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न्यूज पढ़ते-पढ़ते बन गईं सुपरस्टार, राजेश खन्ना-अमिताभ बच्चन संग कर चुकी काम, सादगी की मिसाल कहलाती थी ये हसीना

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दूरदर्शन परे खबरें पढ़ने वाली एक साधारण लड़की ने अपनी दमदार एक्टिंग से हिंदी सिनेमा में ऐसा मुकाम बनाया कि आज भी लोग उन्हें याद करते हैं. हम बात कर रहे हैं स्मिता पाटिल की, जिन्होंने बहुत कम उम्र में नेशनल अवॉर्ड जीतकर खुद को हिंदी सिनेमा की टॉप एक्ट्रेस की लिस्ट में शामिल हुईं.

नई दिल्ली. स्मिता पाटिल हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा एक्ट्रेसेस में गिनी जाती हैं, जिन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग से फिल्मों में धाक जमाई. बहुत कम लोग जानते हैं कि एक्टिंग की दुनिया में आने से पहले वह दूरदर्शन पर न्यूज रीडर रह चुकी हैं.

अपनी भारी आवाज, सादगी और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस के लिए पहचानी जाने वाली स्मिता ने अपने करियर में हर तरह के रोल निभाए हैं. महाराष्ट्र के पुणे में जन्मी स्मिता पाटिल बहुत पढ़े-लिखे और प्रोग्रेसिव परिवार से थीं. बचपन से ही उन्हें कला, साहित्य और थिएटर में काफी दिलचस्पी थी.

एक्टिंग की दुनिया में आने से पहले स्मिता ने 70 के दशक में मुंबई दूरदर्शन में न्यूज रीडर के तौर पर अपना करियर शुरू किया था. उनकी आवाज और कॉन्फिडेंस ने लोगों का ध्यान खींच लिया. टीवी पर उनकी मौजूदगी इतनी दमदार थी कि मशहूर निर्देशक श्याम बेनेगल की नजर उन पर पड़ी.

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श्याम बेनेगल ने स्मिता को देखते ही उन्हें फिल्मों में काम दे दिया है. स्मिता पाटिल को पहचान साल 1976 में आई फिल्म ‘मंथन’ से मिली.एक स्ट्रॉन्ग वूमन का किरदार निभाया था. लोगों ने उनकी एक्टिंग को काफी पसंद किया था. साल 1977 में आई फिल्म ‘भूमिका’ ने उनके रातोंरात स्टार बना दिया.

22 साल की उम्र में उन्होंने अपने किरदार में ऐसी जान फूंक कि उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. अपने करियर में स्मिता ने राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन और नसीरउद्दीन शाह समेत हर स्टार के साथ काम किया.

बात अगर उनके करियर में की गई फिल्मों की करें तो उन्होंने ‘निशांत’, ‘चक्र’, ‘आक्रोश’, ‘उंबरठा’ और ‘मिर्च मसाला’ जैसी फिल्मों में अपने किरदारों से इतिहास रच दिया.‘नमक हलाल’, ‘शक्ति’, ‘बाजार’, ‘अर्थ’ और ‘मंडी’ जैसी फिल्मों ने उनका करियर ही पलट कर रख दिया.

काम के साथ-साथ स्मिता पाटिल, राज बब्बर संग अपने रिश्ते को लेकर भी खूब चर्चा में रहीं. साल 1986 में उनके बेटे प्रतीक बब्बर का जन्म हुआ. लेकिन बेटे के जन्म के बाद 1986 में उनका निधन हो गया.

बता दें कि इतनी कम जिंदगी जाने वाली स्मिता पाटिल ने अपने करियर में 80 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है. उनके निभाए गए किरदारों को लोग आज भी याद करते हैं. हिंदी सिनेमा में उनका योगदान कभी नहीं भुलाया जा सकता.

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