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क्या जानते हैं ‘टी-सीरीज’ में ‘T’ का मतलब? जूस बेचने वाले गुलशन कुमार को बनाया ‘कैसेट किंग’, आज बेटे का है राज

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टी-सीरीज आज दुनिया की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनियों में शुमार है, लेकिन इसकी शुरुआत बेहद साधारण परिस्थितियों में हुई थी. कंपनी के नाम में मौजूद ‘टी’ का मतलब भी बेहद खास है. दिल्ली के साधारण परिवार में जन्में एक लड़के ने अपनी मेहनत के दम पर म्यूजिक इंडस्ट्री पर एक तरफा राज किया. 1997 में उनके निधन के बाद उनके बेटे भूषण कुमार ने इस विरासत को संभाला और टी-सीरीज को दुनियाभर में नई पहचान दिलाई.

क्या जानते हैं 'टी-सीरीज' में 'T' का मतलब?  जूस बेचने वाले को बनाया कैसेट किंगZoom

गुलशन कुमार ने कैसेट बेचकर टी-सीरीज खड़ी की.

नई दिल्ली.  आज टी-सीरीज सिर्फ एक म्यूजिक कंपनी का नाम नहीं, बल्कि भारतीय मनोरंजन जगत की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में से एक है. भक्ति गीतों से लेकर ब्लॉकबस्टर फिल्म संगीत तक, टी-सीरीज ने दशकों से करोड़ों लोगों की प्लेलिस्ट पर राज किया है. लेकिन इस चमकदार साम्राज्य की शुरुआत बेहद साधारण थी. टी-सीरीज की नींव रखने वाले गुलशन कुमार कभी दिल्ली की सड़कों पर जूस बेचा करते थे.

जूस बेचते-बेचते गुलशन कुमार टी-सीरीज जैसे साम्राज्य के मालिक कैसे बन गए ये बहुत दिलचस्प कहानी है. आज आपको इस आर्टिकल में वो सब बताने वाले हैं जिसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं. आखिर गुलशन कुमार की कंपनी टी-सीरीज में टी का क्या मतलब है. बहुत से लोग मानते हैं कि टी-सीरीज़ का ‘टी’ किसी तकनीकी शब्द का संक्षिप्त रूप होगा, लेकिन सच इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है.

शिव भक्त गुलशन कुमार ने जब अपने बिजनेस की नींव रखी तो ऐसा कैसे हो सकता था कि वो कोई और नाम सोच लेते. गुलशन कुमार ने अपनी कंपनी का नाम भगवान शिव पर रखा. कंपनी का मूल नाम ट्रिशूल कैसेट्स इंडस्ट्रीज था, यानी ‘टी’ का मतलब है ट्रिशूल. यही नाम आगे चलकर छोटा होकर टी-सीरीज बन गया और दुनिया भर में मशहूर हो गया.

साधारण परिवार से निकल कैसेट किंग बने गुलशन कुमार

गुलशन कुमार का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था. उनके पिता दिल्ली में फलों का जूस बेचते थे. परिवार आर्थिक रूप से बेहद संपन्न नहीं था, लेकिन मेहनत और आगे बढ़ने की चाह हमेशा मौजूद थी. गुलशन कुमार अपने पिता के कारोबार को आगे नहीं बढ़ाना चाहते थे. वो कुछ अलग, कुछ बड़ा करना चाहते थे.  गुलशन कुमार ने जल्दी समझ लिया कि संगीत लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा है और सस्ते ऑडियो कैसेट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने कम कीमत पर भजन और लोकप्रिय गीतों के कैसेट तैयार कर बाजार में उतारे. यह आइडिया इतना सफल हुआ कि देखते ही देखते उनका बिजनेस पूरे देश में फैल गया.

क्यों कहा गया ‘कैसेट किंग’?

उस दौर में जब संगीत कैसेट्स हर घर की जरूरत बन चुके थे, गुलशन कुमार ने उन्हें आम आदमी की पहुंच में ला दिया. खासकर भक्ति संगीत के क्षेत्र में उन्होंने एक नई क्रांति ला दी. माता के भजन, शिव भक्ति और धार्मिक एल्बमों ने टी-सीरीज को घर-घर तक पहुंचा दिया. यही वजह थी कि उन्हें प्यार से ‘कैसेट किंग’ कहा जाने लगा.

देश को लगा था झटका

गुलशन कुमार, ‘कैसेट किंग’ बन चुके थे. उनका नाम देश और दुनिया में देखते ही देखते जा रहा था. उस वक्त मुंबई औऱ फिल्म इंडस्ट्री पर अंडरवर्ल्ड का साया मंडरा रहा था. हर किसी नामी व्यक्ति को अंडरवर्ल्ड को मुंह मांगी फिरौती देनी पड़ती थी और अगर कोई ऐसा करने से मना कर देता तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती थी. गुलशन कुमार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. 1997 में गुलशन कुमार ने अंडरवर्ल्ड को फिरौती देने से मना कर दिया था जिसके बाद उन्हें दिन-दहाड़े गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई. उनकी हत्या से टी-सीरीज के साथ ही पूरी म्यूजिक इंडस्ट्री को भी गहरा सदमा लगा था.

भूषण कुमार ने संभाली कमान

गुलशन कुमार के जाने के बाद उनके बेटे भूषण कुमार टी-सीरीज की कमान संभाली और कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. उन्होंने टी-सीरीज़ को सिर्फ संगीत कंपनी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे फिल्मों, डिजिटल कंटेंट और वर्ल्ड एंटरटेनमेंट के फील्ड में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. आज टी-सीरीज देश की सबसे बड़ी म्यूजिक और एंटरटेनमेंट कंपनियों में शामिल है.

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Pranjul SinghSub-Editor

From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें

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