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स्टारकिड को डेब्यू फिल्म से जबरदस्त स्टारडम हासिल हुआ था. मगर शुरुआती सफलता को हल्के में लेना उन्हें भारी पड़ गया. उन्होंने सोलो फिल्मों के बजाय मल्टी-स्टारर और बड़े बजट की एक्शन फिल्मों को चुना, जिससे उनकी ब्रांड वैल्यू को नुकसान पहुंचा. एक्टर के इन फैसलों से पिता संजय खान भी नाराज थे. एक्टर ने बताया कि उन्हें जब लीड रोल के बजाय सपोर्टिंग रोल ऑफर होने लगे, तो उन्होंने अपनी गरिमा बनाए रखने के लिए लाइमलाइट से दूर होना बेहतर समझा. फिलहाल, वे लंबे समय से एक्टिंग की दुनिया से दूर हैं.

नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्टर ने 2004 में फराह खान की फिल्म से डेब्यू किया था. शाहरुख खान के साथ उनके ‘लकी’ वाले किरदार और कूल अंदाज ने युवाओं को दीवाना बना दिया था. उस वक्त ऐसा लगा था कि वे बॉलीवुड के अगले बड़े सुपरस्टार बनेंगे, लेकिन इतनी शानदार शुरुआत के बाद भी उनका करियर धीरे-धीरे पटरी से उतर गया और वे बड़े पर्दे से लगभग गायब हो गए. फिल्म ‘मैं हूं ना’ से रातों-रात शोहरत हासिल करने का कोई फायदा नहीं हुआ.

जायेद खान ने ‘जूम’ को दिए इंटरव्यू में अपने करियर पर खुलकर बात की. उन्होंने ईमानदारी से स्वीकार किया कि ‘मैं हूं ना’ की सफलता के बाद वे थोड़े लापरवाह हो गए थे और अपनी स्टारडम को हल्के में लेने लगे थे. उन्होंने माना कि उस दौर में उन्होंने कई ऐसी गलतियां कीं, जिन्हें टाला जा सकता था, लेकिन उस समय उन्हें अपनी समझ पर बहुत ज्यादा यकीन था.

जायेद ने बताया कि इंडस्ट्री के कई जानकारों ने उन्हें सलाह दी थी कि वे सोलो (सिंगल-हीरो) फिल्मों पर ज्यादा ध्यान दें. लेकिन वे उस वक्त बड़ी एक्शन फिल्मों के पीछे भाग रहे थे. उन्होंने कहा कि जब आप मार्केट में अपनी पहचान बना लेते हैं, तो यह दिखाना जरूरी होता है कि आप अकेले अपने दम पर फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर चला सकते हैं, जो वे नहीं कर पाए.
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जायेद खान ने पुराने फैसलों को याद करते हुए कहा कि वे मल्टी-स्टारर फिल्मों के जाल में बहुत जल्दी फंस गए. उन्हें पहले अपना खुद का ‘ब्रांड’ बनाना चाहिए था और फिर बड़े बजट की फिल्मों का हिस्सा बनना चाहिए था. जायेद ने कहा कि ‘ब्लू’ जैसी बड़े बजट की फिल्म को उस वक्त भला कौन मना करता, लेकिन ऐसी ही कुछ फिल्मों ने उनके करियर को फायदे के बजाय नुकसान पहुंचाया.

जायेद के इन फैसलों से उनके पिता और दिग्गज फिल्म निर्माता संजय खान भी काफी नाराज रहते थे. जायेद ने खुलासा किया कि उनके और उनके पिता के बीच फिल्मों के चुनाव को लेकर अक्सर तीखी बहस होती थी. उनके पिता की अपनी चिंताएं थीं, लेकिन जायेद उस वक्त युवा थे और उन्हें लगता था कि उन्हें सब कुछ पता है, जिसे आज वे अपना घमंड मानते हैं.

जायेद का मानना है कि करियर खराब होने का मतलब यह नहीं है कि आप कुछ भी काम करने लगें. उन्होंने लाइमलाइट से दूर रहने और पीछे हटने का फैसला किया, क्योंकि वे उन प्रोजेक्ट्स का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे जो उनके मन को सही नहीं लग रहे थे. उन्होंने इसी वजह से बॉलीवुड की चकाचौंध से दूरी बना ली और अपनी शांति चुनी.

जायेद खान को आखिरी बार 2015 में फिल्म ‘शराफत गई तेल लेने’ में देखा गया था. उन्होंने टीवी शो ‘हासिल’ में भी काम किया. फिलहाल, वे एक्टिंग की दुनिया से काफी समय से दूर हैं. उनके फैंस आज भी उनके उस ‘लकी’ वाले अंदाज को याद करते हैं और उनके किसी अच्छे प्रोजेक्ट के साथ वापसी का इंतजार कर रहे हैं.

