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कॉमेडी और अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले गौरव गेरा इन दिनों ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की सफलता का आनंद ले रहे हैं. सोशल मीडिया से लेकर दर्शकों के बीच उनके काम की खूब चर्चा हो रही है. लेकिन आज जिस मुकाम पर गौरव गेरा नजर आते हैं, वहां तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में एक्टर और कॉमेडियन ने अपने संघर्ष, आर्थिक तंगी, करियर के उतार-चढ़ाव और सफलता को लेकर खुलकर बात की.

नई दिल्ली. आज दर्शकों के दिलों में अपनी अलग जगह बना चुके गौरव गेरा की सफलता जितनी चमकदार दिखती है, उसके पीछे का सफर उतना ही कठिन और भावुक करने वाला रहा है. एक समय ऐसा था जब उनके बैंक खाते में महज 84 रुपये बचे थे. हालात इतने चुनौतीपूर्ण थे कि वह रोज बैंक के सामने से गुजरते हुए उसे देखकर मन ही मन अपने बेहतर दिनों की उम्मीद करते थे. लेकिन सपनों का पीछा छोड़ना उन्हें कभी मंजूर नहीं था. ‘धुरंधर’ में ‘मो. आलम’ के किरदार से सुर्खियां बटोर रहे गौरव गेरा ने अब उन दिनों को याद किया है, जब न फिल्मी बैकग्राउंड था, न आर्थिक सुरक्षा और न ही सफलता की कोई गारंटी. फिर भी उन्होंने अपने सपनों पर भरोसा बनाए रखा. संघर्ष, आत्मसम्मान, परिवार के साथ और कभी हार न मानने वाले जज्बे से जुड़ी उनकी यह कहानी सिर्फ एक अभिनेता की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है जो मुश्किल हालात में भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ता.

हाल ही में जिस्ट के साथ एक इंटरव्यू में गौरव ने अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष, करियर के उतार-चढ़ाव, आर्थिक तंगी और उन सबक के बारे में खुलकर बात की जिन्होंने उन्हें जमीन से जोड़े रखा है. उन्होंने कहा, ‘मेरे यहां कोई फिल्मों में नहीं था.’ उनकी रुचि स्कूल के दिनों में एनुअल फंक्शन्स और फैंसी ड्रेस कॉम्पिटिशन के माध्यम से प्रदर्शन कलाओं में पैदा हुई. लेकिन स्कूल में पढ़ाई को ज्यादा महत्व दिया जाता था. उन्होंने याद करते हुए कहा, ‘आर्ट एंड क्राफ्ट में मेरे ए-प्लस आते थे, लेकिन पढ़ाई में मैं 72%, 80%, 82% वाला स्टूडेंट था. मुझे लगता था जिस चीज में मैं अच्छा हूं, उसको एनकरेज ही नहीं कर रहे.’ फोटो साभार-@gauravgera/Instagram

अपनी आर्टिस्टिक स्किल्स को करियर में बदलने की सोच के साथ गौरव ने पहले फैशन डिजाइनिंग का रास्ता चुना. उन्होंने कहा कि मेरी स्केचिंग अच्छी थी. मैंने कॉलेज ऑफ आर्ट्स में अप्लाई किया था, लेकिन हुआ नहीं. फिर फैशन में गया और पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन जॉइन की.’ लेकिन कोर्स उन्हें पसंद नहीं आया. गौरव ने आगे कहा कि मुझे लगा ये वो नहीं है जो मैं करना चाहता हूं. मैंने पापा से बोल दिया, ‘पैसे बचा लो, बड़ा महंगा कोर्स है. मैं नहीं करूंगा.’ पापा ने कहा, ‘फिनिश इट. आधा साल जॉब कर लेना, फिर जो मन में आए करना.’ एक्जैक्टली आधा साल जॉब की और फिर थिएटर जॉइन कर लिया.’
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गौरव अपने माता-पिता के प्रति आभारी हैं कि उन्होंने कभी अपनी महत्वाकांक्षाएं उन पर नहीं थोपीं. उन्होंने कहा, ‘मेरे पापा आईआईटी-बीएचयू से इंजीनियर हैं, भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, लेकिन मुझ पर कुछ नहीं थोपा गया. इसके लिए मैं थैंकफुल हूं.’ मुंबई आने के बाद की आर्थिक मुश्किलों को याद करते हुए गौरव ने एक यादगार किस्सा शेयर किया. फोटो साभार-@gauravgera/Instagram

उन्होंने कहा- ‘मेरे अकाउंट में 84 रुपये थे. मैं एचडीएफसी बैंक के सामने से गुजरता था और बैंक को देखकर कहता था, ‘मेरा खयाल रखना.’ उन्होंने हंसते हुए कहा- ‘मैं आते-जाते बैंक को माथा टेक के जाता था.’ बातचीत में आगे उन्होंने कहा- पिता जितना हो सके सपोर्ट करते थे, लेकिन पैसे सीमित थे. फोटो साभार-@gauravgera/Instagram

गौरव ने कहा- ‘पापा सैलरीड पर्सन थे. उनके लेटर्स अभी भी मेरे पास हैं जहां लिखा होता था, ‘2,000 रुपये भेज रहा हूं, इससे ज्यादा नहीं है.’ इसके बावजूद गौरव खुद को वंचित कभी नहीं मानते थे. उस वक्त लगता था तकलीफ नहीं है. पैसे नहीं हैं ऑटो के तो पैदल आ जाएंगे. मैं थोड़ा खुद्दार टाइप का था. मैं देने वाला बनना चाहता था, लेने वाला नहीं. फोटो साभार-@gauravgera/Instagram

गौरव ने मुंबई पहुंचने के कुछ समय बाद घर को लिखे एक लेटर का जिक्र किया. लेटर में लिखा था कि अभी पैसे के फ्रंट पर कुछ मटेरियलाइज नहीं हुआ है, लेकिन प्लीज मेरे पर भरोसा रखें. परिवार को उन पर भरोसा बनाए रखना चाहिए, क्योंकि भविष्य उज्ज्वल है और उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना है.’ आज पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें उस लेटर की मैच्योरिटी पर गर्व है. ‘मुझे उस लेटर की टोन बहुत अच्छी लगती है. न उसमें घमंड था, न ये था कि मुझे सब आता है. अगर आज मुझे वैसा बच्चा मिले, तो मैं उसको सपोर्ट ही करूंगा.’ यह लेटर हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ, जिसमें गौरव ने 1998 में लिखे अपने भावनात्मक शब्दों को शेयर किया.

‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की सफलता के बाद मिल रहे प्यार को लेकर गौरव का कहना है कि अब वह सफलता को पहले की तरह नहीं देखते. उनके मुताबिक, यह सिर्फ उनके काम का एक हिस्सा है जिसे लोगों ने पसंद किया है. मनोरंजन जगत ने उन्हें यह सिखाया है कि आज आप लोकप्रिय हैं तो कल हालात बदल भी सकते हैं. यही वजह है कि वह सफलता को सिर पर चढ़ने नहीं देते.

