और 238 (सबूत गायब करना) के तहत भी आरोप लगाए गए हैं, जबकि सिद्धार्थ शर्मा और शेखर ज्योति गोस्वामी पर अतिरिक्त रूप से धारा 316(5) (विश्वासघात) के तहत आरोप हैं. अमृत प्रवा महंता पर भी धारा 238 (सबूत गायब करना) के तहत आरोप हैं.

जुबीन के चचेरे भाई और पूर्व असम पुलिस अधिकारी संदीपन गर्ग पर धारा 105 के तहत आरोप लगाए गए हैं, जबकि दिवंगत गायक के दो पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड-परेश बैश्य और नंदेश्वर बोरा पर धारा 61(2) और 316(5) के तहत आरोप लगाए गए हैं. पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का कहना है कि अब ट्रायल के दौरान हर धारा की प्रासंगिकता और प्रत्येक आरोपी की भूमिका की जांच की जाएगी.

बता दें, जुबीन गर्ग की मौत पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में लाजारस आइलैंड के पास एक निजी यॉट ट्रिप के दौरान हुई थी. उनकी मौत के बाद असम में शोक की लहर दौड़ गई. इतना ही नहीं, उनकी मौत को लेकर इतना विवाद हुआ कि असम सरकार ने सितंबर में SIT का गठन किया. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस घटना को “साफ-साफ हत्या” बताया था और एसआईटी की टीम चांज के लिए गठित की थी.

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