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स्टूडियो में हुए एक अपमान और पिता के आंसू देख इस शख्स ने म्यूजिक इंडस्ट्री पर राज करने की ठान ली थी. संघर्ष के दिनों में जब दुनिया ने काबिलियत पर शक किया, तो इन्होंने हार मानने के बजाय खुद को साबित करने का बड़ा फैसला लिया. इसके बाद साल 1998 में आई सलमान खान की एक ब्लॉकबस्टर फिल्म ने इस संगीतकार जोड़ी की किस्मत रातों-रात चमका दी. आज भले ही यह दिग्गज फनकार हमारे बीच नहीं है,लेकिन बॉलीवुड में उनके संघर्ष और कामयाबी की यह दास्तां हर किसी को प्रेरित करती है.

नई दिल्ली. बिना गॉडफादर के कड़े संघर्ष से अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन इस चुनौती को पार कर कामयाबी का परचम लहराने वाले फनकारों में वाजिद खान का नाम बेहद खास है. अपने भाई साजिद के साथ मिलकर उन्होंने बॉलीवुड को अनगिनत ब्लॉकबस्टर और चार्टबस्टर गाने दिए, जिसने पूरी इंडस्ट्री को थिरकने पर मजबूर कर दिया. आज भले ही साजिद-वाजिद की यह आइकॉनिक जोड़ी टूट चुकी हो, लेकिन संगीत की दुनिया के शिखर पर पहुंचने का उनका यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, जिसमें कामयाबी से पहले सिर्फ कड़ा इम्तिहान और मुश्किलें थीं.

उनकी जिंदगी में एक ऐसा पल भी आया, जिसने उनके सोचने का तरीका बदल दिया और आगे चलकर उसी घटना ने उन्हें एक बड़ा संगीतकार बनने की प्रेरणा दी. वाजिद खान ने 1 जून 2020 को आखिरी सांस ली, लेकिन वह अपने बनाए गीतों के जरिए लोगों के बीच यादों में बने रहते हैं.

वाजिद खान का जन्म 7 अक्टूबर 1977 को एक ऐसे परिवार में हुआ था, जहां संगीत का माहौल बचपन से मौजूद था. उनके पिता शराफत अली खान जाने-माने तबला वादक थे, जबकि उनके परिवार के अन्य सदस्य भी संगीत से जुड़े हुए थे. यही कारण था कि वाजिद का झुकाव भी बचपन से संगीत की ओर हो गया. उन्हें खास तौर पर गिटार बजाना बहुत पसंद था. कम उम्र में ही उन्होंने संगीत की बारीकियां सीखनी शुरू कर दी थीं.
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संगीत की दुनिया में शुरुआती दिनों में वाजिद और उनके भाई साजिद दूसरे संगीतकारों के साथ काम करते थे. इसी दौरान एक घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में वाजिद गिटार बजा रहे थे. रिकॉर्डिंग के दौरान एक गलत सुर सुनाई दिया और उसका आरोप वाजिद पर लगा दिया गया. जबकि गलती उनकी नहीं थी, फिर भी उन्हें सबके सामने डांट सुननी पड़ी.

उस समय उनके पिता भी वहां मौजूद थे और अपने बेटे को इस तरह अपमानित होते देख उनकी आंखों में आंसू आ गए. इस घटना ने वाजिद को भीतर तक झकझोर दिया. उन्होंने और उनके भाई साजिद ने उसी दिन तय कर लिया कि वे केवल दूसरों के लिए वाद्य यंत्र नहीं बजाएंगे, बल्कि खुद संगीत तैयार करेंगे और अपनी अलग पहचान बनाएंगे.

इसके बाद दोनों भाइयों ने पूरी मेहनत के साथ अपने सपनों को पूरा करने की शुरुआत की. उनकी किस्मत तब बदली जब उन्हें सलमान खान की फिल्म ‘प्यार किया तो डरना क्या’ में संगीत देने का मौका मिला. फिल्म का गीत ‘तेरी जवानी बड़ी मस्त मस्त है’ जबरदस्त हिट साबित हुआ और देखते ही देखते साजिद-वाजिद की जोड़ी बॉलीवुड में मशहूर हो गई. इसके बाद दोनों भाइयों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

सलमान खान के साथ उनकी जोड़ी खास तौर पर बेहद सफल रही. ‘तुमको ना भूल पाएंगे’, ‘गर्व’, ‘पार्टनर’, ‘वॉन्टेड’ और ‘दबंग’ जैसी फिल्मों में उनके संगीत को खूब पसंद किया गया. वाजिद सिर्फ संगीतकार ही नहीं थे, बल्कि एक बेहतरीन गायक भी थे. उन्होंने ‘मेरा ही जलवा’, ‘हमका पीनी है’ समेत कई हिट गानों में अपनी आवाज दी.

साजिद-वाजिद की जोड़ी को साल 2011 में फिल्म ‘दबंग’ के संगीत के लिए प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके अलावा भी उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान मिले. सफलता के सफर के बीच वाजिद को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा. वह लंबे समय तक किडनी की बीमारी से जूझते रहे. इलाज के बावजूद उन्होंने संगीत से अपना रिश्ता नहीं तोड़ा. अंतिम समय तक वह अपने काम को लेकर समर्पित रहे.

