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बॉलीवुड में कॉमेडी फिल्मों की एक खास जगह होती है, लेकिन 2007 में एक ऐसी फिल्म आई जिसने एंटरटेनमेंट के पुराने तरीकों को ही बदल दिया. बिना लीड हीरोइन और बिना रोमांटिक गानों के ‘धमाल’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा धमाल मचाया जिसकी कल्पना खुद मेकर्स ने भी नहीं की थी. इंद्र कुमार के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म की सबसे खास बात यह थी कि चारों मेन कैरेक्टर्स ने पूरी फिल्म एक ही तरह के कपड़े पहने थे. संजू बाबा (संजय दत्त) की जबरदस्त मौजूदगी और रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी और आशीष चौधरी की चौकड़ी ने कॉमेडी का ऐसा धमाल मचाया जो आज भी दर्शकों को हैरान करता है.

नई दिल्ली. बॉलीवुड में जब भी कोई बड़ी फिल्म प्लान की जाती है, तो आमतौर पर एक खूबसूरत लीड एक्ट्रेस, अच्छे लोकेशन्स और दर्जनों कॉस्ट्यूम चेंज को प्रायोरिटी दी जाती है. लेकिन 2007 में, इंद्र कुमार ने इन सभी रिवाजों को दरकिनार करते हुए एक बड़ा एक्सपेरिमेंट किया. उन्होंने एक ऐसी फिल्म बनाई जिसमें कोई फीमेल लीड नहीं थी, कोई लव स्टोरी नहीं थी और सबसे दिलचस्प बात यह थी कि चारों मेन एक्टर्स (रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी और आशीष चौधरी) ने लगभग पूरी फिल्म में एक जैसे कपड़े पहने थे. फिल्म का नाम ‘धमाल’ था और इसने बॉक्स ऑफिस पर उतना ही अच्छा परफॉर्म किया जितना इसके नाम से पता चलता था. (फिल्म के एक सीन से ली गई तस्वीर.)

फिल्म की कहानी चार दोस्तों आदि (अरशद वारसी), मानव (जावेद जाफरी), रॉय (रितेश देशमुख) और बोमन (आशीष चौधरी) के इर्द-गिर्द घूमती है. इन चारों को समाज ‘बेकार’ समझता है, लेकिन किस्मत उन्हें एक मरते हुए क्रिमिनल (प्रेम चोपड़ा) तक ले जाती है, जो गोवा के एक गार्डन में एक बड़े ‘W’ के नीचे छिपे 10 करोड़ रुपये के खजाने का राज बताता है. यहीं से चूहे-बिल्ली का खेल शुरू होता है, जिसमें इंस्पेक्टर कबीर नायक (संजय दत्त) भी शामिल हो जाता है. फिल्म की रफ्तार इतनी तेज है कि दर्शकों को यह सोचने का मौका ही नहीं मिलता कि हीरोइन क्यों नहीं है.

‘धमाल’ की सबसे दिलचस्प टेक्निकल बात यह है कि इसके चारों हीरो पूरी फिल्म में एक जैसे कपड़े पहनते हैं. आदि की रंगीन शर्ट, मानव का लड़कों जैसा स्टाइल, रॉय की स्टाइलिश जैकेट और बोमन की सादगी… ये आउटफिट फिल्म का हिस्सा बन गए. इसके पीछे वजह यह थी कि फिल्म की कहानी कुछ घंटों या एक-दो दिन की भागदौड़ को दिखाती है. मेकर्स ने कंटिन्यूटी बनाए रखने के लिए कैरेक्टर्स के कॉस्ट्यूम बदलने से परहेज किया. आज के जमाने में जहां स्टार्स हर सीन में अपने आउटफिट बदलते हैं, वहीं पूरी फिल्म को एक ही आउटफिट में पूरा करना और फिर भी ऑडियंस को बांधे रखना एक बड़ी कामयाबी थी.
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अगर कोई फिल्म की जान था तो वह जावेद जाफरी (मानव) थे. उनके डायलॉग्स और उनकी मासूमियत भरी बेवकूफी ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया. अरशद वारसी (आदि) की कॉमिक टाइमिंग और चेहरे के एक्सप्रेशन ने उन्हें इस जॉनर का मास्टर साबित कर दिया. संजय दत्त ने फिल्म को वह वजन दिया जिसकी उसे जरूरत थी. एक टफ कॉप के तौर पर उनकी एंट्री और आखिर तक उनकी बेबसी ऑडियंस को खूब हंसाती है. इस बीच, रितेश और आशीष ने अपने रोल बहुत अच्छे से निभाए, जिससे यह एक परफेक्ट टीमवर्क वाली फिल्म बन गई.

₹19-20 करोड़ के मामूली बजट में बनी ‘धमाल’ ने रिलीज होते ही सनसनी मचा दी थी. फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ₹33 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और दुनिया भर में ₹50 करोड़ पार कर गई. यह उन दिनों ‘सुपरहिट’ थी.

यह फिल्म मेकर्स के लिए एक जैकपॉट थी, क्योंकि इसकी प्रोडक्शन कॉस्ट बहुत कम थी (विदेशी लोकेशन पर कोई गाना नहीं, कोई महंगे कॉस्ट्यूम नहीं), लेकिन रिटर्न बहुत ज्यादा था. आज भी, 2026 में जब हम यह फिल्म टीवी या OTT प्लेटफॉर्म पर देखते हैं तो इसके जोक्स अभी भी फ्रेश लगते हैं.

चाहे वह ‘अय्यर’ सीन (वेणुगोपाल अय्यर) हो या प्लेन उड़ाने की कोशिश करने वाला सीन, सोशल मीडिया पर मीम्स आज भी ट्रेंड करते हैं. इस फिल्म ने बॉलीवुड को बिना किसी बड़े कमर्शियल असर के एक सफल फिल्म बनाने की हिम्मत दी. ‘धमाल’ के बाद दो सीक्वल आए, लेकिन पहली फिल्म का जादू कभी दोहराया नहीं जा सका.

