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कंगना रनौत की फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को रिलीज होगी. यह फिल्म रियल घटना पर बनी है. कंगना ने फिल्म का एक पोस्टर शेयर किया है. इसमें फिल्म का टाइटल दिख रहा है और कुछ लोग दिख रहे हैं. यह फिल्म 26 नवंबर 2008 के कामा अस्पताल के नायकों पर आधारित यह फिल्म आम कर्मचारियों की बहादुरी दिखाती है.

कंगना रनौत की नई फिल्म का ऐलान हुआ. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम)
मुंबई. एक्ट्रेस कंगना रनौत एक बार फिर बड़े पर्दे पर देश के नायकों की कहानी लेकर आ रही हैं. उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ की रिलीज डेट का ऐलान बुधवार को हो गया. मेकर्स ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का पोस्टर जारी करते हुए लिखा, “साधारण लोगों की एक असाधारण कहानी. उस रात की कहानी, जब इंसानियत डर से भी बड़ी बन गई. जब जिम्मेदारी ने बलिदान का रूप लिया, जब एकता हमारा फर्ज बन गई और हिम्मत ने कई जिंदगियां बचाईं. भारत के असली हीरोज की अनसुनी कहानी. फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.”
यह फिल्म उन नायकों की कहानी को सामने लाती है, जिनका जिक्र इतिहास के पन्नों में कहीं दबकर रह गया. सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह फिल्म हथियारों और हिंसा के बजाय मानवीय इरादों और नैतिक साहस पर रोशनी डालती है. फिल्म की कहानी मुख्य रूप से सरकारी अस्पतालों के गलियारों और वार्डों के इर्द-गिर्द घूमती है. 26 नवंबर 2008 की रात जब मुंबई आतंक की आग में जल रही थी, तब कामा अस्पताल के भीतर एक अलग ही जंग लड़ी जा रही थी. बाहर आतंकी गोलियां बरसा रहे थे, लेकिन अस्पताल के अंदर निहत्थे स्टाफ ने अपनी जान जोखिम में डालकर लगभग 400 मरीजों और उनके परिजनों की जान बचाई थी.
कंगना रनौत का पोस्ट.
यह फिल्म अस्पताल के हर उस कर्मचारी को सम्मान देती है, जिसमें नर्सें, वार्ड बॉय, सफाईकर्मी, लिफ्ट ऑपरेटर, सुरक्षा गार्ड और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल थे. उस रात उनके पास वहां से भाग जाने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने रुककर अपना फर्ज निभाना चुना.
कंगना रनौत ने अपने किरदार के बारे में बताया
‘भारत भाग्य विधाता’ में कंगना रनौत नर्स की भूमिका में नजर आएंगी. अपने किरदार और फिल्म के विषय पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “अक्सर हम बहादुरी के केवल उन कामों का जश्न मनाते हैं, जो बहुत नाटकीय होते हैं, लेकिन असली हिम्मत अक्सर शांत होती है. फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ उन आम लोगों की कहानी है, जो आतंक और जिंदगी के बीच ढाल बनकर खड़े रहे. यह देशभक्ति का सबसे सच्चा रूप है, जहां फर्ज कर्म में बदल जाता है. मुझे इस कहानी का हिस्सा होने पर गर्व है, जो उन लोगों को श्रद्धांजलि देती है, जिन्होंने शहर को उसके सबसे मुश्किल पलों में एकजुट रखा. मैं 12 जून को दर्शकों के साथ इसे बड़े पर्दे पर देखने के लिए उत्साहित हूं.”
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रमेश कुमार, सितंबर 2021 से बतौर सीनियर सब एडिटर न्यूज18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रहे हैं. समय-समय पर विधानसभा-लोकसभा चुनाव पर भी काम करते हैं. इससे पहले हिंदीरश (पिंकविला) में एंटर…और पढ़ें

